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Bareilly News: ट्रेनें ठसाठस...आरक्षित कोच भी अनारक्षित जैसा
Sat, 16 Dec 2023 01:51 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 16 Dec 2023 01:51 AM IST
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बरेली। रेलवे को पूरा किराया चुकाने के बाद भी यात्रियों का सफर सुगम नहीं हो रहा। ट्रेनों में उपलब्ध सीटों के मुकाबले 35 से 40 फीसदी तक ज्यादा टिकट बिक रहे हैं। जनरल टिकटों की तो बेहिसाब बिक्री हो रही है। स्थिति यह है कि बरेली से ही इन दिनों प्रत्येक ट्रेन में औसतन 300 यात्री जनरल टिकट पर यात्रा कर रहे हैं। ठसाठस भरकर चलने वालीं दिल्ली और पूर्वांचल की ट्रेनों में सीट न मिलने पर जनरल टिकट वाले यात्री आरक्षित कोचों में चढ़ते हैं और फिर मारामारी की स्थिति हो जाती है।
आरक्षित कोच की स्थिति भी अनारक्षित जैसी रहती है। इसके बाद भी रेलवे धड़ाधड़ वेटिंग टिकट जारी कर रहा है। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार की रात और शुक्रवार को दिन में बरेली जंक्शन का जायजा लिया तो ट्रेनों में आवाजाही की जबरदस्त मारामारी दिखी। यात्री आपाधापी के बीच किसी भी कोच में चढ़ जा रहे थे। भीड़ का दबाव इसलिए भी है, क्योंकि कोहरे के सीजन में रेलवे ने 56 जोड़ी ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इन दिनों बरेली होकर रोजाना 20 से 25 जोड़ी ट्रेनें ही गुजर रही हैं। इनमें भी 11 जोड़ी ट्रेनों को रूट बदल कर चलाया जा रहा है। यह ट्रेनें लखनऊ नहीं जा रहीं।
जनरल श्रेणी के टिकट बरेली जंक्शन पर 10 से 12 हजार संख्या में रोजाना बिक रहे हैं। यात्रियों की ये भीड़ इस समय करीब 20 जोड़ी ट्रेनों पर निर्भर है। यानी करीब 300 यात्री एक ट्रेन से बिना आरक्षण यात्रा कर रहे है। लखनऊ जाने और उधर से आने वाली ट्रेनों की स्थिति ज्यादा खराब हो रही है।
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जनरल टिकटों की बिक्री पर तो कोई रोक नहीं, लेकिन ट्रेनों में लगने वाले जनरल कोचों की संख्या घटती जा रही है। बरेली से होकर गुजरने वाली अधिकांश ट्रेनों में 18 से 22 कोच लगते हैं। इन ट्रेनों में अब चार के स्थान पर दो ही जनरल कोच लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा सात स्लीपर और अन्य एसी कोच होते हैं। 22 कोच की ट्रेन में औसतन 1600 सीटें होती हैं, लेकिन करीब 2500 तक यात्री सफर कर रहे हैं। क्योंकि एक जनरल कोच की क्षमता 250 यात्रियों की होती है, लेकिन तीन-चार बड़े स्टेशनों से ही करीब 300 यात्री प्रति के हिसाब से 900 से 1200 के बीच जनरल यात्री उतरते-चढ़ते हैं और जगह न मिलने पर ये भीड़ आरक्षित कोचों की व्यवस्था गड़बड़ा देती है।
ये है हाल
एसी कोचों में चढ़ गए यात्री
दिल्ली से लखनऊ होते हुए वाराणसी तक चलने वाली 15128 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस में शुक्रवार शाम को सीटों को लेकर यात्रियों के बीच मारामारी रही। मुरादाबाद, रामपुर होते हुए ठसाठस भरी ये ट्रेन बरेली आई तो कोच में चढ़ने के लिए यात्रियों को जद्दोजहद करनी पड़ी। जनरल टिकट वाले कई यात्री एसी कोचों में ही चढ़ गए। लखनऊ जा रहे उमेश ने कहा कि इमरजेंसी में जाना है, इसलिए किसी भी डिब्बे में सफर कर लेंगे।
जहां जगह मिली, वहां चढ़ गए यात्री
आनंद विहार से लखनऊ होते हुए गाजीपुर तक जाने वाली 22420 सुहेलदेव एक्सप्रेस में बृहस्पतिवार रात को भीड़ के कारण कोचों का बुरा हाल दिखा। दिल्ली की ओर जाने वाली 12392 श्रमजीवी एक्सप्रेस में भी जबरदस्त भीड़ थी। ऐसे में यात्रियों के बीच कोच में चढ़ने को लेकर मारामारी रही। ट्रेन छूट न जाए, इसलिए जिसको जहां जगह मिली, वहां चढ़ गया। अपने साथी रमेश के साथ जा रहे स्वयंप्रकाश ने कहा कि आरक्षण मिल ही नहीं रहा है, ऐसे में सफर तो करना ही है। टीटी से बात करेंगे और टिकट मिलेगा तो ठीक, अन्यथा कहीं एडजस्ट होकर चले जाएंगे।
