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1971 की जंग के हथियारों ने दी सेना के शौर्य की गवाही

Thu, 24 Dec 2020 12:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 24 Dec 2020 12:19 AM IST
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The weapons of war of 1971 gave testimony to the valor of the army
हथियारों का प्रदर्शन करते सेना के जवान। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

बरेली पहुंची विजय ज्योति सैन्य सम्मान के साथ निजी यूनिवर्सिटी में स्थापित
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सैन्य अफसरों ने युवाओं को सुनाई पाकिस्तान की सेना को धूल चटाने की दास्तां

बरेली। 1971 में पाकिस्तान पर गौरवशाली विजय की 50वीं वर्षगांठ पर बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित समारोह में सेना की ओर से युद्ध में इस्तेमाल किए गए हथियारों का प्रदर्शन किया गया। युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त शहीदों की गौरवगाथा भी सुनाई गई। सेना के बैंड की धुनों से सेना के शौर्य का अहसास दोगुना हो गया। देश प्रेम के माहौल में तमाम लोगों ने विजय ज्योति के साथ सेल्फी लेकर सेना के पराक्रम को सलाम किया।
भारत-पाक के इसी युद्ध के बाद बांग्लादेश का उदय हुआ था। भारतीय सेना के इस पराक्रम के 50 साल पूरे हो चुके हैं। 16 दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों दिल्ली में प्रज्ज्वलित विजय ज्योति 19 दिसंबर को बरेली पहुंची तो सैन्य सम्मान के साथ उसे परिसर के बीचोबीच स्थापित किया गया। इस मौके पर बुधवार को बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सैन्य अफसरों के स्वागत से हुआ। विजय ज्योति के चारों ओर पाकिस्तान के खिलाफ सेना की ओर से प्रयोग किए गए हथियारों का प्रदर्शन किया गया। इसमें लाइट फील्ड गन, रिकवरी व्हीकल, सेल्फ माउंटिंग, डिसमाउंटिंग कम्पोजिट, वर्मी कम्पोस्टिंग, इमरजेंसी रेस्पॉन्स व्हीकल, रेडियो स्टेशन आरआरएफ, इवैक्युएशन, 51 और 5.56 एममए मोर्टार, इंसास आरआईएफ, नौ एमएम सीएमजी और पिस्टल जैसे हथियार व उपकरण शामिल थे।
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द कॉम्बैट एनेबलर्स काउंटर पर युवाओं को एक सैनिक की वेशभूषा में फोटो खिंचवाने का मौका दिया गया। भारत-पाक युद्ध का चित्रात्मक परिचय भी दिया गया। आपातकाल के दौरान जख्मी सैनिक के इलाज के लिए आकस्मिक मेडिकल सेवाओं की भी जानकारी दी गई।
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सैन्य अफसरों और पूर्व सैनिकों का सम्मान

यूनिवर्सिटी की ओर से शहीद नायक गोखरन लाल की पत्नी वीर नारी रमा देवी और शहीद सिपाही जंगी सिंह की पत्नी सुद्धमा देवी को भी सम्मानित किया गया। सैन्य अफसरों ने बताया कि 1962 तक भारतीय सेना के पास हथियारों और दूसरे जरूरी सामान की कमी थी लेकिन जवानों के अदम्य साहस से आज तक भारत को किसी भी युद्ध में पराजय का सामना नहीं करना पड़ा।
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