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Bareilly News: 37 साल पहले बना था जिला अस्पताल शिफ्ट को करने का प्रस्ताव... आज भी धक्के खा रहे मरीज
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बीडीए ने वर्ष 1987 में स्टेडियम रोड पर स्थानांतरित कराने की बनाई थी योजना, कांग्रेस ने किया था विरोध, रास्ते में बाजार और जाम बन रहा आवागमन में बाधा
बरेली। उद्देश्य भले ही कुछ और रहा हो, लेकिन शहर के घने बाजार में स्थित जिला अस्पताल को शिफ्ट करने की जरूरत कई दशक पहले बताई गई थी। बीडीए ने वर्ष 1987 में इसे स्टेडियम रोड पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव बनाया था। उस समय कांग्रेस ने इसका विरोध किया था। आरोप था कि अस्पताल शिफ्ट करने से गरीबों के लिए सरकारी सुविधा का लाभ महंगा हो जाएगा, जबकि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए अस्पताल की जगह व्यावसायिक काम्प्लेक्स बनाया जाएगा।
इस विरोध की खबर 16 जुलाई 1987 को अमर उजाला में ''''जिला अस्पताल को स्टेडियम के पास ले जाने का विरोध'''' शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। नगर युवक कांग्रेस-ई के अध्यक्ष मो. जकी ने जिला अस्पताल को स्थानांतरित करने और उसकी जगह व्यावसायिक काॅम्प्लेक्स बनाने के बरेली विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव पर रोष जताया था। उन्होंने इसे अधिकारियों के भ्रष्ट दिमाग की उपज तक करार दे दिया था।
नगर महापालिका कर्मचारी सहकारी आवासीय समिति के अध्यक्ष हफीज खां ने भी विरोध जताया था। स्पोर्ट्स स्टेडियम के पास उदयपुर खास में स्थित महापालिका की 40 एकड़ जमीन पर अस्पताल को शिफ्ट करने के प्रस्ताव को गलत बताते हुए कहा था कि उक्त जमीन पर महापालिका कर्मियों के लिए आवास बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
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1897 में रखी गई थी नींव और बढ़ता गया दायरा
महाराणा संयुक्त चिकित्सालय की नींव वर्ष 1897 में रखी गई थी। तब जिला अस्पताल का सीएमएस कार्यालय मुख्य भवन हुआ करता था और वहीं पर डिस्पेंसरी भी होती थी। प्रतिदिन 15 से 20 मरीज ही इलाज के लिए पहुंचते थे। गुजरते वक्त के साथ जिला अस्पताल में मरीजों की तादाद बढ़ने लगी तो क्रमवार अस्पताल के खाली पड़े मैदान में इमरजेंसी, ओपीडी, सीएमओ कार्यालय, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी, बच्चा वार्ड, रैन बसेरा, ऑपरेशन थिएटर, ऑक्सीजन मैनीफोल्ड समेत अन्य निर्माण हुए।
साै गुना बढ़ चुके हैं मरीज
आज 127 साल बाद जिला अस्पताल में मरीजों की तादाद 100 गुना बढ़ चुकी है। प्रतिदिन डेढ़ हजार से ज्यादा नए मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल परिसर के चारों ओर बाजार बस चुका है। मरीजों और एंबुलेंस के आवागमन में आए दिन कठिनाई होती है।
अब शिफ्टिंग आसान नहीं