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वर्जन-
ट्रेनों की संख्या इन दिनों कम है। बरेली जंक्शन पर रोजाना औसतन 30-32 हजार यात्रियों का आवागमन हो रहा है। इसलिए मारामारी की स्थिति रहती है। ट्रेन में अनारक्षित या आरक्षित कोचों की संख्या रेलवे बोर्ड तय करता है।
- राकेश कुमार सिंह, मुख्य वाणिज्य निरीक्षक
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आरक्षित कोच की स्थिति भी अनारक्षित जैसी रहती है। इसके बाद भी रेलवे धड़ाधड़ वेटिंग टिकट जारी कर रहा है। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार की रात और शुक्रवार को दिन में बरेली जंक्शन का जायजा लिया तो ट्रेनों में आवाजाही की जबरदस्त मारामारी दिखी। यात्री आपाधापी के बीच किसी भी कोच में चढ़ जा रहे थे। भीड़ का दबाव इसलिए भी है, क्योंकि कोहरे के सीजन में रेलवे ने 56 जोड़ी ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इन दिनों बरेली होकर रोजाना 20 से 25 जोड़ी ट्रेनें ही गुजर रही हैं। इनमें भी 11 जोड़ी ट्रेनों को रूट बदल कर चलाया जा रहा है। यह ट्रेनें लखनऊ नहीं जा रहीं।
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जनरल श्रेणी के टिकट बरेली जंक्शन पर 10 से 12 हजार संख्या में रोजाना बिक रहे हैं। यात्रियों की ये भीड़ इस समय करीब 20 जोड़ी ट्रेनों पर निर्भर है। यानी करीब 300 यात्री एक ट्रेन से बिना आरक्षण यात्रा कर रहे है। लखनऊ जाने और उधर से आने वाली ट्रेनों की स्थिति ज्यादा खराब हो रही है।
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जनरल टिकटों की बिक्री पर तो कोई रोक नहीं, लेकिन ट्रेनों में लगने वाले जनरल कोचों की संख्या घटती जा रही है। बरेली से होकर गुजरने वाली अधिकांश ट्रेनों में 18 से 22 कोच लगते हैं। इन ट्रेनों में अब चार के स्थान पर दो ही जनरल कोच लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा सात स्लीपर और अन्य एसी कोच होते हैं। 22 कोच की ट्रेन में औसतन 1600 सीटें होती हैं, लेकिन करीब 2500 तक यात्री सफर कर रहे हैं। क्योंकि एक जनरल कोच की क्षमता 250 यात्रियों की होती है, लेकिन तीन-चार बड़े स्टेशनों से ही करीब 300 यात्री प्रति के हिसाब से 900 से 1200 के बीच जनरल यात्री उतरते-चढ़ते हैं और जगह न मिलने पर ये भीड़ आरक्षित कोचों की व्यवस्था गड़बड़ा देती है।
ये है हाल
एसी कोचों में चढ़ गए यात्री
दिल्ली से लखनऊ होते हुए वाराणसी तक चलने वाली 15128 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस में शुक्रवार शाम को सीटों को लेकर यात्रियों के बीच मारामारी रही। मुरादाबाद, रामपुर होते हुए ठसाठस भरी ये ट्रेन बरेली आई तो कोच में चढ़ने के लिए यात्रियों को जद्दोजहद करनी पड़ी। जनरल टिकट वाले कई यात्री एसी कोचों में ही चढ़ गए। लखनऊ जा रहे उमेश ने कहा कि इमरजेंसी में जाना है, इसलिए किसी भी डिब्बे में सफर कर लेंगे।
जहां जगह मिली, वहां चढ़ गए यात्री
आनंद विहार से लखनऊ होते हुए गाजीपुर तक जाने वाली 22420 सुहेलदेव एक्सप्रेस में बृहस्पतिवार रात को भीड़ के कारण कोचों का बुरा हाल दिखा। दिल्ली की ओर जाने वाली 12392 श्रमजीवी एक्सप्रेस में भी जबरदस्त भीड़ थी। ऐसे में यात्रियों के बीच कोच में चढ़ने को लेकर मारामारी रही। ट्रेन छूट न जाए, इसलिए जिसको जहां जगह मिली, वहां चढ़ गया। अपने साथी रमेश के साथ जा रहे स्वयंप्रकाश ने कहा कि आरक्षण मिल ही नहीं रहा है, ऐसे में सफर तो करना ही है। टीटी से बात करेंगे और टिकट मिलेगा तो ठीक, अन्यथा कहीं एडजस्ट होकर चले जाएंगे।
वर्जन-
ट्रेनों की संख्या इन दिनों कम है। बरेली जंक्शन पर रोजाना औसतन 30-32 हजार यात्रियों का आवागमन हो रहा है। इसलिए मारामारी की स्थिति रहती है। ट्रेन में अनारक्षित या आरक्षित कोचों की संख्या रेलवे बोर्ड तय करता है।
- राकेश कुमार सिंह, मुख्य वाणिज्य निरीक्षक