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Bareilly News: कृत्रिम गर्भाधान तकनीक जानेंगे पशुचिकित्साधिकारी

Wed, 05 Feb 2025 02:26 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2025 02:26 AM IST
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Veterinary officer will learn artificial insemination technique
- वैज्ञानिकों ने कहा- एनेस्ट्रस और रिपीड ब्रीडर्स पशुओं में बांझपन की वजह
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर में मंगलवार से दुधारू पशुओं में बांझपन की समस्या का निदान और कृत्रिम गर्भाधान संबंधी प्रशिक्षण शुरू हुआ। वैज्ञानिकों ने बताया कि एनेस्ट्रस और रिपीड ब्रीडर्स पशुओं में बांझपन के कारक हैं।
ओडिशा सरकार द्वारा प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल 25 पशुचिकित्साधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं। मुख्य अतिथि संयुक्त निदेशक शोध डॉ. संजय कुमार ने बताया कि दुधारू पशुओं में प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन के उत्पादन की कमी को एनेस्ट्रस कहते हैं। वहीं, गर्भधारण में बार-बार असफल होने की स्थिति को रिपीड ब्रीडर्स कहा जाता है। उचित इलाज से इस कमी को दूर किया जा सकता है। कृत्रिम गर्भाधान पुरानी व प्रासंगिक तकनीक है। इससे जर्मप्लाज्म में सुधार होने से प्रजनन में वृद्धि तय है।
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एमिरेट प्रोफेसर हरिंद्र कुमार ने कहा कि दुधारू पशुओं में प्रजनन बेहद जरूरी है। इसी से जर्मप्लाज्म यानी आनुवंशिक स्तर में सुधार किया जा सकता है।कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक डॉ. ब्रजेश कुमार ने किया।
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विभागाध्यक्ष डॉ. मिराज हैदर खान ने बताया कि देश के लिहाज से दुग्ध उत्पादन में ओडिशा का योगदान महज एक फीसदी है। इसकी वजह पशुओं का स्वास्थ्य, पोषण, रखरखाव, जीनोटाइप व अन्य हो सकते हैं। कृत्रिम गर्भाधान के द्वारा नस्ल सुधार के जरिये दुग्ध उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं। यहां समन्वयक डॉ. नीरज श्रीवास्तव, डॉ. एसके घोष मौजूद रहे। अमर उजाला ब्यूरो
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