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Bareilly News: मूल तैनाती पर जाएंगे तीन डॉक्टर, फिर होगा ओपीडी में संकट
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बरेली। करीब तीन माह पहले महिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से ओपीडी का संचालन प्रभावित हो रहा था। एक बार फिर वैसे ही हालात बनने की संभावना है। मंगलवार को स्वास्थ्य केंद्रों से इंटर्नशिप करने आए तीन डॉक्टर मूल तैनाती स्थल पर भेजे जाने हैं। लिहाजा, ओपीडी, ओटी आदि की सेवाएं अब सात डॉक्टरों के ही भरोसे है। मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए सीएमएस ने सीएमओ पत्र भेजा है।
जनवरी में जिला महिला अस्पताल को उच्च स्तरीय सुविधा मुहैया कराने के लिए शासन की ओर से एनक्यूएएस यानि नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड प्रमाणपत्र मिला है, लेकिन डॉक्टरों की कमी से प्रभावित हो रही सेवाएं इस साल होने वाले एनक्यूएएस में प्रमाणपत्र मिलने की संभावना पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। करीब तीन माह पहले डॉक्टरों के स्थानांतरण के बाद अस्पताल में महज छह डॉक्टर ही बचे थे। जो कई जिम्मेदारियां संभालने की वजह से ओपीडी में नहीं बैठे और काउंसलर के भरोसे ओपीडी में गर्भवतियां रहीं। इसी दौरान तीन प्रशिक्षु डॉक्टर की तैनाती से राहत मिली थी। अब इन तीनों की इंटर्नशिप पूरी हो गई है और मूल तैनाती पर भेजने की तैयारी है। डॉक्टरों की कमी से फिर पहले जैसे हालात न बने इसके लिए प्रभारी सीएमएस डॉ. पुष्पलता ने सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह को पत्र भेजकर स्वास्थ्य केंद्रों से महिला चिकित्सक तैनाती की मांग की है।
छह डॉक्टरों के भरोसे चार सौ महिलाओं का इलाज
महिला अस्पताल में डॉक्टरों के 16 पद स्वीकृत हैं। इसमें पांच स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और निश्चेतक शामिल हैं। अस्पताल में प्रतिदिन तीन सौ की ओपीडी होती है। 15-20 प्रसव होते हैं। ऐसे में महज छह डॉक्टरों के भरोसे बेहतर सेवाएं मुहैया कराने को लेकर अस्पताल प्रशासन भी चिंतित है। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह का कहना है कि इलाज के लिए पहुंचने वाली गर्भवती और अन्य महिलाओं के इलाज में कोई दिक्कत न हो इसकी जल्द व्यवस्था की जाएगी।
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जनवरी में जिला महिला अस्पताल को उच्च स्तरीय सुविधा मुहैया कराने के लिए शासन की ओर से एनक्यूएएस यानि नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड प्रमाणपत्र मिला है, लेकिन डॉक्टरों की कमी से प्रभावित हो रही सेवाएं इस साल होने वाले एनक्यूएएस में प्रमाणपत्र मिलने की संभावना पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। करीब तीन माह पहले डॉक्टरों के स्थानांतरण के बाद अस्पताल में महज छह डॉक्टर ही बचे थे। जो कई जिम्मेदारियां संभालने की वजह से ओपीडी में नहीं बैठे और काउंसलर के भरोसे ओपीडी में गर्भवतियां रहीं। इसी दौरान तीन प्रशिक्षु डॉक्टर की तैनाती से राहत मिली थी। अब इन तीनों की इंटर्नशिप पूरी हो गई है और मूल तैनाती पर भेजने की तैयारी है। डॉक्टरों की कमी से फिर पहले जैसे हालात न बने इसके लिए प्रभारी सीएमएस डॉ. पुष्पलता ने सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह को पत्र भेजकर स्वास्थ्य केंद्रों से महिला चिकित्सक तैनाती की मांग की है।
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छह डॉक्टरों के भरोसे चार सौ महिलाओं का इलाज
महिला अस्पताल में डॉक्टरों के 16 पद स्वीकृत हैं। इसमें पांच स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और निश्चेतक शामिल हैं। अस्पताल में प्रतिदिन तीन सौ की ओपीडी होती है। 15-20 प्रसव होते हैं। ऐसे में महज छह डॉक्टरों के भरोसे बेहतर सेवाएं मुहैया कराने को लेकर अस्पताल प्रशासन भी चिंतित है। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह का कहना है कि इलाज के लिए पहुंचने वाली गर्भवती और अन्य महिलाओं के इलाज में कोई दिक्कत न हो इसकी जल्द व्यवस्था की जाएगी।
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