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आज से होगा उर्स-ए-शाह शराफत का आगाज
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:46 AM IST
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Urs-e-Shah decency will today open
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
उर्स-ए-शाह शराफत का आगाज गुरुवार से होगा पर दरगाह पर नूरानी मंजर बुधवार से दिखने लगा। देश-विदेश के जायरीन दरगाह पर अपनी हाजरी देने पहुंचने लगे हैं। बुधवार को बड़ी संख्या में जायरीन ने दरगाह पर हाजिरी दी और चादरपोशी व गुलपोशी कर दुआएं मांगी। जायरीन के लिए दरगाह पर लंगर का इंतजाम किया गया।
दोपहर को फतेहगंज से चांद सकलैनी की कयादत में चादरों का जुलूस दरगाह पहुंचा। इसमें बड़ी संख्या में अकीकदमंदों ने हिस्सा लिया। दरगाह पर आकर अपने पीरो मुर्शिद हजरत शाह सकलैन मियां हुजूर को सलाम पेश किया। इसके अलावा दरगाह पर आने वाले जायरीन का सिलसिला सुबह से ही बना रहा। शहर में जगह जगह फातिहाख्वानी हुई। गुरुवार को उर्स का पहला दिन बाद नमाजे फजर कुरआन ख्वानी और फातिहाख्वानी से शुरू होगा। इसके बाद चादरे पेश होने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। बाद नमाजे ईश आल इंडिया तरहई मुशायरा दरगाह के मेहमानखाने में होगा। इसमें देश भर के नामचीन शायर हिस्सा लेंगे।
वहीं बुधवार को बाद नमाजे ईशा मोहल्ला कांकर टोला भत्यारो वाली मस्जिद के पास एक शानदार तकरीरी प्रोग्राम हुआ। जश्ने शराफत मियां मनाया गया। महफिल का आगाज हाफिज कारी मुनव्वर सकलैनी ने कुरआन शरीफ की तिलावत से किया। प्रोग्राम की सरपरस्ती पीरो मुर्शिद शाह मुहम्मद सकलैन मियां हुजूर ने फरमाई। अलिम कन्नौज से आए जिया उल हकमुजद्दिदि ने अपने खिताब करते हुए कहा कि हिंदुस्तान में आज जो इस्लाम का परचम बुलंद है और खानकाहों से करोड़ों मुस्लमान वाबस्ता हैं ये सब औलिया ए किराम की मेहनतों और उनके तबलीग कारनामों का नतीजा है। हमारे दिलों में जो ईमान की शमा रौशन है ये सब बुजुर्गों का फैजान है। डॉक्टर प्रोफेसर हजरत मेहमुदुल हसन ने कहा कि हजरत शाह मौलाना शराफत अली मियां एक अबकरी शख्सियत का नाम है। आपका शुमार हिंदुस्तान के मायनाज जलीलुल कद्र आलिया किराम में होता है। इसके बाद नात मनकबत का सिलसिला शुरू हुआ। प्रोग्राम के आखिर में नबी की शान में सलात ओ सलाम पेश किया गया और हजरत शाह सकलैन मियां हुज़ूर ने दुआएं की। प्रोग्राम का आयोजन हाजी इंतिजार सकलैनी, लियाकत सकलैनी, पिंटू सकलैनी, कामरान सकलैनी, नूर मोहम्मद सकलैनी, लवी सकलैनी आदि ने किया।
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दोपहर को फतेहगंज से चांद सकलैनी की कयादत में चादरों का जुलूस दरगाह पहुंचा। इसमें बड़ी संख्या में अकीकदमंदों ने हिस्सा लिया। दरगाह पर आकर अपने पीरो मुर्शिद हजरत शाह सकलैन मियां हुजूर को सलाम पेश किया। इसके अलावा दरगाह पर आने वाले जायरीन का सिलसिला सुबह से ही बना रहा। शहर में जगह जगह फातिहाख्वानी हुई। गुरुवार को उर्स का पहला दिन बाद नमाजे फजर कुरआन ख्वानी और फातिहाख्वानी से शुरू होगा। इसके बाद चादरे पेश होने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। बाद नमाजे ईश आल इंडिया तरहई मुशायरा दरगाह के मेहमानखाने में होगा। इसमें देश भर के नामचीन शायर हिस्सा लेंगे।
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वहीं बुधवार को बाद नमाजे ईशा मोहल्ला कांकर टोला भत्यारो वाली मस्जिद के पास एक शानदार तकरीरी प्रोग्राम हुआ। जश्ने शराफत मियां मनाया गया। महफिल का आगाज हाफिज कारी मुनव्वर सकलैनी ने कुरआन शरीफ की तिलावत से किया। प्रोग्राम की सरपरस्ती पीरो मुर्शिद शाह मुहम्मद सकलैन मियां हुजूर ने फरमाई। अलिम कन्नौज से आए जिया उल हकमुजद्दिदि ने अपने खिताब करते हुए कहा कि हिंदुस्तान में आज जो इस्लाम का परचम बुलंद है और खानकाहों से करोड़ों मुस्लमान वाबस्ता हैं ये सब औलिया ए किराम की मेहनतों और उनके तबलीग कारनामों का नतीजा है। हमारे दिलों में जो ईमान की शमा रौशन है ये सब बुजुर्गों का फैजान है। डॉक्टर प्रोफेसर हजरत मेहमुदुल हसन ने कहा कि हजरत शाह मौलाना शराफत अली मियां एक अबकरी शख्सियत का नाम है। आपका शुमार हिंदुस्तान के मायनाज जलीलुल कद्र आलिया किराम में होता है। इसके बाद नात मनकबत का सिलसिला शुरू हुआ। प्रोग्राम के आखिर में नबी की शान में सलात ओ सलाम पेश किया गया और हजरत शाह सकलैन मियां हुज़ूर ने दुआएं की। प्रोग्राम का आयोजन हाजी इंतिजार सकलैनी, लियाकत सकलैनी, पिंटू सकलैनी, कामरान सकलैनी, नूर मोहम्मद सकलैनी, लवी सकलैनी आदि ने किया।
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