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Bareilly News: 171 करोड़ का अर्बन हाट, ना-ना... हाथी दांत

Sun, 13 Oct 2024 04:25 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2024 04:25 AM IST
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Urban Haat worth Rs 171 crore, na-na... ivory
बरेली। रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) की कठिन शर्तों की वजह से स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बने अर्बन हाट का संचालन नहीं हो पा रहा है। दो बार इसके टेंडर निरस्त हो चुके हैं। देश-विदेश की कई कंपनियों ने इसके संचालन में रुचि तो दिखाई, लेकिन कठिन शर्तों की वजह से पीछे हट गईं। अब तीसरी बार टेंडर निकाला जाएगा। इस बार अधिकारी आरएफपी के नियमों और शर्तों में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं। इस कवायद में 170.91 करोड़ रुपये की लागत की यह परियोजना हाथी दांत साबित हो रही है।
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अर्बन हाट का निर्माण सात सितंबर 2021 को शुरू हुआ था। 4.5 हेक्टेयर जमीन पर बने इस प्रोजेक्ट में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, फूड कोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट, कॉन्फ्रेंस हॉल, ऑडिटोरियम, दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट समेत डेढ़ हजार से अधिक वाहनों की क्षमता वाली भूमिगत पार्किंग भी है। इसका निर्माण पूरा हुए छह माह से अधिक बीत चुके हैं। इसके बाद भी इसका टेंडर नहीं हो पा रहा है।
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ये शर्तें बन रहीं बाधा
- टेंडर लेने वाली फर्म को पांच करोड़ रुपये प्रति वर्ष स्मार्ट सिटी को देने होंगे।

- टेंडर लेने वाली कंपनी को प्रतिवर्ष दो से ढाई करोड़ रुपये रखरखाव पर खर्च करने होंगे।
- परिसर में बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए फर्म को अपनी ओर से ऑपरेटर रखने होंगे।

- ब्लॉक एक व दो पर फर्म का पूर्ण रूप से अधिकार नहीं होगा। इसको नॉन कॉमर्शियल रखा गया है।
खुला एरिया भी बन रहा है टेंडर न हो पाने की वजह
बीते दिनों मॉल का संचालन करने वाली कई कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अर्बन हाट का निरीक्षण किया था। इस दौरान सामने आया कि इसका काफी एरिया खुला हुआ है। जबकि, मॉल में गेट से ही लोगों को वातानुकूलित वातावरण मिलता है। सूत्रों की मानें तो यही वजह रही जो मॉल संचालकों ने इसके संचालन में रुचि नहीं दिखाई। उनका यह भी तर्क है कि अगर फर्म इसे ठेके पर ले भी लेती है तो इस प्रोजेक्ट के संचालन के लिए एक से डेढ़ साल का समय लग जाएगा।
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विशेषज्ञ की राय
सेवानिवृत अधिशासी अभियंता राजेंद्र आर्य ने कहा कि इसके संचालन के लिए दो चीजें महत्वपूर्ण हैं। एक मालिकाना हक और दूसरी किफायती दर। सरकार इसका मालिकाना हक अपने पास रखे, लेकिन इसके संचालन के लिए किफायती दर निर्धारित करे। आरएफपी की शर्तों में संशोधन करने के साथ ही सालाना खर्च फर्म से लेकर रखरखाव का काम भी अपने पास रखे। इससे टेंडर प्रक्रिया में काफी आसानी होगी।

कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स की टेंडर प्रक्रिया भी अधूरी
जंक्शन रोड पर चार करोड़ रुपये की लागत से बने कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स की टेंडर प्रक्रिया भी अधूरी पड़ी है। इसमें भी व्यापारी ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। छह माह से स्मार्ट सिटी के अफसर इसके लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही है। निगम की ओर से कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स और स्काई वॉक के लिए टेंडर मांगे गए थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। संवाद
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