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आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कानून बनाए केंद्र

Sun, 10 Jul 2016 01:56 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Sun, 10 Jul 2016 01:56 AM IST
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Toughen laws against terrorism center
राजराजेश्रवराश्रम जी महाराज
जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाईक प्रकरण पर प्रतिक्रिया में कहा कि ऐसे कई मामलों से साफ हो गया है कि इस्लामिक आतंकवाद गहरे तक अपनी जड़ें जमा चुका है। भारत ही नहीं आज अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों के सामने भी इस्लामिक आतंकवाद विकराल समस्या बनकर खड़ा हुआ है। आतंकवादी नित नए रूप में घटनाओं को अंजाम देकर मानवता को नुकसान पहुंचा रहे हैं इसलिए अब जरूरी हो गया है कि इनसे बेहद सख्ती से निपटा जाए। इसके लिए केंद्र सरकार को तत्काल लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर आतंकवाद को कुचलने के लिए कड़ा और शक्तिशाली कानून बनाना चाहिए। यही वक्त की जरूरत है।
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शहर के सुभाषनगर में एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे शंकराचार्य ने शनिवार को अमर उजाला से बातचीत में कहा कि धर्म ग्रंथ भी यह संदेश देते हैं कि दुष्टों से दुष्टता से ही निपटना चाहिए लेकिन हमारे देश में आतंकवादियों को हृदय परिवर्तन का मौका देने की नीति अपनाने से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। यह उदारता अब बहुत हो चुकी इसीलिए देश में आतंकवाद पर रोक नहीं लग पा रही है और लचर कानून का लाभ उठाकर ही इस्लामिक आतंकवाद के संचालक यहां के युवाओं को धर्म के नाम पर बरगलाकर मानवता विरोधी घटनाओं को लगातार अंजाम दिला रहे हैं। राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि अफसोस यह है कि भारतीय राजनेता वोट लिप्सा में तुष्टिकरण के लिए देश के अस्तित्व को खतरे में डाले हुए हैं इसीलिए जाकिर नाईक जैसे इस्लामिक उपदेशकों को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का मौका मिल पा रहा है और वह देश और हिंदू धर्म के प्रति जहर उगल रहे हैं। ऐसे तत्वों पर आक्रामकता से प्रहार करने की जरूरत है तभी ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लग सकेगा। शंकराचार्य ने कहा कि पश्चिमी यूपी तो पूरी तरह से इस्लामिक आतंकवाद की चपेट में आ चुका है। कैराना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, दूसरे शहरों में भी ऐसा ही हो रहा है। बोले- 1980 में जनता पार्टी ने बांग्लादेश और पाकिस्तान से पासपोर्ट संबंधी नियमों में शिथिलता देकर घुसपैठ को बढ़ावा दे दिया था। उसके बाद से दिल्ली के नजदीक होने के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश भी इस्लामिक आतंकवाद की चपेट मेें आ गया। यदि इसको गंभीरता से नहीं लिया तो देश में एक और बंटवारे की नौबत आ सकती है।
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