{"_id":"58a7402f4f1c1bac12d83cc5","slug":"then-hangs-transport-nagar","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर लटक गया ट्रांसपोर्ट नगर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर लटक गया ट्रांसपोर्ट नगर
बरेली।
Updated Sat, 18 Feb 2017 01:07 AM IST
विज्ञापन
Then hangs Transport Nagar
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चार महीने पहले तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज यादव ने लोकार्पण के बाद 17 साल से लटके ट्रांसपोर्ट नगर को बसाने की एक और पहल की थी। बीडीए, पुलिस, ट्रांसपोर्टर्स और मैकेनकों की संयुक्त बैठक में बहुत कुछ तय हो गया। बीडीए ने मैकेनिकों को सस्ती दरों पर छोटे प्लाट आवंटित करने के लिए दो साल के लिए जमीन खरीद की दर 11830 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से फ्रीज भी कर दी मगर डीएम के जाते ही ट्रांसपोर्ट नगर बसाने का मामला एक बार फिर लटक गया।
बीडीए की बरेली-लखनऊ हाइवे स्थित ट्रांसपोर्ट नगर योजना की कल्पना शहर के ट्रांसपोर्टर्स और बड़े वाहनों को बाहर रखने के लिए की गई थी ताकि सड़कों पर वाहन न खड़े हों और आम जनता को जाम और अतिक्रमण से छुटकारा मिल सके। डेढ़ दशक पहले वीरान से पड़े गेट पर लालजी टंडन और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के नाम का पत्थर लगा लेकिन ये योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। 25 हेक्टेअर जमीन पर 40 से 50 करोड़ खर्च कर बीडीए चुप बैठ गया। वर्ष 2014 में कमिश्नर विपिन द्विवेदी और 2016 में जिलाधिकारी पंकज यादव ने ट्रांसपोर्ट नगर बसाने के लिए बीडीए पर दबाव बनाया। हाल में बीडीए ने 46 लाख रुपये खर्च भी किए लोकिन डीएम पंकज यादव का तबादला होने के बाद काम ठप कर दिया।
ये है फ्लाप होने की वजह
बीडीए ने टीपी नगर में 1074 ट्रांसपोर्टर्स भूखंड, 12 दुकानें और 15 व्यवसायिक भूखंड बनाए। ट्रांसपोर्टर्स की जगह भूखंड जमीन का कारोबार करने वाले प्रापर्टी डीलरों को आवंटित कर दिए गए। प्रापर्टी डीलरों ने यहां ऑफिस या दुकान बनानी नहीं थी इसलिए सस्ती दरों में खरीदे गए भूखंडों को महंगे रेट पर बेचने के इरादे से ग्राहक देखते रहे।
विज्ञापन
नहीं खुले सरकारी दफ्तर
टीपी नगर के 24.89 हेक्टेयर एरिया में बैंक, फायर स्टेशन, बिजनेस सर्विस सेंटर, डिस्पेंसरी, पुलिस स्टेशन, कम्यूनिटी हाल और आरटीओ दफ्तर समेत सरकारी और प्राइवेट दफ्तर शिफ्ट करने की योजना थी। सरकारी दफ्तरों को ही शिफ्ट करने की पहल नहीं की गई। ट्रांसपोर्टर्स ने भी रुचि नहीं ली। पार्किंग और सड़क के किनारे वाली जमीन पर मैकेनिक, ढाबे और बाहर से आए लोगों ने कब्जा कर झोपड़ी बना ली। अब न तो कब्जा हट पा रहा है और न ही पार्किंग की जगह खाली हो पा रही। प्रकाश, पानी, सड़क और सुरक्षा के भी इंतजाम नहीं हैं। कुछ ट्रांसपोर्टर्स पहुंच भी गए हैं लेकिन ज्यादातर नहीं पहुंचे।
