{"_id":"5e28a4dc8ebc3e4b51755a6b","slug":"weather-bareilly-news-bly393025664","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदूषण क्या गुल खिला रहा है.. अस्पतालों में जाकर देखिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदूषण क्या गुल खिला रहा है.. अस्पतालों में जाकर देखिए
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला अस्पताल में ही फिलहाल रोजाना डेढ़ सौ सांस के रोगियों के आने का औसत
स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर-2019 की रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के उच्च स्तर तक बढ़ने से दक्षिण एशियाई बच्चे का जीवनकाल दो साल तक कम हो सकता है। वायु प्रदूषण गर्भावस्था के दौरान विशेष रूप से हानिकारक है।
बरेली। प्रदूषण वैसे तो पूरे शरीर को प्रभावित करता है, लेकिन, जहरीली हवा फेफड़ों तक पहुंचने के बाद सबसे पहले आपको सांस का रोगी बनाती है। शहर में एक साल में हवा में प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ी है जिसने अस्थमा से जूझ रहे मरीजों की परेशानी को और बढ़ाने का काम किया है। सांस के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। 2019 में जिला अस्पताल में सांस के औसतन 70 मरीज रोज पहुंचने का आंकड़ा लगातार बना रहा है और नवंबर के बाद यह संख्या डेढ़ सौ तक पहुंच गई। अस्थमा, निमोनिया, गले में खराश, सांस फू लना, चक्कर आना, सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक अकेले उन्हाेंने ही 2019 में ओपीडी के दौरान करीब 50 हजार मरीजों का चेकअप किया जिनमें ऐसे मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा थी जिन पर वायु प्रदूषण का असर हुआ था।
प्रदूषण के असर के लक्षण
- जुकाम होना, आंखों में जलन, साइनस व अस्थमा, खांसी, गले में संक्रमण, फेफ ड़ों की बीमारियां, सांस लेने में तकलीफ ।
ऐसे बचें
- आंखों पर चश्मा लगाएं, सुबह-शाम टहलने से बचें, मास्क लगाकर निकलें, घर के अंदर सफ ाई रखें, घर के बाहर सड़क को गीला रखें ताकि धूल के दूषित कण हवा में न उडे़ं।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर-2019 की रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के उच्च स्तर तक बढ़ने से दक्षिण एशियाई बच्चे का जीवनकाल दो साल तक कम हो सकता है। वायु प्रदूषण गर्भावस्था के दौरान विशेष रूप से हानिकारक है।
बरेली। प्रदूषण वैसे तो पूरे शरीर को प्रभावित करता है, लेकिन, जहरीली हवा फेफड़ों तक पहुंचने के बाद सबसे पहले आपको सांस का रोगी बनाती है। शहर में एक साल में हवा में प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ी है जिसने अस्थमा से जूझ रहे मरीजों की परेशानी को और बढ़ाने का काम किया है। सांस के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। 2019 में जिला अस्पताल में सांस के औसतन 70 मरीज रोज पहुंचने का आंकड़ा लगातार बना रहा है और नवंबर के बाद यह संख्या डेढ़ सौ तक पहुंच गई। अस्थमा, निमोनिया, गले में खराश, सांस फू लना, चक्कर आना, सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक अकेले उन्हाेंने ही 2019 में ओपीडी के दौरान करीब 50 हजार मरीजों का चेकअप किया जिनमें ऐसे मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा थी जिन पर वायु प्रदूषण का असर हुआ था।
विज्ञापन
प्रदूषण के असर के लक्षण
- जुकाम होना, आंखों में जलन, साइनस व अस्थमा, खांसी, गले में संक्रमण, फेफ ड़ों की बीमारियां, सांस लेने में तकलीफ ।
ऐसे बचें
- आंखों पर चश्मा लगाएं, सुबह-शाम टहलने से बचें, मास्क लगाकर निकलें, घर के अंदर सफ ाई रखें, घर के बाहर सड़क को गीला रखें ताकि धूल के दूषित कण हवा में न उडे़ं।
विज्ञापन