{"_id":"5ede98c48ebc3e90731e7669","slug":"the-team-returned-after-some-time-wandering-in-the-village-the-tiger-s-location-was-not-found-baheri-news-bly4085262128","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुछ देर गांव में घूमकर लौटी टीम, बोली-नहीं मिली बाघ की लोकेशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुछ देर गांव में घूमकर लौटी टीम, बोली-नहीं मिली बाघ की लोकेशन
विज्ञापन
कैमरे में कैद हुई बाघिन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
ग्रामीण बोले, बिना तलाश किए कैसे मिलेगी लोकेशन
विज्ञापन
डीएफओ कुछ देर रुककर वन विभाग की ओर गए
बहेड़ी। जवाहरपुर गांव में बाघ के पांच साल की बच्ची को उठाकर ले जाने की घटना पर भी वन विभाग की टीम गंभीर नहीं। हालांकि सोमवार को टीम फिर गांव पहुंची, मगर कुछ गांववालों से पूछताछ कर ही लौट गई। वन विभाग की टीम का कहना है कि घटना के बाद से बाघ की लोकेशन क्षेत्र में नहीं मिल रही है। वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग के इन दावों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि दो दिन से टीम सिर्फ गांव में आकर लौट जाती है। एक बार भी बाघ की तलाश नहीं की गई। बिना तलाश किए बाघ की लोकेशन कैसे मिलेगी। सोमवार को डीएफओ भरत लाल भी यहां दौरा करने आए थे, मगर घूमते हुए बार्डर पर वन विभाग के बैरियर पर चले गए।
नसीम, पूर्व प्रधान नाजिम, घायल लड़की के पिता ब्रह्मस्वरूप आदि गांववालों का कहना है कि इस समय खेतों में धान की पौध डाली जा रही है। बाघ के खौफ से किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन विभाग की टीम गांव आई थी। कुछ देर गांववालों से बात की और लौट गई। इसके अलावा दोपहर के समय डीएफओ भरत लाल और रेंजर रवींद्र सक्सेना भी गांव आए थे और घटनास्थल का दौरा कर जंगल में घूमते हुए हाईवे पर वन विभाग के बैरियर पर चले गए। वहां शाम तक उनके अधीनस्थ उनकी आवभगत में लगे रहे। वह शाम को वापस चले गए।
विज्ञापन
गांव में बाघ को दोबारा किसी ने नहीं देखा है। उसकी कोई लोकेशन भी नहीं मिल रही है। डीएफओ ने भी घटनास्थल का दौरा किया है। उसकी लोकेशन मिलते ही आगे की कार्रवाई हो सकेगी। - रवींद्र सक्सेना, रेंजर बहेड़ी
विज्ञापन
विज्ञापन
रबर फैक्टरी में तीन महीने से डेरा जमाए बाघिन भी अब तक नहीं पकड़ पाई टीम
फतेहगंज पश्चिमी में रबर फैक्टरी में करीब तीन महीने से एक बाघिन डेरा जमाए बैठी है, लेकिन वन विभाग की टीम अब तक उसे पकड़ नहीं पाई है, जबकि बाघिन को पकड़ने के लिए 24 कैमरे, चार पिंजड़े फैक्टरी में लगाए गए हैं। एक कमरा भी शिकार बांधकर पिंजड़ानुमा बनाया गया है। इसके अलावा दो और शिकार बांधे गए हैं, लेकिन बाघिन टीम के हाथ नहीं आ रही। तीन महीने से वन विभाग की टीम बाघिन को जल्द बेहोश कर पकड़ने का दावा करती आ रही है, लेकिन अब तक उसकी योजना परवान नहीं चढ़ रही। कभी अधिकारी सटीक लोकेशन मिलने की बात कहकर बेहोश न कर पाने की बात कहते हैं तो कभी लोकेशन ट्रेस न होकर विफलता पर पर्दा डालने पर लगे हैं।
विज्ञापन
डीएफओ कुछ देर रुककर वन विभाग की ओर गए बहेड़ी। जवाहरपुर गांव में बाघ के पांच साल की बच्ची को उठाकर ले जाने की घटना पर भी वन विभाग की टीम गंभीर नहीं। हालांकि सोमवार को टीम फिर गांव पहुंची, मगर कुछ गांववालों से पूछताछ कर ही लौट गई। वन विभाग की टीम का कहना है कि घटना के बाद से बाघ की लोकेशन क्षेत्र में नहीं मिल रही है। वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग के इन दावों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि दो दिन से टीम सिर्फ गांव में आकर लौट जाती है। एक बार भी बाघ की तलाश नहीं की गई। बिना तलाश किए बाघ की लोकेशन कैसे मिलेगी। सोमवार को डीएफओ भरत लाल भी यहां दौरा करने आए थे, मगर घूमते हुए बार्डर पर वन विभाग के बैरियर पर चले गए।
नसीम, पूर्व प्रधान नाजिम, घायल लड़की के पिता ब्रह्मस्वरूप आदि गांववालों का कहना है कि इस समय खेतों में धान की पौध डाली जा रही है। बाघ के खौफ से किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन विभाग की टीम गांव आई थी। कुछ देर गांववालों से बात की और लौट गई। इसके अलावा दोपहर के समय डीएफओ भरत लाल और रेंजर रवींद्र सक्सेना भी गांव आए थे और घटनास्थल का दौरा कर जंगल में घूमते हुए हाईवे पर वन विभाग के बैरियर पर चले गए। वहां शाम तक उनके अधीनस्थ उनकी आवभगत में लगे रहे। वह शाम को वापस चले गए।
विज्ञापन
गांव में बाघ को दोबारा किसी ने नहीं देखा है। उसकी कोई लोकेशन भी नहीं मिल रही है। डीएफओ ने भी घटनास्थल का दौरा किया है। उसकी लोकेशन मिलते ही आगे की कार्रवाई हो सकेगी। - रवींद्र सक्सेना, रेंजर बहेड़ी
विज्ञापन विज्ञापन