पीने लायक नहीं यहां का पानी: रेलवे स्टेशन-बस अड्डों के पानी में 'सुपरबग', इन पर एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर
जांच में पता चला है कि रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डा और सार्वजनिक स्थलों के पानी में घातक बैक्टीरिया हैं। इनमें से 70 फीसदी पर ‘सुपरबग’ हैं। इन पर एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर साबित हो गईं।
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बरेली में सार्वजनिक स्थानों पर शुद्ध जल मुहैया कराने के दावों की भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) एपिडेमियोलॉजी की जांच ने पोल खोल दी है। जांच में पता चला है कि रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डा और सार्वजनिक स्थलों के पानी में घातक बैक्टीरिया हैं। इनमें से 70 फीसदी पर ‘सुपरबग’ हैं। इन पर एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर साबित हो गईं।
एपिडेमियोलॉजी विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भोजराज सिंह का माइक्रोबायोलॉजी के एक्टा साइंटिफिक जनरल 2022 में शोध प्रकाशित हुआ है। इसके मुताबिक, मार्च और अप्रैल-2019 में विभिन्न सार्वजनिक स्थानों और तालाबों से पानी के सैंपल लिए गए थे। इनकी जांच 2021 के आखिर तक चली।
इस दौरान पेयजल में कौन-कौन से बैक्टीरिया मिले, उन पर एंटीबायोटिक का प्रभाव, मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव आदि पर शोध किए गया गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक 36 सैंपल में 20 अधोमानक थे। उच्च क्वालीफार्म काउंट वाले 33 फीसदी सैंपल में ई-कोलाई, तीन सैंपल में सुपरबग पाए गए। पानी तो छोड़िए 23 टोंटियों की जांच में भी 12 पर सुपरबग मौजूद मिले।
तालाब के पानी के 45 सैंपल में से 20 में सुपरबग रहे। कुल 111 सैंपल में 363 बैक्टीरिया मिले। जिन 70 फीसदी बैक्टीरिया पर दवाएं बेअसर रहीं, उन्हें सुपरबग नाम दिया गया है। डॉ. भोजराज सिंह के मुताबिक पानी से ज्यादा घातक नल की टोंटी पर हाथ रखकर पानी पीना है, क्योंकि पानी में बैक्टीरिया मिले पर टोंटी पर सुपरबग मौजूद थे। इन पर एंटीबायोटिक दवाएं इमीपैनम, मीरोपैनम और कार्बापैनम ग्रुप बेअसर पाया गया।
कॉलोनियों के तालाब और नालियों से भी लिए सैंपल
पानी की जांच के लिए सैंपल डोहरा रोड, आकाशपुरम, अक्षर विहार समेत कई कॉलोनियों और मोहल्लों के 17 और ग्रामीण इलाके के 19 तालाबों से लिए गए। इसी तरह रेलवे स्टेशन, रोडवेज के पुराना बस अड्डा और सेटेलाइट, कचहरी, बाजारों में लगे सार्वजनिक स्थलों के वाटर बूथों से पानी के सैंपल लिए गए। इनमें नल की टोंटियों के ऊपर और नालियों के पानी के सैंपल भी शामिल रहे। रिकॉर्ड के मुताबिक कुल 111 सैंपल मेें 45 सैंपल तालाब, 36 वाटर कूलर, 23 टोंटी और सात नाली से लिए गए थे। इनमें 363 तरह के बैक्टीरिया मिले।
एंटीबॉयोटिक के प्रति होती है प्रतिरोधी क्षमता
डॉ. भोजराज के मुताबिक एंटीबायोटिक कार्बापैनम एंटीमाइक्रोबियल के प्रति जिस बैक्टीरिया में प्रतिरोधी क्षमता विकसित होती है, उसे सुपरबग कहते हैं। इन पर कोई एंटीबायोटिक दवा प्रभावी नहीं होती। अगर लोगों के शरीर में इनका प्रवेश हो जाए तो वे गंभीर बीमार हो सकते हैं। समय से इलाज न मिलना और घातक हो सकता है। शोध कार्य में डॉ. भोजराज के साथ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र सिन्हा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनोद, शोधार्थी रविचंद्रन कार्तिकेयन, वर्षा जयाकुमार, आकांक्षा यादव और हिमानी अग्री शामिल रहीं।
बैक्टीरिया और उनसे होने वाले रोग
बैक्टीरिया- सैंपलिंग, रोग
स्यूडोमोनास- 39, फेफड़ों, घाव, किडनी संबंधी
ई-कोलाई- 32, डायरिया, किडनी संबंधी
ऐरोमोनास- 29 दस्त, उल्टी संबंधी
क्लैबसिल्ला- 20, निमोनिया और डायरिया
स्टेफाइलोकाकस- 20, फोड़े, फुंसी, घाव संबंधी
विबेरियो- 07, संभावित हैजा
एडवर्डसिएल्ला- 03, घाव में सड़न, मछलियों में गलन