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Bareilly: हार्निया पीड़ित पशुओं को तकलीफ से मिलेगी राहत, आईवीआरआई में बायोएक्टिव जाल से इलाज शुरू

Wed, 25 Jun 2025 04:29 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 25 Jun 2025 04:29 PM IST
सार

हार्निया पीड़ित पशुओं का अब जीवनभर तकलीफ नहीं झेलनी पड़ेगी। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने घुलनशील बायोएक्टिव जाल तैयार किया है। जिससे पीड़ित पशुओं का सफल इलाज हुआ है। 

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Treatment of hernia in animals begins with bioactive mesh in IVRI Bareilly
IVRI Bareilly - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मनुष्यों की तरह पशुओं को भी हार्निया की बीमारी होती है। इसके इलाज के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली के वैज्ञानिकों ने घुलनशील बायोएक्टिव जाल तैयार किया है। सफल परीक्षण के बाद रेफरल पॉली क्लीनिक में इससे हार्निया पीड़ित पशुओं का इलाज भी होने लगा है।

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आईवीआरआई सर्जरी डिवीजन की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रेखा पाठक के मुताबिक, पशुओं को हार्निया होने पर अब तक सिंथेटिक जाल का इस्तेमाल किया जाता था। यह पॉलीप्रोपेलीन यानी नायलॉन का होने से अघुलनशील था। इससे पशुओं को जीवनभर चुभन का सामना करना पड़ता था। पशुओं को इस तकलीफ से निजात दिलाने के लिए शोधार्थी भी शामिल हुए। दो माह पहले शोध पूरा हुआ। लैब और फील्ड में परीक्षण सफल होने पर अब पशुओं का इलाज शुरू किया गया है।
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डॉ. रेखा पाठक ने बताया कि बायोएक्टिव जाल बनाने के लिए कई पशुओं के ऊतकों का परीक्षण किया। भैंस के ऊतक ज्यादा मजबूत और टिकाऊ साबित हुए। इसके प्रयोग से हार्निया का प्रभावी इलाज होता है। साथ ही, घाव भरने की प्रक्रिया भी तेज होती है।

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बरेली मंडल समेत उत्तराखंड के पशुओं का हो रहा इलाज
डॉ. रेखा के मुताबिक, हाल ही में पीलीभीत जिले के बीसलपुर तहसील के गांव जल्लापुर निवासी राकेश गंगवार पड्डे और मुन्नी देवी के पालतू कुत्ते की हार्निया संबंधी सर्जरी की गई। परिणाम सकारात्मक रहे। अब तक रेफरल पॉली क्लीनिक में बरेली, मुरादाबाद मंडल समेत उत्तराखंड से आए हार्निया पीड़ित पशुओं का इलाज किया जा चुका है।

मनुष्यों में भी कारगर होने की संभावना
बायोएक्टिव जाल का प्रयोग मनुष्यों में भी कारगर साबित होने की संभावना वैज्ञानिकों ने जताई है। विभिन्न प्रजाति के पशुओं में सर्जरी सफल होने के बाद अब मनुष्यों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल संबंधी शोध कार्य शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इससे पूर्व तकनीक के पेटेंट की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पेटेंट मिलने पर तकनीक  को कॉमर्शियल किया जाएगा।

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