एडीएसआईसी डॉ. अलका शर्मा के अनुसार अब अस्पताल को कहीं शिफ्ट करना टेढ़ी खीर साबित होगा। ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी सेवाएं शिफ्ट की जा सकती हैं, लेकिन पैथोलॉजी, डायग्नोस्टिक उपकरणों को शिफ्ट करना कठिन है। इन मशीनों को उखाड़कर कहीं दूसरी जगह स्थापित करने पर इनमें तकनीकी खामी की आशंका है। अगर एक बार उपकरण खराब हो जाएं तो उन्हें दुरुस्त करना भी कठिन होगा, क्योंकि ये वर्षों पहले लगे थे और उनके पुर्जे मिलना मुश्किल हो सकता है। अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली। उद्देश्य भले ही कुछ और रहा हो, लेकिन शहर के घने बाजार में स्थित जिला अस्पताल को शिफ्ट करने की जरूरत कई दशक पहले बताई गई थी। बीडीए ने वर्ष 1987 में इसे स्टेडियम रोड पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव बनाया था। उस समय कांग्रेस ने इसका विरोध किया था। आरोप था कि अस्पताल शिफ्ट करने से गरीबों के लिए सरकारी सुविधा का लाभ महंगा हो जाएगा, जबकि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए अस्पताल की जगह व्यावसायिक काम्प्लेक्स बनाया जाएगा।
इस विरोध की खबर 16 जुलाई 1987 को अमर उजाला में ''''जिला अस्पताल को स्टेडियम के पास ले जाने का विरोध'''' शीर्षक से प्रकाशित हुई थी। नगर युवक कांग्रेस-ई के अध्यक्ष मो. जकी ने जिला अस्पताल को स्थानांतरित करने और उसकी जगह व्यावसायिक काॅम्प्लेक्स बनाने के बरेली विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव पर रोष जताया था। उन्होंने इसे अधिकारियों के भ्रष्ट दिमाग की उपज तक करार दे दिया था।
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नगर महापालिका कर्मचारी सहकारी आवासीय समिति के अध्यक्ष हफीज खां ने भी विरोध जताया था। स्पोर्ट्स स्टेडियम के पास उदयपुर खास में स्थित महापालिका की 40 एकड़ जमीन पर अस्पताल को शिफ्ट करने के प्रस्ताव को गलत बताते हुए कहा था कि उक्त जमीन पर महापालिका कर्मियों के लिए आवास बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
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1897 में रखी गई थी नींव और बढ़ता गया दायरा
महाराणा संयुक्त चिकित्सालय की नींव वर्ष 1897 में रखी गई थी। तब जिला अस्पताल का सीएमएस कार्यालय मुख्य भवन हुआ करता था और वहीं पर डिस्पेंसरी भी होती थी। प्रतिदिन 15 से 20 मरीज ही इलाज के लिए पहुंचते थे। गुजरते वक्त के साथ जिला अस्पताल में मरीजों की तादाद बढ़ने लगी तो क्रमवार अस्पताल के खाली पड़े मैदान में इमरजेंसी, ओपीडी, सीएमओ कार्यालय, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी, बच्चा वार्ड, रैन बसेरा, ऑपरेशन थिएटर, ऑक्सीजन मैनीफोल्ड समेत अन्य निर्माण हुए।
साै गुना बढ़ चुके हैं मरीज
आज 127 साल बाद जिला अस्पताल में मरीजों की तादाद 100 गुना बढ़ चुकी है। प्रतिदिन डेढ़ हजार से ज्यादा नए मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल परिसर के चारों ओर बाजार बस चुका है। मरीजों और एंबुलेंस के आवागमन में आए दिन कठिनाई होती है।
अब शिफ्टिंग आसान नहीं
एडीएसआईसी डॉ. अलका शर्मा के अनुसार अब अस्पताल को कहीं शिफ्ट करना टेढ़ी खीर साबित होगा। ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी सेवाएं शिफ्ट की जा सकती हैं, लेकिन पैथोलॉजी, डायग्नोस्टिक उपकरणों को शिफ्ट करना कठिन है। इन मशीनों को उखाड़कर कहीं दूसरी जगह स्थापित करने पर इनमें तकनीकी खामी की आशंका है। अगर एक बार उपकरण खराब हो जाएं तो उन्हें दुरुस्त करना भी कठिन होगा, क्योंकि ये वर्षों पहले लगे थे और उनके पुर्जे मिलना मुश्किल हो सकता है। अमर उजाला ब्यूरो