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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं मिली विश्वविद्यालय के पांचाल संग्रहालय को पहचान

Thu, 07 Jan 2021 12:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jan 2021 12:19 AM IST
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University's Panchal Museum not recognized internationally
MJP Rohilkhand university
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बने संग्रहालय में हजारों साल पुरानी संरक्षित मूर्तियां, बर्तन, कंकाल होने के बावजूद अभी उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिल सकी है। जबकि वर्ष 2013-14 में इस संग्रहालय के कायाकल्प के लिए राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय को दो साल के लिए सेंट्रल ऑफ एक्सीलेंस नाम का प्रोजेक्ट दिया था। इसमें भरपूर बजट भी दिया गया था। अब इस म्यूजियम को पर्यटन के दृष्टिकोण से बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
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विश्वविद्यालय में प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग का पांचाल संग्रहालय नाम से म्यूजियम बना है। वर्ष 2004 से स्थापित इस म्यूजियम में करीब दो से तीन हजार साल पुरानी ऐतिहासिक मूर्तियां, पांडुलिपि, मिट्टी व धातु के बर्तन, कपड़े, शस्त्र, मुद्रा प्रयोगशाला आदि दुर्लभ सामग्री सुरक्षित रखी गई हैं। इसमें पीलीभीत के बीसलपुर में वर्ष 2004-05 में अभयपुर में खोदाई के दौरान मिले कंकाल और बर्तन भी देखने के लिए रखे गए हैं। इसके महत्व को समझते हुए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013-14 में इस म्यूजियम के विकास के लिए सेंट्रल ऑफ एक्सीलेंस के नाम से दो साल का प्रोजेक्ट दिया था। इसके लिए 25 लाख रुपये का बजट भी जारी हुआ था। लाखों की रकम खर्च होने के बावजूद इस म्यूजियम में अभी कई महत्वपूर्ण काम होने बाकी है। इससे यहां बाहर से आने वाले लोगों की संख्या कम है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन यह तैयारी कर रहा है कि इस संग्रहालय में संजोई गई सभी ऐतिहासिक महत्वपूर्ण सामग्री की फोटोग्राफी कराकर उसकी फिल्म बने। इसमें संग्रहालय में रखी सभी सामग्री का एक-एक ब्योरा और जानकारी मौजूद रहे। बाद में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाए।
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नहीं हैं पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे, फायर अलार्म भी नहीं
इस म्यूजियम में भारतीय पुरातत्व विभाग और दान दाताओं से तमाम सामग्री मिली हैं मगर इसको पूरी तरह से सुरक्षित नहीं रखा जा सका है। इस म्यूजियम में गेट सहित कुछ जगहों पर ही सीसीटीवी कैमरे लगे है, अंदर नहीं हैं। आग लगने पर सतर्कता अलार्म भी नहीं है। इसके अलावा तमाम अन्य संसाधन भी अब तक उपलब्ध नहीं हो सके हैं।
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‘इस पांचाल संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जल्द ही कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए कई बड़ी तैयारियां की जा रही हैं।’
- प्रो. श्याम बिहारी लाल, संकायाध्यक्ष, प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग
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