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ये कैसा चुनाव कराया मेयर साहब!
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Tue, 06 Sep 2016 01:42 AM IST
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नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में कुछ दिलचस्प नजारे थे। मेयर डा. आईएस तोमर कहना है कि अगर कोई सभासद वोट डालने में सक्षम नहीं है तो उसका वोट डालने का अधिकार उनके पास है। पर ये क्या एक दो नहीं सपा के 11 और भाजपा के एक पार्षद के वोट मेयर ने ही डलवाए। इनमें ज्यादातर पढ़े लिखे हैं और उनका नजर भी ठंीकठाक ही है। ये नजारा देख कर क्लिक क्लिक करते कैमरे वीडियो बनाने लगे। सपा पार्षद के भाई, जिनकी पहचान खुद पार्षद की है, वह अपने भाई के साथ मतदान पेटिका तक वोट डलवाने ले गए। नियमानुसार मतदान स्थल तक केवल वोटर जा सकता है। भाजपाई भी सदन के अंदर मूकदर्शक बने रहे। हालांकि बाद में सदन के बाहर आकर बयानबाजी जरूर हुई।
नगर निगम सभागार में कार्यकारिणी के छह सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान सवा दो बजे प्रारंभ हुआ। पार्षद वोट डाल रहे थे। सबसे पहले डेलापीर की पार्षद उर्मिला देवी ने मेयर से वोट डालने की बात कही। कुछ पार्षदों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि पिछले चुनाव में तो उर्मिला ने अपना वोट खुद डाला था लेकिन निरक्षर होने के चलते उर्मिला को अनुमति मिल गई। उन्होंने मेयर के कान में बताया कि किसे वोट देना है। इसके बाद मेयर से वोट डलवाने का सिलसिला चल पड़ा। पार्षद उवैस खां, मोहम्मद अकील गुड्डू, उस्मान अल्वी, रुबी सलीम, मुख्त्यार खां, सरवर, शेखरपाल, केसर जहां और मेराज अंसारी ने अपना वोट मेयर से डलवाए। मेयर के आगे एक सूची रखी थी जिस पर वह टिक करते जा रहे थे। जो स्लिप उन्हें देता उस पढ़ कर टिक करते थे फिर स्लिप मोड़ कर नीचे गिरा देते और पर्ची बना कर दे देते, वोटर उसे मतपेटिका में डाल देता।
हद तो तब हो गई, जब सपा के बरेली कालेज से पढ़े और दिखने में हष्टपुष्ट पार्षद गौरव सक्सेना ने भी अपना वोट मेयर से टिक कराकर डाला। भाजपा पार्षद अनीता राय भी मेयर से वोट डलवाने वालों में शामिल रही। भाजपा पार्षदों ने दबी जुबान से नाराजगी जताई लेकिन किसी ने खुलकर विरोध नहीं किया। सदन में पार्षद पति भी अंदर टहलते नजर आए। इनके आवागमन पर कोई पाबंदी नहीं दिखी।
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भाइयों से असली पार्षद कौन है भाई!
वार्ड33 चौधरी मोहल्ला के सपा समर्थित पार्षद सूर्य प्रकाश गुप्ता कभी नगर निगम में नहीं दिखाई देते। उनकी पार्षदी उनके भाई चंद्रप्रकाश गुप्ता ही चलाते हैं। नगर निगम में अफसर से लेकर पार्षद और आम जनता भी सूर्यप्रकाश के बजाय उनके भाई चंद्रप्रकाश को ही पार्षद समझती है। पार्षद का चुनाव जीतने के बाद प्रमाण पत्र लेने भी चंद्रप्रकाश ही आए थे। फूल माला से स्वागत भी चंद्र प्रकाश का हुआ था। कार्यकारिणी चुनाव में चंद्रप्रकाश अपने भाई सूर्य प्रकाश का वोट डलवाने के लिए मतदान पेटिका तक पहुंच गए। कुछ लोगों ने फर्जी वोट समझाया तो बताया गया कि असली पार्षद ही वोट डाल रहे हैं।
मेयर को इस तरह किसी भी बैलेट पेपर पर निशान नहीं लगाना चाहिए था। सिर्फ निरक्षर और दिव्यांग वोटर के ही वोट डालने में मदद करने का प्रावधान है। इसके लिए भी कुछ दिन पहले अनुमति लेनी पड़ती है। सदन के अंदर मौके पर ऐसा नहीं किया जा सकता।
