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त्रिशूल एयरबेस: कभी मिग-25 की गर्जना से गूंजता था आसमान, अब सुखोई से बढ़ रही सामरिक ताकत

Thu, 08 Oct 2026 11:27 AM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Thu, 08 Oct 2026 11:27 AM IST
सार

देश की उत्तरी सीमा और सामरिक सुरक्षा में त्रिशूल एयरबेस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सीमा की चौकसी के साथ आपदा में भी मदद करता है। यहां मिग-25 और सुखोई-7 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तैनात रहे हैं।

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Trishul Airbase Skies once echoed with the roar of MiG-25s strategic strength is growing with Sukhois
सुखोई- 30 एमकेआई फाइटर जेट - फोटो : ANI

विस्तार

देश की उत्तरी सीमा और सामरिक सुरक्षा के लिहाज से बरेली का त्रिशूल एयरबेस लंबे समय से अहम भूमिका निभाता रहा है। वायुसेना दिवस पर जब देश भारतीय वायुसेना के शौर्य और सेवा याद कर रहा है, तब यह एयरबेस सीमा की चौकसी से लेकर आपदा में मदद तक की चर्चा में है।

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त्रिशूल एयरबेस की पहचान सिर्फ लड़ाकू विमानों के संचालन तक सीमित नहीं रही। यहां अत्याधुनिक लड़ाकू और टोही विमानों की तैनाती रही है। 1981 में 102 स्क्वाड्रन के गठन के साथ मिग-25 पहचान बना। यह विमान रणनीतिक टोही के लिए इस्तेमाल हुआ। 2006 तक बरेली प्रमुख बेस रहा। मिग-25 की गति और ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता ने भारतीय वायुसेना के सबसे गोपनीय विमानों में शामिल किया था। पूर्व में सुखोई 7 जैसे लड़ाकू विमानों का दौर भी त्रिशूल से जुड़ा रहा। सुखोई-7 ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई थी। 
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सर्जिकल स्ट्राइक में भी रही भूमिका 
बताते हैं कि 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग-25 विमानों का इस्तेमाल रणनीतिक टोही भूमिका में किया गया था। सेवानिवृत्त एयर मार्शल एके गोयल ने बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक में भी एयरबेस की भूमिका रही। बरेली की भौगोलिक स्थिति से एयरबेस अहम है। उत्तराखंड के रास्ते चीन सीमा तक पहुंचने वाले संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र की निकटता से यहां की गतिविधियां रणनीतिक दृष्टि से खास हैं। 

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दुर्गम क्षेत्रों में मदद पहुंचाते हैं जांबाज
त्रिशूल सिर्फ युद्धकालीन तैयारी तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदा, बाढ़, भूस्खलन या दुर्गम क्षेत्रों में राहत-बचाव के दौरान वायु सेना के हेलीकॉप्टर और विमान तेजी से राहत सामग्री, बचाव दल और संसाधन पहुंचाते रहे हैं। त्रिशूल एयरबेस परिसर में बने सिविल एन्क्लेव से बरेली की नियमित विमान सेवा भी संचालित है। इससे एक ही परिसर में देश की रक्षा और नागरिक हवाई संपर्क दोनों की महत्वपूर्ण कड़ियां जुड़ी हैं।

एयर चीफ मार्शल भी यहां तैनात रहे
सेवानिवृत्त एयर मार्शल एके गोयल ने बताया कि वर्तमान में वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी त्रिशूल एयरबेस में 31 दिसंबर 2011 से 29 दिसंबर 2013 तक स्टेशन कमांडर की कमान संभाली थी। वहीं, अगले वायुसेना के प्रमुख के तौर पर तैनात होने वाले एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी सेंट्रल एयर कमांड जिसके तहत त्रिशूल एयरबेस है यहां ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ रह चुके हैं।

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