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नए जमाने की बहुओं ने खड़े किए हाथ, व्रत में नहीं दे पाएंगी साथ

Wed, 25 Oct 2017 01:19 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Wed, 25 Oct 2017 01:19 AM IST
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The old people of the new age can not stand their hands in the fast with
पूजा की तैयारी

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अपने शहर में रहने वाले पूर्वांचल के परिवारों में छठ पूजा को लेकर बेहद उत्साह है। घर-घर त्योहार मनाने के लिए तैयारियां चल रही हैं, लेकिन सख्त नियमों की वजह से नए जमाने की बहुएं छठ पूजा के निर्जल व्रत में सास का साथ देने से कतरा रही हैं। तमाम कामकाजी बहुओं ने तो सास से व्रत लेने से ही हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि वे व्रत में साथ नहीं दे पाएंगी।
  

व्रत लेना ही नहीं चाहतीं बहुएं
जिला देवरिया के सलेमपुर तहसील के कौसड़ गांव के रहने वाले विजय बहादुर सिंह यहां रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कर्मचारी हैैं। पत्नी उषा सिंह के अलावा परिवार में बेटे अजीत सिंह और बेटी निवेदिता हैं। पूर्वांचल की एक महिला उनके यहां मेहमानदारी में आई हुई हैं। उषा सिंह ने बताया कि गांव में तो वे सरयू नदी के तट पर सूर्य को अर्घ्य देने जाती थीं। पहले दोनों व्रत रखती थीं लेकिन अब एक ही रखती हैं। बोलीं, व्रत के नियम इतने सख्त हैं कि उनका पालन करना नए जमाने की बहुओं के बस में नहीं है। नए जमाने की बहुएं तो व्रत रखने से ही बचती हैं।  
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पहली बार कच्चे से दूध से दिया अर्घ्य
मूलरूप से गोरखपुर के अटका गांव निवासी विश्वविद्यालय के कर्मचारी नेता राजबहादुर सिंह की पत्नी सरोज सिंह ने बताया कि वह करीब 22 साल से छठ पूजा पर व्रत रख रही हैं। पहले दो दिन का व्रत रहता था, लेकिन बीमार होने के बाद से एक दिन का रखना शुरू कर दिया है। सास ने उन्हें आमीनदी में सूर्य को अर्घ्य देने के दौैरान व्रत सौंपा था। उस समय हमने परिवार के साथ कच्चे दूध से अर्घ्य दिया था। नए जमाने की जो बहुएं व्रत नहीं लेना चाहती हैं तो उनकी सास ऐसे में अपना व्रत ब्राह्मण को सौंप देती हैं।   
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व्रत से दूरियां बना रही हैं नई बहुएं
आजमगढ़ के खरगीपुर गांव निवासी विश्वविद्यालय कर्मचारी अजय कुमार की पत्नी मंजू देवी ने बताया कि उनकी ननद अन्नू और सिम्मी छठ पूजा के लिए आई हुई हैं। सास लालता देवी ने मंजू को करीब 20 पहले व्रत सौंपा था। उनके दीपक, हर्ष, शिवम तीन बेटे और कृष्णा बेटी है। पति और बच्चों के लिए हर साल व्रत रखती हैं। 10 साल से अपने गांव में छठ पूजा करने जाने का मौका नहीं मिला। बोलीं, आजकल की बहुएं व्रत लेने से बच रही हैं। बच्चों को छठ पूजा त्योहार तो अच्छा लगता है, लेकिन पूजा अर्चना में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते हैं।    
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