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आज मकर राशि में प्रवेश कर दक्षिणायन से उत्तरायण होंगे सूर्य
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पतंगबाजी
- फोटो : पिक्साबे
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बरेली। सूर्य के उत्तरायण होने को देवताओं का दिन कहा जाता है। देवताओं के दिन के काल में की गई पूजा का विशेष प्रभाव होता है। देवताओं का एक दिन छह महीने का होता है। मकर संक्रांति को देवताओं के दिन का प्रारंभ होता है, इसलिए विशेष तौर पर सूर्य की उपासना की जाती है। गुरुवार को मकर संक्रांति दिन भर रहेगी।
मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। इसके साथ ही सूर्य और शनि ग्रह एक ही राशि में आएंगे। सूर्य और छाया के पुत्र हैं शनि। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना ही संक्रांति कहलाता है। मकर संक्रांति से सूर्य रोजाना एक अंश उत्तर की ओर बढ़ते हैं। इससे दिन की अवधि में वृद्धि होने लगती है। पंडित राजेंद्र पांडेय कहते हैं कि सूर्य की आराधना से मनुष्य के रोग घटते हैं और रोग से लड़ने की शक्ति में वृद्धि होती है। यदि सूर्य की उपासना गंगा में खड़े होकर की जाए तो उसका हजार गुना फल मिलता है। इसीलिए मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। सूर्य की आराधना के बाद दान-पुण्य किया जाता है। चूंकि सूर्य शनि की राशि में आते हैं इसलिए शनि से संबंधित उड़द की दाल की खिचड़ी का दान करना श्रेष्ठ माना गया है। जो व्यक्ति सूर्योदय काल में सूर्य को जल अर्पित करता है और जल की गिरती हुई धार से सूर्य का दर्शन करता है, उसकी नेत्र ज्योति कभी क्षीण नहीं होती है। सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर तिल से बनी हुई चीजों का दान करने का विशेष विशेष महत्व है।
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मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। इसके साथ ही सूर्य और शनि ग्रह एक ही राशि में आएंगे। सूर्य और छाया के पुत्र हैं शनि। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाना ही संक्रांति कहलाता है। मकर संक्रांति से सूर्य रोजाना एक अंश उत्तर की ओर बढ़ते हैं। इससे दिन की अवधि में वृद्धि होने लगती है। पंडित राजेंद्र पांडेय कहते हैं कि सूर्य की आराधना से मनुष्य के रोग घटते हैं और रोग से लड़ने की शक्ति में वृद्धि होती है। यदि सूर्य की उपासना गंगा में खड़े होकर की जाए तो उसका हजार गुना फल मिलता है। इसीलिए मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। सूर्य की आराधना के बाद दान-पुण्य किया जाता है। चूंकि सूर्य शनि की राशि में आते हैं इसलिए शनि से संबंधित उड़द की दाल की खिचड़ी का दान करना श्रेष्ठ माना गया है। जो व्यक्ति सूर्योदय काल में सूर्य को जल अर्पित करता है और जल की गिरती हुई धार से सूर्य का दर्शन करता है, उसकी नेत्र ज्योति कभी क्षीण नहीं होती है। सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर तिल से बनी हुई चीजों का दान करने का विशेष विशेष महत्व है।
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नहीं बढ़े गजक और तिल के लड्डू के रेट
मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर गजक की दुकानों पर खासी भीड़ रही। लोगों ने जमकर गजक, तिलसकरी, मूंगफली, तिलबुग्गा आदि की खरादारी की। कुतुबखाना के निखिल ने बताया कि लोहड़ी और मकर संक्रांति पर गजक और रेवड़ी की साल भर से अधिक बिक्री होती है। देर रात तक धर्मकांटा, राजेंद्रनगर, कुतुबखाना, सिविल लाइंस आदि क्षेत्रोें में गजक की दुकानें खुली रहीं।
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