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यह कैसी आस्था.. न शहर की परवाह न भगवान की
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डीडीपुरम चौराहे पर रखीं भगवान की खंडित प्रतिमाएं और आस्था से जुड़ा अन्य सामान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
खंडित प्रतिमाएं और तस्वीरें रख दिए जाने से बिगड़ा डीडीपुरम चौराहे का हुलिया
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बरेली। शहर के सबसे पॉश इलाकों में शुमार होने वाले डीडीपुरम के चौराहे के पास ही लोगों ने भगवान की खंडित प्रतिमाएं और तस्वीरें रखनी शुरू कर दी हैं। चौराहे के पास स्ट्रीट लाइट के गोल चौक पर पॉलीबैग में रखकर छोड़ी गई ऐसी प्रतिमाओं का ढेर इकट्ठा हो गया है। इससे भगवान का तो असम्मान हो ही रहा है, चौराहे का हुलिया भी बिगड़ने लगा है।
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक खंडित देव प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है लेकिन डीडीपुरम में लोगों ने इस मान्यता की अनदेखी कर आसान रास्ता तलाश कर लिया है। कुछ समय से भगवान की खंडित प्रतिमाओं और तस्वीरों को चौराहे के पास बने एक गोल चौक पर रखा जा रहा है। अक्सर इन प्रतिमाओं को सड़क पर घूमने वाले आवारा पशु गोल चौक से गिरा देते हैं और गंदा कर देते हैं। डीडीपुरम में रहने वाले बरेली कॉलेज के पूर्व शिक्षक डॉ. डीके सक्सेना इसे घोर आपत्तिजनक बताते हैं। उनका कहना है कि लोगों को चौराहे को गंदा करने से फौरन बाज आना चाहिए। पुजारी पंडित अनुपम कौशिक इंदीवर कहते हैं कि खंडित देव प्रतिमा को चौराहे पर छोड़ना लोगों की अज्ञानता है। उन्हें विसर्जित किया जाना चाहिए।
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक खंडित देव प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है लेकिन डीडीपुरम में लोगों ने इस मान्यता की अनदेखी कर आसान रास्ता तलाश कर लिया है। कुछ समय से भगवान की खंडित प्रतिमाओं और तस्वीरों को चौराहे के पास बने एक गोल चौक पर रखा जा रहा है। अक्सर इन प्रतिमाओं को सड़क पर घूमने वाले आवारा पशु गोल चौक से गिरा देते हैं और गंदा कर देते हैं। डीडीपुरम में रहने वाले बरेली कॉलेज के पूर्व शिक्षक डॉ. डीके सक्सेना इसे घोर आपत्तिजनक बताते हैं। उनका कहना है कि लोगों को चौराहे को गंदा करने से फौरन बाज आना चाहिए। पुजारी पंडित अनुपम कौशिक इंदीवर कहते हैं कि खंडित देव प्रतिमा को चौराहे पर छोड़ना लोगों की अज्ञानता है। उन्हें विसर्जित किया जाना चाहिए।
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