21 भूखंड अभी भी खाली
बिजनेस सेंटर-एक, कामर्शियल कांपलेक्स ए-एक, कामर्शियल कांपलेक्स-बी एक, होटल, ढाबा-ए, ढाबा बी, ढाबा सी, तौल कांटा, सर्विस सेंटर-ए, सर्विस सेंटर-सी, नर्सिंग होम (सब एक-एक), ट्रांसपोर्ट भूखंड 10 खाली हैं। इनके लिए दो बार पंजीकरण भी खोले गए लेकिन कोई आवेदन नहीं मिला।
कैसे बसेंगे मैकेनिक
ट्रक मैकेनिक परवेज खान 12 साल से ट्रांसपोर्ट नगर में छोटी सी टीन की दुकान में रिपेयरिंग का काम कर रहे हैं। जमीन के लिए बीडीए में आवेदन किया। लकी ड्रा में नंबर ही नहीं आ पाया। इनकी दुकान पार्किंग में चल रही है जो ट्रक या अन्य वाहन खड़ी करने की जगह है। इश्त्यिार हुसैन की ट्रांसपोर्ट नगर में 15 साल पुरानी दुकान रखी है। रोजाना पांच सौ से आठ सौ रुपये की इनकम होती है। ये बीडीए के रेट पर दुकान के लिए जमीन खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। राजीव कुमार मिस्त्री की आमदनी भी पांच सौ से एक हजार रुपये ही हो पाती है। कभी-कभी इतनी भी नहीं होती। ये चाहते हैं कि बैंक लोन दे और मासिक किस्त पर बीडीए उनको दुकान के लिए 25 से 50 स्क्वायर फिट जगह दे दे।
प्रशासन और बीडीए मिलकर पहल करे। ट्रांसपोर्टर्स हमेशा सहयोग करेंगे। हमने पहले भी किया है। हम सब ट्रांसपोर्ट नगर में जाना चाहते हैं। सुविधाएं और सुरक्षा मिले तो शहर के अंदर एक भी ट्रक बस खड़ा नहीं दिखेगा।
-रामकृष्ण शुक्ला, अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट यूनियन
पुराने जिलाधिकारी पंकज यादव के निर्देश पर ट्रांसपोर्ट नगर में बीडीए ने अभी 46 लाख से ज्यादा का काम कराया। वहां दुकानदारों ने पार्किंग की जमीन पर कब्जे कर रखे हैं। अब चुनाव निपटा है। नए डीएम साहब और पुलिस प्रशासन पहल करेगा तो बीडीए हर काम कराने को तैयार है। बिना प्रशासनिक पहल के ये काम संभव नहीं है। -डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
विज्ञापन
बीडीए की बरेली-लखनऊ हाइवे स्थित ट्रांसपोर्ट नगर योजना की कल्पना शहर के ट्रांसपोर्टर्स और बड़े वाहनों को बाहर रखने के लिए की गई थी ताकि सड़कों पर वाहन न खड़े हों और आम जनता को जाम और अतिक्रमण से छुटकारा मिल सके। डेढ़ दशक पहले वीरान से पड़े गेट पर लालजी टंडन और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के नाम का पत्थर लगा लेकिन ये योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। 25 हेक्टेअर जमीन पर 40 से 50 करोड़ खर्च कर बीडीए चुप बैठ गया। वर्ष 2014 में कमिश्नर विपिन द्विवेदी और 2016 में जिलाधिकारी पंकज यादव ने ट्रांसपोर्ट नगर बसाने के लिए बीडीए पर दबाव बनाया। हाल में बीडीए ने 46 लाख रुपये खर्च भी किए लोकिन डीएम पंकज यादव का तबादला होने के बाद काम ठप कर दिया।
विज्ञापन
ये है फ्लाप होने की वजह
