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कहीं संक्रमण न फैला दे बेल का पेड़
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तीन सौ बेड अस्पताल में पेड़ पर चढ़ा युवक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बेल तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ रहे कोविड के संदिग्ध मरीज
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बरेली। कोविड चिकित्सालय के फ्लू कॉर्नर पर संदिग्ध संक्रमितों की जांच में लंबा समय लग रहा है। ऐसी स्थिति में संदिग्ध व्यक्ति अस्पताल परिसर में लगे फलों से लदे हुआ बेल के पेड़ आकर्षण का केंद्र है। जिस पर मौका मिलते ही संदिग्ध व्यक्ति फल तोड़ने के लिए चढ़ रहे हैं। दो दिन पहले एक संदिग्ध की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो उसके पेड़ पर चढ़े होने की सूचना से हडकंप मच गया।
पिछले साल भी कोविड चिकित्सालय के परिसर में बेल के पेड़ पर काफी फल लगे थे लेकिन स्टाफ ने पेड़ की निगरानी की और फल तोड़कर घर ले गए। अबकी बार स्टाफ कम है और अभी फल कच्चे हैं, जो धूप की वजह से पीले रंग के दिखाई दे रहे हैं। पके फल होने के एहसास से जांच कराने पहुंच रहे संदिग्ध व्यक्ति पर्चा बनवाने, ओपीडी में जांच कराने के बाद सैंपलिंग के दौरान लगी लंबी लाइन में वक्त बरबाद करने के बजाय कुछ लोग फल तोड़ने में जुट जा रहे हैं। दो दिन पहले संक्रमित के फल तोड़ने की जानकारी मिली तो हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद स्टाफ ने उसे जमकर फटकारा और नीचे उतार दिया। हालांकि, तब तक संक्रमित फल तोड़ चुका था। बता दें कि एंटीजन की रिपोर्ट दस से 15 मिनट में मिल जाती है लेकिन आरटीपीसीआर की रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन का समय लग रहा है। आशंका है कि अगर कोई बाद में संक्रमित मिला और वह फल तोड़कर ले गया और बांटकर खाएगा तो संक्रमण फैल सकता है। मामले पर सीएमएस डॉ. वागीश वैश ने स्टाफ को कड़ाई से पेड़ की निगरानी के निर्देश दिए हैं। ब्यूरो
पिछले साल भी कोविड चिकित्सालय के परिसर में बेल के पेड़ पर काफी फल लगे थे लेकिन स्टाफ ने पेड़ की निगरानी की और फल तोड़कर घर ले गए। अबकी बार स्टाफ कम है और अभी फल कच्चे हैं, जो धूप की वजह से पीले रंग के दिखाई दे रहे हैं। पके फल होने के एहसास से जांच कराने पहुंच रहे संदिग्ध व्यक्ति पर्चा बनवाने, ओपीडी में जांच कराने के बाद सैंपलिंग के दौरान लगी लंबी लाइन में वक्त बरबाद करने के बजाय कुछ लोग फल तोड़ने में जुट जा रहे हैं। दो दिन पहले संक्रमित के फल तोड़ने की जानकारी मिली तो हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद स्टाफ ने उसे जमकर फटकारा और नीचे उतार दिया। हालांकि, तब तक संक्रमित फल तोड़ चुका था। बता दें कि एंटीजन की रिपोर्ट दस से 15 मिनट में मिल जाती है लेकिन आरटीपीसीआर की रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन का समय लग रहा है। आशंका है कि अगर कोई बाद में संक्रमित मिला और वह फल तोड़कर ले गया और बांटकर खाएगा तो संक्रमण फैल सकता है। मामले पर सीएमएस डॉ. वागीश वैश ने स्टाफ को कड़ाई से पेड़ की निगरानी के निर्देश दिए हैं। ब्यूरो
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