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Bareilly News: एआई से कम हो रही सोचने-समझने की क्षमता
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बरेली। एआई बच्चों के सोचने और समझने की क्षमता को कम कर रहा है। इस पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है। यह बातें बृहस्पतिवार को बरेली कॉलेज के पर्यावरण विज्ञान विभाग की ओर से ''''एनवायरमेंटल इश्यूज एंड चैलेंज इन द 21 वीं सेंचुरी'''' विषय पर एमएड सभागार में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में एडीजी जोन रमित शर्मा ने कहीं।
उन्होंने पर्यावरण चेतना के प्रसार के लिए आयोजन की सराहना की। कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजनों से विद्यार्थियों में जागरूकता और अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ती है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ की ओर ध्यान आकर्षित किया।
मुख्य वक्ता देहरादून से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आनंद गुप्ता ने प्रदूषकों के निष्कर्षण के लिए पादप आधारित नैनो-सामग्री का विकास व उनके निर्माणित वेटलैंड्स में दक्षता का मूल्यांकन विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. पुनीत खरे ने बताया कि माइक्रो प्लास्टिक आज के समय में उभरते हुए गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषकों में से एक है। संवाद
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250 शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए शोधपत्र
संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन व ऑफलाइन) में किया गया। इसमें 250 शोधकर्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में 600 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन भाग लिया।
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उन्होंने पर्यावरण चेतना के प्रसार के लिए आयोजन की सराहना की। कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजनों से विद्यार्थियों में जागरूकता और अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ती है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ की ओर ध्यान आकर्षित किया।
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मुख्य वक्ता देहरादून से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आनंद गुप्ता ने प्रदूषकों के निष्कर्षण के लिए पादप आधारित नैनो-सामग्री का विकास व उनके निर्माणित वेटलैंड्स में दक्षता का मूल्यांकन विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. पुनीत खरे ने बताया कि माइक्रो प्लास्टिक आज के समय में उभरते हुए गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषकों में से एक है। संवाद
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250 शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए शोधपत्र
संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन व ऑफलाइन) में किया गया। इसमें 250 शोधकर्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में 600 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन भाग लिया।