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चलते रिक्शे में हो गया बेटे का जन्म
बरेली, ब्यूरो
Updated Sat, 03 Dec 2016 01:40 AM IST
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प्रसव पीड़ा को दुनिया की सबसे बड़ी पीड़ा माना गया है। नजराना के इस दर्द को कई लोगों ने भरी सड़क पर तब देखा जब वह रिक्शे पर अस्पताल ले जायी जा रही थी। रिक्शे में तड़पती ये मां किसी तरह अपने पेट को संभाले हुए थी। अचानक सलवार के अंदर ही नवजात गर्भ से बाहर आकर रोने लगा तो बेबस मां ने किसी तरह एक हाथ से उसे संभाला। तड़पती मां और रोते हुए नवजात को उसी हाल में अस्पताल में ले जाया गया तब जाकर उसकी सफाई हो पायी।
हैरत की बात ये थी कि परिवार वालों ने न तो 102 एंबुलेंस बुलाई और न ही किसी दूसरे वाहन का इंतजाम किया। दर्द से तड़पती मां रिक्शे में रास्ते में झटके खा-खाकर वह बेहाल हो गई। अस्पताल में बच्चे को देखकर वह सारा दर्द भूल गई। उसने नवजात बेटे को आंचल में छिपा लिया। शुक्र रहा कि जच्चा-बच्चा को कोई नुकसान नहीं हुआ।
सूफीटोला की 27 वर्षीय नजराना को डॉक्टर ने 17 दिसंबर को डिलीवरी की तारीख दी थी, लेकिन उसे शुक्रवार को ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। घर में जेठानी थीं। उन्हाेंने 102 एंबुलेंस को कॉल करने के बजाय देवर आबिद को फोन कर बुला लिया। आबिद वाहन मिस्त्री हैं। सूचना पाकर वह तुरंत घर पहुंच गए। इसके बाद रिक्शे से ही नजराना को लेकर अस्पताल निकल पड़े। अस्पताल गेट पर पहुंचते ही उसे रिक्शे में ही प्रसव हो गया। इसके बाद रिक्शा रुकवाकर अस्पताल को सूचित किया गया। जानकारी मिलते ही कर्मचारी तुरंत स्ट्रेचर लेकर पहुंच गए। जच्चा और बच्चा अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टराें ने बताया कि इस लापरवाही से दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था, लेकिन वे स्वस्थ हैं।
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जानबूझकर नहीं बुलाई एंबुलेंस
नजराना के पति आबिद ने बताया कि उन्हें 108 और 102 एंबुलेंस के बारे में जानकारी है, लेकिन जानबूझकर नहीं बुलाई। उन्हें आशंका थी कि कहीं शहामतगंज में एंबुलेंस जाम में न फंस जाए। आबिद की एक बेटी भी महिला अस्पताल में हुई थी।
ये भी एक सबक है
डिलीवरी की तिथि डॉक्टर नौ माह यानी 40 हफ्ते प्लस सात दिन को मानते हैं। 40 हफ्ते का गर्भ पूरा होता है, लेकिन अगर 35वें हफ्ते में बच्चा होता है तो इसे भी पूरे माह का बच्चा मानते हैं। गर्भवती महिलाआें को बता दिया जाता है कि 36वें हफ्ते में बच्चा गर्भ में मूवमेंट करेगा, अगर इस दौरान हल्का सा भी दर्द या कुछ दिक्कत हो तो मतलब वह प्रसव पीड़ा के करीब आ रही है। उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। रक्त या पानी बहने पर अस्पताल पहुंचने में जरा भी देर न करें। नजराना के मामले में स्पीड ब्रेकर पर झटका लगने से हो सकता है कि प्रसव हो गया हो। इसलिए, अस्पताल ले जाते समय महिला को लिटाकर ले जाएं और पैर थोड़ी ऊंचाई पर रखें। हल्का दर्द और प्रसव का रास्ता खुलना पहली स्टेज है। इसके 16 घंटे के अंदर प्रसव हो जाता है। वहीं, प्रसव द्वार खुलने के बाद दूसरी स्टेज मात्र दो घंटे की रह जाती है।
- डॉ. भारती सरन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
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हैरत की बात ये थी कि परिवार वालों ने न तो 102 एंबुलेंस बुलाई और न ही किसी दूसरे वाहन का इंतजाम किया। दर्द से तड़पती मां रिक्शे में रास्ते में झटके खा-खाकर वह बेहाल हो गई। अस्पताल में बच्चे को देखकर वह सारा दर्द भूल गई। उसने नवजात बेटे को आंचल में छिपा लिया। शुक्र रहा कि जच्चा-बच्चा को कोई नुकसान नहीं हुआ।
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सूफीटोला की 27 वर्षीय नजराना को डॉक्टर ने 17 दिसंबर को डिलीवरी की तारीख दी थी, लेकिन उसे शुक्रवार को ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। घर में जेठानी थीं। उन्हाेंने 102 एंबुलेंस को कॉल करने के बजाय देवर आबिद को फोन कर बुला लिया। आबिद वाहन मिस्त्री हैं। सूचना पाकर वह तुरंत घर पहुंच गए। इसके बाद रिक्शे से ही नजराना को लेकर अस्पताल निकल पड़े। अस्पताल गेट पर पहुंचते ही उसे रिक्शे में ही प्रसव हो गया। इसके बाद रिक्शा रुकवाकर अस्पताल को सूचित किया गया। जानकारी मिलते ही कर्मचारी तुरंत स्ट्रेचर लेकर पहुंच गए। जच्चा और बच्चा अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टराें ने बताया कि इस लापरवाही से दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था, लेकिन वे स्वस्थ हैं।
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जानबूझकर नहीं बुलाई एंबुलेंस
नजराना के पति आबिद ने बताया कि उन्हें 108 और 102 एंबुलेंस के बारे में जानकारी है, लेकिन जानबूझकर नहीं बुलाई। उन्हें आशंका थी कि कहीं शहामतगंज में एंबुलेंस जाम में न फंस जाए। आबिद की एक बेटी भी महिला अस्पताल में हुई थी।
ये भी एक सबक है
डिलीवरी की तिथि डॉक्टर नौ माह यानी 40 हफ्ते प्लस सात दिन को मानते हैं। 40 हफ्ते का गर्भ पूरा होता है, लेकिन अगर 35वें हफ्ते में बच्चा होता है तो इसे भी पूरे माह का बच्चा मानते हैं। गर्भवती महिलाआें को बता दिया जाता है कि 36वें हफ्ते में बच्चा गर्भ में मूवमेंट करेगा, अगर इस दौरान हल्का सा भी दर्द या कुछ दिक्कत हो तो मतलब वह प्रसव पीड़ा के करीब आ रही है। उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। रक्त या पानी बहने पर अस्पताल पहुंचने में जरा भी देर न करें। नजराना के मामले में स्पीड ब्रेकर पर झटका लगने से हो सकता है कि प्रसव हो गया हो। इसलिए, अस्पताल ले जाते समय महिला को लिटाकर ले जाएं और पैर थोड़ी ऊंचाई पर रखें। हल्का दर्द और प्रसव का रास्ता खुलना पहली स्टेज है। इसके 16 घंटे के अंदर प्रसव हो जाता है। वहीं, प्रसव द्वार खुलने के बाद दूसरी स्टेज मात्र दो घंटे की रह जाती है।
- डॉ. भारती सरन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