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थर्मल स्क्रीनिंग पर प्रशासन के भरोसे से विस्फोटक हो सकते हैं हालात
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थर्मल स्क्रीनिंग करते चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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आईएमए ने कहा- बरेली को कोरोना से बचाना है तो प्रवासियों को क्वारंटीन कराए प्रशासन
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बरेली। एक तो बाजारों में भीड़भाड़ की छूट और दूसरी तरफ संक्रमण से हर तरफ घिरे राज्यों और शहरों से लौट रहे लोगों की बढ़ती तादाद बरेली के लिए लगातार खतरे की घंटी बनकर बज रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमण के जिले में 15 मामले अभी शुरुआत भर है। हालात कल्पना से भी ज्यादा भयावह हो सकते हैं। प्रशासन और पुलिस के अफसरों की जल्दबाजी और बेपरवाही इसकी प्रमुख वजह बन सकती है क्योंकि संक्रमित इलाकों से लौट रहे लोगों को सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग कर घर भेजा जा रहा है जबकि ज्यादातर संक्रमित एसिम्प्टोमैटिक हैं और उनके संपर्क में आने से बड़े पैमाने पर दूसरों के संक्रमित होने की आशंका है।
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पुलिस-प्रशासन की अनदेखी से बरेली में बढ़ रहा खतरा
आईएमए सचिव डॉ. राजीव गोयल के मुताबिक मुंबई, दिल्ली, नोएडा, गुजरात, राजस्थान जैसे उन राज्यों से वापस आ रहे लोगों के संक्रमित होने की पूरी आशंका है जहां कोरोना के रोजाना सैकड़ों केस सामने आ रहे हैं। लॉकडाउन के पहले चरण में ऐसे लोगों को पुलिस-प्रशासन ने शहर की सीमा पर ही क्वारंटीन करा रहा था जिसकी वजह से संक्रमण शहर में प्रवेश नहीं कर सका। मगर अब प्रवासियों को खुद बसों से घर पहुंचाया जा रहा है। जिले की सीमाओं पर सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है जो कारगर नहीं है। प्रशासन को प्रवासियों को सीमा पर ही कम से कम 15 दिनों के लिए क्वारंटीन कर उनके खाने की व्यवस्था करनी चाहिए और फिर उन्हें घर पहुंचाना चाहिए।
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अगर अभी से न संभले तो हालात हो सकते हैं खराब
आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. विनोद पागरानी के मुताबिक अब तक जिले में जितने मामले सामने आए हैं, वे सब एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले संक्रमित हैं। स्वास्थ्य विभाग के लिए सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग से इन्हें ट्रेस करना कठिन है। ये लोग जब अपने गांव पहुंचेंगे तो वहां भी लोगों को संक्रमित करेंगे। थर्मल स्क्रीनिंग करने के के बजाय इन लोगों को क्वारंटीन करना चाहिए। अगर वे 15 दिन क्वारंटीन रहेंगे तो वायरस को मात देकर खुद ही स्वस्थ हो जाएंगे और रोग से लड़ने की क्षमता कम होगी तो ट्रेस हो जाएंगे।
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