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वायरल का हमला... बारिश शुरू होते ही ओपीडी में दुगने मरीज
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अस्पतालों में आ रहे हैं सर्दी-बुखार, जुकाम, डायरिया और एलर्जी जैसे वायरस जनित रोगों के मरीज
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हफ्ता भर पहले तक जिला अस्पताल की ओपीडी में था चार सौ मरीजों का औसत, अब आठ सौ
बरेली। मानसूनी बारिश ने गर्मी से तो कुछ राहत दी लेकिन वायरस जनित बीमारियों को भी साथ ले आई। नतीजा यह है कि अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल के अलावा जिले भर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुंचने वाला हर तीसरा मरीज वायरल से ग्रसित है। डॉक्टरों ने बदलते मौसम में लोगों को सतर्क रहने का सुझाव दिया है।
बारिश शुरू होने के बाद जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की तादाद बढ़ गई है। पहले हर रोज जहां चार से पांच सौ मरीज पहुंच रहे थे, वहीं अब यह संख्या आठ सौ से ऊपर निकल गई है। सर्वाधिक मरीज सर्दी, जुकाम, बुखार, डायरिया और स्किन एलर्जी जैसे वायरल रोगों के हैं। मौसम का बदलाव बच्चों को और ज्यादा प्रभावित कर रहा है। लिवर, निमोनिया, सांस, आंख के मरीज भी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करमेंद्र के मुताबिक बारिश में भीगने से बच्चों में स्किन एलर्जी हो रही है। बुखार, सांस की दिक्कत और सर्दी-जुकाम से भी ग्रसित बच्चे पहुंच रहे हैं। उन्होंने बच्चों को बारिश में भीगने से बचाने, पानी उबालकर पिलाने, विटामिन-सी की गोली देने और बासी भोजन न देने का सुझाव दिया है।
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बारिश के बाद बढ़ता है बैक्टीरिया का भी प्रकोप
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक बारिश के मौसम में पानी में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो कई बीमारियों की वजह बन सकते हैं। दूषित जल के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा तमाम कीटाणु, मच्छर का प्रकोप बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा रहता है। बारिश में पाचन तंत्र गड़बड़ाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
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ओपीडी में भीड़ से संक्रमण की आशंका
जिला अस्पताल की ओपीडी में काफी तादाद में मरीज पहुंचने से दो गज की दूरी का नियम तार-तार हो रहा है। चूंकि कोरोना संक्रमण के मामले अभी शून्य नहीं हुए हैं लिहाजा एक संक्रमित से कई लोगों के संक्रमित होने की भी आशंका है। ओपीडी के कर्मचारी लोगों को दो गज की दूरी बनाकर खड़े होने का सुझाव दे रहे हैं लेकिन भीड़ इतनी है कि इसका पालन नहीं हो पा रहा है। हालांकि एहतियातन ओपीडी कक्ष में पॉलीथिन की शीट लगा दी गई है।
ऐसे बचें वायरल बीमारियों से
- सब्जी-फल को धोकर प्रयोग करें, बासी खाने और पहले से कटे फल न खाएं।
- - तली-भुनी चीजों और बाहर के खाने से परहेज करें, उबला हुआ या साफ पानी ही पिएं।
- - बारिश में भीगने से बचें। भीगने के बाद बालों को सुखाएं, अस्थमा के रोगी कतई न भीगें।
- - गीले कपड़ों को शरीर पर ज्यादा देर तक न रहने दें, बच्चे और बुजुर्ग खास ख्याल रखें।
- - हल्दी, इलायची, सौंफ, दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- - घर में और छत पर बारिश का पानी जमा न होने दें। शाम को खिड़की-दरवाजा बंद रखें।
- - बच्चों के स्कूल से आने के बाद उनके हाथ साबुन से धोएं, स्वच्छता पर ध्यान दें।
