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आठ डकैतों को फांसी की सजा: आईजी ने चेताया तो पुलिस ने छह दिन में पकड़ लिए थे छैमार, सराफ से मिला था सुराग

Fri, 08 Mar 2024 02:26 AM IST
बरेली ब्यूरो अमित सक्सेना, बरेली ब्यूरो
अमित सक्सेना, बरेली ब्यूरो Published by: बरेली ब्यूरो Updated Fri, 08 Mar 2024 02:26 AM IST
सार

बरेली में आयकर इंस्पेक्टर की मां और भाई-भाभी के हत्यारे आठ डकैतों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। डकैती का माल खरीदने वाले शाहजहांपुर के सराफ राजू वर्मा को उम्रकैद और पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह सनसनीखेज घटना 10 साल पहले हुई थी। बृहस्पतिवार को नौ दोषियों को सजा सुनाई गई। 

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when IG warned police arrested accused of triple murder case in bareily
अभियुक्तों को लेकर जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली की पॉश कॉलोनी में तिहरे हत्याकांड से भन्नाए पुलिस अफसरों ने जब चौकी प्रभारी के निलंबन का फरमान सुनाया, फिर सात दिन का अल्टीमेटम देकर फौरी तौर पर बख्श दिया गया। चौकी प्रभारी गजेंद्र त्यागी ने हौसले और मुखबिर तंत्र के दम पर छह दिन में छैमारों के गिरोह को पकड़ लिया। इस पर उन्हें इनाम मिला। छैमारों से त्यागी की ऐसी दुश्मनी रही कि बमुश्किल उनकी जान बची थी। इंस्पेक्टर गजेंद्र त्यागी इन दिनों रामपुर में तैनात हैं। तिहरे हत्याकांड के दौरान त्यागी जोगी नवादा चौकी के प्रभारी थे। वारदात के दौरान पुलिस फोर्स लोकसभा चुनाव के लिए बाहर गया था। 

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बारादरी इंस्पेक्टर आरके सिंह अवकाश पर थे। उस वक्त सभी अफसर मौके पर पहुंचे थे। तत्कालीन आईजी जकी अहमद और डीआईजी आरकेएस राठौर काफी नाराज थे। आईजी ने एसएसपी जे रविंद्र गौड़ से कहा कि चौकी प्रभारी को निलंबित कर दो। तब एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा ने बात संभाली।
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UP: आयकर इंस्पेक्टर की मां और भाई-भाभी की हत्या, 80 लाख की डकैती; छैमार गिरोह के आठ डकैतों को फांसी की सजा
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आईजी ने मीडिया के सामने ही कह दिया था कि सात दिन में खुलासा करके दिखाओ। इसके बाद त्यागी ने सारी ऊर्जा खुलासे में लगा दी। हत्या के तरीके से त्यागी भांप गए थे कि यह घुमंतू गिरोह का ही काम है। उन्होंने मुखबिरों के दम पर तार जोड़े तो पता लगा कि यह छैमार गैंग का काम है। उन्होंने काशीपुर से वाजिद को पकड़ा जो वहां फट्टा टाकीज लगाकर सिनेमा दिखा रहा था। 

छह दिनों में ही महिलाओं व सराफ समेत पूरा गिरोह त्यागी के कब्जे में था। त्यागी के मुताबिक अफसरों को शुरू में यकीन नहीं हुआ कि सही गिरोह पकड़ा गया है। इसलिए आरोपी पहले बिथरी थाने लाए गए। वहां कप्तान से लेकर आईजी तक ने पूछताछ की और बरामदगी देखकर तसल्ली की। इसके बाद त्यागी व उनकी टीम को कई इनाम व प्रशस्ति पत्र मिले।

सराफ की डायरी से मिले बदमाशों के नाम-पते
पुलिस को पहली सफलता सराफ राजू वर्मा को पकड़ने से मिली। शाहजहांपुर निवासी सराफ राजू ने कैंट के मोहनपुर में दुकान खोल रखी थी और चोरी व लूट के जेवर खरीदता था। इन बदमाशों का काफी माल राजू ने ही खरीदा था। राजू के पास डकैती के जेवर व एक डायरी मिली थी। इस डायरी में गिरोह के सदस्यों के असली नाम व पते पुलिस को मिल गए। इसके बाद वाजिद को उठाया गया और फिर हसीन समेत बाकी आरोपी मिल गए। 

छैमारों पर लिखी किताब, निकालते हैं पशु-पक्षियों की आवाज
त्यागी और तत्कालीन सीओ तृतीय असित श्रीवास्तव ने कई घटनाओं पर काम के बाद संयुक्त रूप से छैमारों पर एक किताब लिखी है जो नए पुलिसकर्मियों के लिए बेहद काम आ सकती है। इसमें छैमारों के अलावा कंजड़ प्रजाति के अन्य वर्गों की खासियत और अपराध के तरीके बताए गए हैं। 

बताया है कि छैमार गिरोह के लोग आसानी से लूट नहीं करते हैं। वे सोते हुए लोगों के सिर पर वार करते हैं जिससे उनके बचने की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है। ये जानवरों व पक्षियों की भाषा निकालना जानते हैं और ऐसा करके एक-दूसरे को संकेत देते हैं। हमला करते वक्त कम से कम छह वार करते हैं या घर में कम से कम छह लोगों को मारते हैं।

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