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रामपुर के ठेकेदारों की मर्जी से चला जल निगम

Sat, 25 Mar 2017 01:44 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Sat, 25 Mar 2017 01:44 AM IST
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Water corporation run by Rampur contractors
Water corporation run by Rampur contractors - फोटो : बरेली, अमर उजाला
 सपा सरकार के एक पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां के संरक्षण में जल निगम पर पूरे पांच साल रामपुर के ठेकेदारों का कब्जा रहा। ठेकेदारों ने जैसे चाहा, वैसे जल निगम को चलाया। ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं के 18 कामों में 46 करोड़ से ज्यादा के काम  मंत्री के नजदीकी चार ठेकेदारों को ही मिले। रामपुर के एक ठेकेदार ने अकेले 30 करोड़ से ज्यादा के ठेके हथिया लिए। बड़े पैमाने पर बजट का दुुरुपयोग किया गया। इसमें तत्कालीन एक्सईएन और एई तो निलंबित हो गए लेकिन घटिया पानी की टंकी बनाने और कम गहराई में पानी की पाइप लाइन डालने वाले किसी ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जल निगम के इंजीनियरों ने तत्कालीन नगर विकास मंत्री के दबाव में दूसरी मदों से ठेकेदारों को करोड़ों के पेमेंट कर दिए। इसके बावजूद पांच साल बाद  अधिकांश परियोजनाएं अधूरी पड़ी है। 
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केंद्र सरकार की अनुमति से 2012-13 में बरेली के ग्रामीण इलाकों में 18 पेयजल परियोजाएं शुरू हुई थीं। अलग-अलग परियोजना के लिए 46 करोड़ से ज्यादा के बजट की स्वीकृति मिली। दो साल में परियोजनाओं को पूरा करने के लिए जल निगम को प्रत्येक परियोजना में औसतन 50 फीसदी बजट भी जारी कर दिया गया। जल निगम ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता अपनाए बिना 10 परियोजनाओं के ठेके अब्दुल रऊफ एंड संस को दे दिए। फर्म के ठेकेदार महरूफ कैबिनेट मंत्री के खास माने जाते हैं। बिथरी चैनपुर पेयजल परियोजना का ठेका अग्रवाल कांस्ट्रक्शन को मिला जो 668.35 लाख था। ये फर्म भी रामपुर की थी। बताया जाता है कि जब जलनिगम पर रामपुर के ठेकेदारों को ठेका देने का दबाव बढ़ा तोतत्कालीन एक्सईएन दिनेश चंद्रा ने बरेली की दो परियोजनाओं के ठेके सिंघल ब्रदर्श के ठेकेदार अशोक सिंघल को दिला दिए। 
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सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन एक्सईएन इस फर्म में अप्रत्यक्ष रूप से खुद साझेदार थे। बिथरी परियोजना का ठेका जलनिगम के तत्कालीन एई आरएस पाल ने अपने रिश्तेदार के नाम खुद ले रखा था। सीएंडडीएस में नियुक्ति के दौरान आरएस पाल पर कई करोड़ के घपले की जांच पहले से चल रही थी। इसके बावजूद वह जलनिगम में नौकरी के साथ ठेकेदारी करने में भी लगे थे। इन घपलों में शासन ने दो साल पहले दोनों को निलंबित कर न केवल मुख्यालय से अटैच किया बल्कि एसआर पाल के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई गई। विवेचना में पुलिस ने एई एसआर पाल को क्लीन चिट दे दी। रामपुर के किसी ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
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ये था घपला
ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं में पानी की टंकियां बननी थीं और पाइप लाइन पड़नी थी। एक तो इनके टेंडर दबाव में हुए। 16 परियोजनाओं के टेंडर रामपुर के तीन ठेकेदारों को मिल गए जबकि दो बरेली की फर्म को। ठेकेदारों ने टंकी निर्माण में दोयम दर्जे की ईंट लगाई और निर्धारित मानक से कम सीमेंट लगाकर रेत की मात्रा अधिक लगाई गई। अधिकांश ठेकेदार  काम आधा अधूरा छोड़ गए। पाइप लाइन निर्धारित मानक एक मीटर से कम गहराई में पड़ने से लीकेज होनी शुरू हो गई है। 
यहां हुआ घपला 
मोहम्मदगंज (मीरगंज) सिसोना, गैनी और शिवपुरी (मझगवां) खनगवां श्याम और मनौना (आंवला), टिसुआ (फतेहगंज पूर्वी), टाह प्यारी और जरेली (नवाबगंज), जाम सावंत सुमाली, गिरधरपुर, मदनापुर, दुनका (बहेड़ी), परसोना (बिथरी), पचद्ेयोरा कलान (भोजीपुरा) 


ग्रामीण पेयजल परियोजनाएं मेरे आने से पहले स्वीकृत हुई थीं। टेंडर प्रक्रिया भी पहले ही हो गई थी। कुछ परियोजनाओं में बजट नहीं मिला। कहीं कुछ कमी है तो उनको ठीक कराया जा रहा है। अनियमितताओं की जांच होकर रिपोर्ट भी जा चुकी है। संजय कुमार, एक्सईएन जल निगम   
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