बीडीए ने टीपी नगर में 1074 ट्रांसपोर्टर्स भूखंड, 12 दुकानें और 15 व्यवसायिक भूखंड बनाए। ट्रांसपोर्टर्स की जगह भूखंड जमीन का कारोबार करने वाले प्रापर्टी डीलरों को आवंटित कर दिए गए। प्रापर्टी डीलरों ने यहां ऑफिस या दुकान बनानी नहीं थी इसलिए सस्ती दरों में खरीदे गए भूखंडों को महंगे रेट पर बेचने के इरादे से ग्राहक देखते रहे।
विज्ञापन
नहीं खुले सरकारी दफ्तर
टीपी नगर के 24.89 हेक्टेयर एरिया में बैंक, फायर स्टेशन, बिजनेस सर्विस सेंटर, डिस्पेंसरी, पुलिस स्टेशन, कम्यूनिटी हाल और आरटीओ दफ्तर समेत सरकारी और प्राइवेट दफ्तर शिफ्ट करने की योजना थी। सरकारी दफ्तरों को ही शिफ्ट करने की पहल नहीं की गई। ट्रांसपोर्टर्स ने भी रुचि नहीं ली। पार्किंग और सड़क के किनारे वाली जमीन पर मैकेनिक, ढाबे और बाहर से आए लोगों ने कब्जा कर झोपड़ी बना ली। अब न तो कब्जा हट पा रहा है और न ही पार्किंग की जगह खाली हो पा रही। प्रकाश, पानी, सड़क और सुरक्षा के भी इंतजाम नहीं हैं। कुछ ट्रांसपोर्टर्स पहुंच भी गए हैं लेकिन ज्यादातर नहीं पहुंचे।
21 भूखंड अभी भी खाली
बिजनेस सेंटर-एक, कामर्शियल कांपलेक्स ए-एक, कामर्शियल कांपलेक्स-बी एक, होटल, ढाबा-ए, ढाबा बी, ढाबा सी, तौल कांटा, सर्विस सेंटर-ए, सर्विस सेंटर-सी, नर्सिंग होम (सब एक-एक), ट्रांसपोर्ट भूखंड 10 खाली हैं। इनके लिए दो बार पंजीकरण भी खोले गए लेकिन कोई आवेदन नहीं मिला।
कैसे बसेंगे मैकेनिक
ट्रक मैकेनिक परवेज खान 12 साल से ट्रांसपोर्ट नगर में छोटी सी टीन की दुकान में रिपेयरिंग का काम कर रहे हैं। जमीन के लिए बीडीए में आवेदन किया। लकी ड्रा में नंबर ही नहीं आ पाया। इनकी दुकान पार्किंग में चल रही है जो ट्रक या अन्य वाहन खड़ी करने की जगह है। इश्त्यिार हुसैन की ट्रांसपोर्ट नगर में 15 साल पुरानी दुकान रखी है। रोजाना पांच सौ से आठ सौ रुपये की इनकम होती है। ये बीडीए के रेट पर दुकान के लिए जमीन खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। राजीव कुमार मिस्त्री की आमदनी भी पांच सौ से एक हजार रुपये ही हो पाती है। कभी-कभी इतनी भी नहीं होती। ये चाहते हैं कि बैंक लोन दे और मासिक किस्त पर बीडीए उनको दुकान के लिए 25 से 50 स्क्वायर फिट जगह दे दे।
प्रशासन और बीडीए मिलकर पहल करे। ट्रांसपोर्टर्स हमेशा सहयोग करेंगे। हमने पहले भी किया है। हम सब ट्रांसपोर्ट नगर में जाना चाहते हैं। सुविधाएं और सुरक्षा मिले तो शहर के अंदर एक भी ट्रक बस खड़ा नहीं दिखेगा।
-रामकृष्ण शुक्ला, अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट यूनियन
पुराने जिलाधिकारी पंकज यादव के निर्देश पर ट्रांसपोर्ट नगर में बीडीए ने अभी 46 लाख से ज्यादा का काम कराया। वहां दुकानदारों ने पार्किंग की जमीन पर कब्जे कर रखे हैं। अब चुनाव निपटा है। नए डीएम साहब और पुलिस प्रशासन पहल करेगा तो बीडीए हर काम कराने को तैयार है। बिना प्रशासनिक पहल के ये काम संभव नहीं है। -डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए