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Bareilly News: दो करोड़ हुए कूड़ा, पोर्टा केबिन हो रहे कबाड़
Sun, 01 Feb 2026 02:03 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 01 Feb 2026 02:03 AM IST
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बरेली। शहर को स्वच्छ रखने के लिए दो करोड़ की लागत से खरीदे गए 40 पोर्टा केबिन कबाड़ हो रहे हैं। इनको रोड किनारे जगह-जगह छोड़ दिया गया है। टेंडर न होने के चलते दो साल से इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। कई केबिन तो नीचे से जंग लगने से गलने लगे हैं।
वर्ष 2024 में पोर्टा केबिन की खरीद की गई थी। हर दो वार्ड के बीच में उन्हें रखा जाना था, ताकि शहरवासी इसमें सूखा कूड़ा डाल सकें और सड़कों पर गंदगी न फैले। खरीदारी के बाद पोर्टा केबिन कोवार्ड में भेजने के बजाय सड़क किनारे छोड़ दिया गया है। सपा पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि जनता के हित के लिए केबिन की खरीदारी की गई, लेकिन उपयोग नहीं होने से ये रखे-रखे ही खराब हो रहे हैं और करोड़ों की रकम बर्बाद हो रही है।
सपा पार्षद ने कहा कि पिछले दिनों निगम की बोर्ड बैठक में भी ये मुद्दा उठाया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि पोर्टा केबिन के संचालन के लिए अब तक किसी एजेंसी का चयन ही नहीं हुआ है। शहर के पीलीभीत रोड, राजेंद्रनगर, सेटेलाइट समेत अन्य जगहों पर ये शोपीस बनकर रह गए हैं।
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वार्ड में पहुंचते केबिन तो नागरिकों को मिलती सुविधा
11 लाख की आबादी वाले शहर के जिन इलाकों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं, वहां ये केबिन उपयोगी साबित होंगे। रोड किनारे व गालियों में डाला जाने वाला कूड़ा सड़कों पर फैल जाता है। इससे बदबू फैलती है और बीमारियां होती हैं। टेंडर प्रकिया पूरी न हो पाने के कारण ये बदहाल पड़े हैं। एक्सईएन राजीव राठी ने बताया कि टेंडर प्रकिया पूरी होते ही पोर्टा केबिन के संचालन की जिम्मेदारी चयनित एजेंसी को दी जाएगी।
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वर्ष 2024 में पोर्टा केबिन की खरीद की गई थी। हर दो वार्ड के बीच में उन्हें रखा जाना था, ताकि शहरवासी इसमें सूखा कूड़ा डाल सकें और सड़कों पर गंदगी न फैले। खरीदारी के बाद पोर्टा केबिन कोवार्ड में भेजने के बजाय सड़क किनारे छोड़ दिया गया है। सपा पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि जनता के हित के लिए केबिन की खरीदारी की गई, लेकिन उपयोग नहीं होने से ये रखे-रखे ही खराब हो रहे हैं और करोड़ों की रकम बर्बाद हो रही है।
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सपा पार्षद ने कहा कि पिछले दिनों निगम की बोर्ड बैठक में भी ये मुद्दा उठाया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया जा रहा है कि पोर्टा केबिन के संचालन के लिए अब तक किसी एजेंसी का चयन ही नहीं हुआ है। शहर के पीलीभीत रोड, राजेंद्रनगर, सेटेलाइट समेत अन्य जगहों पर ये शोपीस बनकर रह गए हैं।
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वार्ड में पहुंचते केबिन तो नागरिकों को मिलती सुविधा
11 लाख की आबादी वाले शहर के जिन इलाकों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं, वहां ये केबिन उपयोगी साबित होंगे। रोड किनारे व गालियों में डाला जाने वाला कूड़ा सड़कों पर फैल जाता है। इससे बदबू फैलती है और बीमारियां होती हैं। टेंडर प्रकिया पूरी न हो पाने के कारण ये बदहाल पड़े हैं। एक्सईएन राजीव राठी ने बताया कि टेंडर प्रकिया पूरी होते ही पोर्टा केबिन के संचालन की जिम्मेदारी चयनित एजेंसी को दी जाएगी।