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Bareilly News: परंपरा और आधुनिक जैव विज्ञान के समन्वय से ही प्रशस्त होगा विकसित भारत का मार्ग

Tue, 02 Jun 2026 01:32 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Tue, 02 Jun 2026 01:32 AM IST
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The path to a developed India will be paved only through the coordination of tradition and modern biological science.
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में सोमवार को भारतीय एनिमल साइंस कॉन्क्लेव एवं साइंस एक्सपो बेसिक–2026 का शुभारंभ हुआ। आईवीआरआई और विज्ञान भारती की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का मुख्य विषय ''''परंपरा से प्रौद्योगिकी तक, विकसित भारत@2047 के लिए जैव विज्ञान का मार्ग'''' रखा गया है। इसमें देशभर से आए 350 शोध छात्रों सहित संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, शिक्षकों, पशुपालकों और उद्योगों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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मुख्य अतिथि पद्मश्री कंवल सिंह चौहान ने कहा कि खेती तभी लाभकारी बन सकती है, जब किसान केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और बाजार से सीधा जुड़ाव स्थापित करें। उन्होंने भारतीय कृषि परंपरा में पशुधन आधारित खेती के महत्व को बताते हुए कहा कि गोबर और गोमूत्र का वैज्ञानिक उपयोग करके टिकाऊ व पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली विकसित की जा सकती है।
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दुग्ध उत्पादन में महिलाओं का 78% योगदान
आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. संजय कुमार सिंह ने कहा कि भारत के दुग्ध क्षेत्र में लगभग 78 फीसदी योगदान महिलाओं का है। बेसिक-2026 विज्ञान, समाज और उद्योगों को एक मंच पर लाएगा ताकि प्रयोगशालाओं के नवाचार सीधे खेतों तक पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि आईवीआरआई को नैक मूल्यांकन में ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त है और देश में पशुओं के लिए विकसित अधिकतर टीकों में संस्थान की अग्रणी भूमिका रही है। उप्र गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजेश सेंगर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों के इस दौर में गोवंश आधारित प्राकृतिक कृषि ही स्थायी समाधान दे सकती है। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संयुक्त संगठन सचिव प्रवीण रामदास ने युवाओं को गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया। विज्ञान भारती ब्रज प्रांत के अध्यक्ष प्रो. मनोज रावत ने पुराना बनाम नया की जगह पुराना प्लस नया का मॉडल अपनाने की बात कही।
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सीमित संसाधनों में बेहतर पशुधन प्रबंधन की चुनौती
विशिष्ट वक्ता पीडीएफएमडी, भुवनेश्वर के निदेशक डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि भारत के पास विश्व की कुल भूमि का केवल 2.4 फीसदी भाग है, जबकि वैश्विक पशुधन का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा यहां मौजूद है। ऐसे में पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने प्रभावी टीकाकरण को ऑर्गेनिक एनिमल हसबैंड्री की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रो. एसपी गौतम ने कहा कि रामचरितमानस, महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के गहन सिद्धांत छिपे हैं।
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