बारिश के बाद वायरल बीमारियां बढ़ने की आशंका रहती है। आजकल ज्यादातर वायरल से ग्रसित मरीज ही ओपीडी में पहुंच रहे हैं। - डॉ. सुबोध शर्मा, एडीएसआईसी/सीएमएस जिला अस्पताल
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हफ्ता भर पहले तक जिला अस्पताल की ओपीडी में था चार सौ मरीजों का औसत, अब आठ सौ बरेली। मानसूनी बारिश ने गर्मी से तो कुछ राहत दी लेकिन वायरस जनित बीमारियों को भी साथ ले आई। नतीजा यह है कि अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल के अलावा जिले भर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुंचने वाला हर तीसरा मरीज वायरल से ग्रसित है। डॉक्टरों ने बदलते मौसम में लोगों को सतर्क रहने का सुझाव दिया है।
बारिश शुरू होने के बाद जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की तादाद बढ़ गई है। पहले हर रोज जहां चार से पांच सौ मरीज पहुंच रहे थे, वहीं अब यह संख्या आठ सौ से ऊपर निकल गई है। सर्वाधिक मरीज सर्दी, जुकाम, बुखार, डायरिया और स्किन एलर्जी जैसे वायरल रोगों के हैं। मौसम का बदलाव बच्चों को और ज्यादा प्रभावित कर रहा है। लिवर, निमोनिया, सांस, आंख के मरीज भी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करमेंद्र के मुताबिक बारिश में भीगने से बच्चों में स्किन एलर्जी हो रही है। बुखार, सांस की दिक्कत और सर्दी-जुकाम से भी ग्रसित बच्चे पहुंच रहे हैं। उन्होंने बच्चों को बारिश में भीगने से बचाने, पानी उबालकर पिलाने, विटामिन-सी की गोली देने और बासी भोजन न देने का सुझाव दिया है।
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बारिश के बाद बढ़ता है बैक्टीरिया का भी प्रकोप
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक बारिश के मौसम में पानी में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो कई बीमारियों की वजह बन सकते हैं। दूषित जल के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा तमाम कीटाणु, मच्छर का प्रकोप बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का खतरा रहता है। बारिश में पाचन तंत्र गड़बड़ाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
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ओपीडी में भीड़ से संक्रमण की आशंका
जिला अस्पताल की ओपीडी में काफी तादाद में मरीज पहुंचने से दो गज की दूरी का नियम तार-तार हो रहा है। चूंकि कोरोना संक्रमण के मामले अभी शून्य नहीं हुए हैं लिहाजा एक संक्रमित से कई लोगों के संक्रमित होने की भी आशंका है। ओपीडी के कर्मचारी लोगों को दो गज की दूरी बनाकर खड़े होने का सुझाव दे रहे हैं लेकिन भीड़ इतनी है कि इसका पालन नहीं हो पा रहा है। हालांकि एहतियातन ओपीडी कक्ष में पॉलीथिन की शीट लगा दी गई है।ऐसे बचें वायरल बीमारियों से
- सब्जी-फल को धोकर प्रयोग करें, बासी खाने और पहले से कटे फल न खाएं।- - तली-भुनी चीजों और बाहर के खाने से परहेज करें, उबला हुआ या साफ पानी ही पिएं।
- - बारिश में भीगने से बचें। भीगने के बाद बालों को सुखाएं, अस्थमा के रोगी कतई न भीगें।
- - गीले कपड़ों को शरीर पर ज्यादा देर तक न रहने दें, बच्चे और बुजुर्ग खास ख्याल रखें।
- - हल्दी, इलायची, सौंफ, दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- - घर में और छत पर बारिश का पानी जमा न होने दें। शाम को खिड़की-दरवाजा बंद रखें।
- - बच्चों के स्कूल से आने के बाद उनके हाथ साबुन से धोएं, स्वच्छता पर ध्यान दें।
बारिश के बाद वायरल बीमारियां बढ़ने की आशंका रहती है। आजकल ज्यादातर वायरल से ग्रसित मरीज ही ओपीडी में पहुंच रहे हैं। - डॉ. सुबोध शर्मा, एडीएसआईसी/सीएमएस जिला अस्पताल