-विकास शर्मा, नेता पार्षद दल भाजपा
अगर कोई पार्षद सदन के अंदर वोट डालने के लिए सहायता मांगता है तो उसको मैं ही सहायता उपलब्ध करा सकता हूं। जब पार्षदों ने हमसे वोट डालने में सहायता मांगी तो हमने उनके वोट डाले। अगर भाजपा पार्षदों को आपत्ति थी तो वह सदन के अंदर चुप क्यों रहे। वहीं ये मामला उठाते।
- डा. आईएस तोमर, मेयर
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नगर निगम सभागार में कार्यकारिणी के छह सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान सवा दो बजे प्रारंभ हुआ। पार्षद वोट डाल रहे थे। सबसे पहले डेलापीर की पार्षद उर्मिला देवी ने मेयर से वोट डालने की बात कही। कुछ पार्षदों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि पिछले चुनाव में तो उर्मिला ने अपना वोट खुद डाला था लेकिन निरक्षर होने के चलते उर्मिला को अनुमति मिल गई। उन्होंने मेयर के कान में बताया कि किसे वोट देना है। इसके बाद मेयर से वोट डलवाने का सिलसिला चल पड़ा। पार्षद उवैस खां, मोहम्मद अकील गुड्डू, उस्मान अल्वी, रुबी सलीम, मुख्त्यार खां, सरवर, शेखरपाल, केसर जहां और मेराज अंसारी ने अपना वोट मेयर से डलवाए। मेयर के आगे एक सूची रखी थी जिस पर वह टिक करते जा रहे थे। जो स्लिप उन्हें देता उस पढ़ कर टिक करते थे फिर स्लिप मोड़ कर नीचे गिरा देते और पर्ची बना कर दे देते, वोटर उसे मतपेटिका में डाल देता।
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हद तो तब हो गई, जब सपा के बरेली कालेज से पढ़े और दिखने में हष्टपुष्ट पार्षद गौरव सक्सेना ने भी अपना वोट मेयर से टिक कराकर डाला। भाजपा पार्षद अनीता राय भी मेयर से वोट डलवाने वालों में शामिल रही। भाजपा पार्षदों ने दबी जुबान से नाराजगी जताई लेकिन किसी ने खुलकर विरोध नहीं किया। सदन में पार्षद पति भी अंदर टहलते नजर आए। इनके आवागमन पर कोई पाबंदी नहीं दिखी।
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भाइयों से असली पार्षद कौन है भाई!
वार्ड33 चौधरी मोहल्ला के सपा समर्थित पार्षद सूर्य प्रकाश गुप्ता कभी नगर निगम में नहीं दिखाई देते। उनकी पार्षदी उनके भाई चंद्रप्रकाश गुप्ता ही चलाते हैं। नगर निगम में अफसर से लेकर पार्षद और आम जनता भी सूर्यप्रकाश के बजाय उनके भाई चंद्रप्रकाश को ही पार्षद समझती है। पार्षद का चुनाव जीतने के बाद प्रमाण पत्र लेने भी चंद्रप्रकाश ही आए थे। फूल माला से स्वागत भी चंद्र प्रकाश का हुआ था। कार्यकारिणी चुनाव में चंद्रप्रकाश अपने भाई सूर्य प्रकाश का वोट डलवाने के लिए मतदान पेटिका तक पहुंच गए। कुछ लोगों ने फर्जी वोट समझाया तो बताया गया कि असली पार्षद ही वोट डाल रहे हैं।
मेयर को इस तरह किसी भी बैलेट पेपर पर निशान नहीं लगाना चाहिए था। सिर्फ निरक्षर और दिव्यांग वोटर के ही वोट डालने में मदद करने का प्रावधान है। इसके लिए भी कुछ दिन पहले अनुमति लेनी पड़ती है। सदन के अंदर मौके पर ऐसा नहीं किया जा सकता।
-विकास शर्मा, नेता पार्षद दल भाजपा
अगर कोई पार्षद सदन के अंदर वोट डालने के लिए सहायता मांगता है तो उसको मैं ही सहायता उपलब्ध करा सकता हूं। जब पार्षदों ने हमसे वोट डालने में सहायता मांगी तो हमने उनके वोट डाले। अगर भाजपा पार्षदों को आपत्ति थी तो वह सदन के अंदर चुप क्यों रहे। वहीं ये मामला उठाते।
- डा. आईएस तोमर, मेयर