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ट्रैफिक लाइट की खरीद में ही खेल था, खराब हो गईं
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Fri, 19 Aug 2016 12:45 AM IST
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शहर के चार चौराहों पर ट्रैफिक कंट्रोल करने के मकसद से एक साल पहले लगाई गईं ट्रैफिक लाइटें ठीक से नहीं जल रही हैं। कमीशन के चक्कर में शासन और नगर निगम बोर्ड से अनुमति के झंझट से बचने के लिए 52.21 के अलग-अलग छोटे टेंडर कर एक ही फर्म से इन्हें खरीद लिया गया। टेंडर का अलग-अलग रकम इतनी रखी गई कि कार्यवाहक एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के स्तर से काम हो जाए। जानकार बता रहे हैं कि ये लाइटें इंडियन रोड कांग्रेस के मानक के अनुरूप भी नहीं थीं। इनकी ऊंचाई भी कम रखी गई, जिससे छोटे वाहनों में चलने वालों को ये दिखाई नहीं पड़ती। सेकेंड वाला टाइमिंग सिस्टम भी आधा अधूरा था।
नगर निगम ने सितंबर 2015 सेटेलाइट, चौकी चौराहा, पटेल चौक और चौपुला चौराहे पर ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए दिल्ली और नोएडा की तर्ज पर लाइटें लगाई थीं। ट्रैफिक लाइटें लगाने के लिए दिल्ली की माइक्रोट्रम्स इन्फ्राटेक लिमिटेड ने से 52.21 लाख में अनुबंध किया गया। नियमानुसार इतनी बड़ी रकम के टेंडर कराने के लिए शासन की अनुमति आवश्यक थी। इससे बचने के लिए नगर निगम ने टेंडर को जानबूझकर चार अलग-अलग टुकड़ों में निकालकर एक ही फर्म से लाइटें लगाने का काम कराया जिससे शासन की अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ी। ट्रैफिक लाइटें लगाने के लिए इंडियन रोड कांग्रेस ने मानक निर्धारित किए हैं। यहां प्राइवेट फर्म से निर्धारित मानक से कम की ट्रैफिक लाइटें शेड्यूल रेट से ज्यादा कीमत में खरीदकर चौराहों पर लगा दी गईं। कुछ दिन ठीक से जलने के बाद न केवल इन लाइटों के जलने बुझने की टाइमिंग गड़बड़ हो गई बल्कि ये अक्सर खराब रैंहने लगीं। येलो लाइट तो कभी जलती ही नहीं। रेड और ग्रीन लाइट का भी भरोसा नहीं रहता कि कितने सेकेंड तक जलेगी और कब बुझ जाएगी। वाहन चालक अपनी मर्जी से जब और जहां से चाहे निकल जाते हैं। चौपुला पर तो ट्रैफिक लाइटें लंबे समय से काम नहीं कर रहीं। कुल मिलाकर 52.21 लाख खर्च होने के बाद भी इन लाइटों से चौराहों पर ट्रैफिक कंट्रोल होने का मकसद पूरा नहीं हो पाया।
नगर निगम में बजट स्वीकृति के ये हैं नियम
बजट की रकम स्वीकृति अधिकारी
1- 10 लाख तक नगर आयुक्त
2- 10 से 15 लाख तक मेयर
3- 15 से 20 लाख तक नगर निगम कार्यकारिणी
4- 20 से 30 लाख तक नगर निगम बोर्ड
5- 30 लाख से ऊपर शासन
किस चौराहे पर कितनी रकम खर्च हुई
चौराहे का नाम बजट खर्च
सेटेलाइट चौराहा 10.03 लाख
पटेल चौक 13.90 लाख
चौकी चौराहा 13.90 लाख
चौपुला चौराहा 14.90 लाख
कोड---
केबिल कटने से ट्रैफिक लाइटें खराब हो गई थीं। अब उसको ठीक कर दिया गया है। नगर निगम ने ट्रैफिक लाइटें लगवा दी हैं लेकिन अब इनका कंट्रोल ट्रैफिक पुलिस करती है।
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-शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
बरसात की वजह से पानी आ जाने पर ट्रैफिक लाइटें बंद हो जाती हैं। चौकी चौराहा की लाइट हाल ही में सही कराई गई है। सेटेलाइट बस अड्डे की लाइट को भी दिखवा लेते हैं- ओपी यादव, एसपी ट्रैफिक
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नगर निगम ने सितंबर 2015 सेटेलाइट, चौकी चौराहा, पटेल चौक और चौपुला चौराहे पर ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए दिल्ली और नोएडा की तर्ज पर लाइटें लगाई थीं। ट्रैफिक लाइटें लगाने के लिए दिल्ली की माइक्रोट्रम्स इन्फ्राटेक लिमिटेड ने से 52.21 लाख में अनुबंध किया गया। नियमानुसार इतनी बड़ी रकम के टेंडर कराने के लिए शासन की अनुमति आवश्यक थी। इससे बचने के लिए नगर निगम ने टेंडर को जानबूझकर चार अलग-अलग टुकड़ों में निकालकर एक ही फर्म से लाइटें लगाने का काम कराया जिससे शासन की अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ी। ट्रैफिक लाइटें लगाने के लिए इंडियन रोड कांग्रेस ने मानक निर्धारित किए हैं। यहां प्राइवेट फर्म से निर्धारित मानक से कम की ट्रैफिक लाइटें शेड्यूल रेट से ज्यादा कीमत में खरीदकर चौराहों पर लगा दी गईं। कुछ दिन ठीक से जलने के बाद न केवल इन लाइटों के जलने बुझने की टाइमिंग गड़बड़ हो गई बल्कि ये अक्सर खराब रैंहने लगीं। येलो लाइट तो कभी जलती ही नहीं। रेड और ग्रीन लाइट का भी भरोसा नहीं रहता कि कितने सेकेंड तक जलेगी और कब बुझ जाएगी। वाहन चालक अपनी मर्जी से जब और जहां से चाहे निकल जाते हैं। चौपुला पर तो ट्रैफिक लाइटें लंबे समय से काम नहीं कर रहीं। कुल मिलाकर 52.21 लाख खर्च होने के बाद भी इन लाइटों से चौराहों पर ट्रैफिक कंट्रोल होने का मकसद पूरा नहीं हो पाया।
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नगर निगम में बजट स्वीकृति के ये हैं नियम
बजट की रकम स्वीकृति अधिकारी
1- 10 लाख तक नगर आयुक्त
2- 10 से 15 लाख तक मेयर
3- 15 से 20 लाख तक नगर निगम कार्यकारिणी
4- 20 से 30 लाख तक नगर निगम बोर्ड
5- 30 लाख से ऊपर शासन
किस चौराहे पर कितनी रकम खर्च हुई
चौराहे का नाम बजट खर्च
सेटेलाइट चौराहा 10.03 लाख
पटेल चौक 13.90 लाख
चौकी चौराहा 13.90 लाख
चौपुला चौराहा 14.90 लाख
कोड---
केबिल कटने से ट्रैफिक लाइटें खराब हो गई थीं। अब उसको ठीक कर दिया गया है। नगर निगम ने ट्रैफिक लाइटें लगवा दी हैं लेकिन अब इनका कंट्रोल ट्रैफिक पुलिस करती है।
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-शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
बरसात की वजह से पानी आ जाने पर ट्रैफिक लाइटें बंद हो जाती हैं। चौकी चौराहा की लाइट हाल ही में सही कराई गई है। सेटेलाइट बस अड्डे की लाइट को भी दिखवा लेते हैं- ओपी यादव, एसपी ट्रैफिक