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न खाना ये मिड-डे मील, इसमें है धीमा जहर

Wed, 22 Jun 2016 01:34 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Wed, 22 Jun 2016 01:34 AM IST
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The mid-day meal not food , is the slow poison
क‌िरन ब्रांड तेल
प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए तैयार हो रहा ये मिड डे मील तो कतई खाने लायक नहीं है। दो और स्कूलों के मिड-डे मील की सब्जी में इस्तेमाल किए गए तेल और मसालों में केमिकल और सिंथेटिक कलर की पुष्टि हुई है। ये नमूने प्राथमिक विद्यालय बहेड़ी और मिर्जापुर बहेड़ी के हैं। यहां बनाई गई सब्जी के अप्रैल के महीने में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने नमूने लिए थे। प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में इन दोनों नमूनों को अनसेफ यानी सेहत के लिए खतरनाक बताया गया है। इनमें प्रयुक्त तेल बरेली का ही हो सकता है। हाल में आयी तेल की जांच रिपोर्ट में भी शहर से लिए गए चार नमूने सेहत के लिए खतरनाक पाए गए हैं।
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जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मिड डे मील में इस्तेमाल किए गए तेल और मसाले नकली थे और उनको आकर्षक बनाने के लिए सिंथेटिक कलर और एसेंस का इस्तेमाल किया गया था। जो कि दिखने में असली मसाले और तेल जैसे लगे। जिनमें सुडान डाई सेकंड केमिकल बताया गया है। जो कि बच्चों के लिए धीमा जहर है। इससे किडनी, हार्ट और लीवर खराब हो जाता है। सोमवार को आमलपुर जाफराबाद ब्लाक के डपटा श्यामपुर से ली गई आलू टमाटर की सब्जी को जांच रिपोर्ट में अनसेफ बताया गया था। पांच और नमूने परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे, उनकी जांच रिपोर्ट का भी इंतजार है। अब तक तीन रिपोर्ट आईं हैं और ये तीनों स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताई गईं हैं। गांवों के इन प्राथमिक विद्यालयों में प्रधान और प्रधान अध्यापक ने कमीशनखोरी के चक्कर में सस्ते, नकली खाद्य तेल और मसाले मिड डे मील की सब्जी में इस्तेमाल किए थे। जो कि बच्चों के लिए धीमा जहर है। मिड डे मील की सब्जी का अनसेफ होना गंभीर मामला है। इस तरह के मामलों में दोषियों के खिलाफ एक्शन के साथ-साथ जागरूक करने की जरूरत है।
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अगले शिक्षा सत्र से सभी स्कूलों में ब्रांडेड कंपनी के तेल मसाले इस्तेमाल करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इनके लिए एफएसडीए ब्रांड का परीक्षण कराने के लिएपैनल तैयार करेगी। उसी पैनल की रिपोर्ट पर तेल और मसाले इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी। तयशुदा ब्रांड का इस्तेमाल नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी -गौरव दयाल, डीएम
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राज कोल्हू, किरन और बलदेव के तेल नमूने सरकारी जांच में पाए गए अनसेफ
 बरेली में निर्मित तीन और प्रमुख ब्रांड के खाद्य तेल जांच में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक (अनसेफ)  पाए गए हैं। इन तीन ब्रांड के  नमूने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने परीक्षण के लिए मार्च - अप्रैल के महीने में प्रयोगशाला भेजे थे। वहां से इन नमूनों की जांच रिपोर्ट मंगलवार को आ गई है। जिसके आधार पर विक्रेता और निर्माता कंपनी दोनों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
एफएसडीए की टीम ने शहर के सुभाषनगर स्थित मोइन किराना स्टोर के यहां जेएस कंपनी के किरन ब्रांड का खुला और पैक्ड तेल बिकते हुए पाया था। जिनके नमूने लिए और उसे परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। परीक्षण रिपोर्ट में एसिडिटी और रेनसिडिटीअधिक बताई गई है। एसिडिटी की मात्रा का तो उल्लेख नहीं किया है लेकिन रेनसिडिटी 1.94 के स्थान पर 2.43 बताई गई है। जो कि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है। नवाबगंज से लिए गए इसी कंपनी के राज कोल्हू ब्रांड के तेल का नमूना अनसेफ आया है। इसमें भी एसिडीटी और रेनसिडिटी अधिक बताई गई है। चौथा नमूना करगैना में बलदेव ब्रांड के  राइस ब्रान आयल के पैक्ड तेल का नमूना लिया गया था। इसमें भी एसिडिटी अधिक पाई गई और रेनसिडिटी 2.31 मिली है। इससे पहले भी कई और नमूने लिए गए थे जो कि परीक्षण में अनसेफ बताए गए हैं।

 ‘नमूने फेल होने की हमें कोई जानकारी नहीं है। हम उत्पाद रिफाइनरी से खरीदकर अपने ब्रांड में पैकिं गकरके बाजार में बेचते हैं। एफएसडीए से हमें अधिकृत जानकारी नहीं मिली है’। 

-सचिन गुप्ता, अभय गुप्ता, जेएस एंड कंपनी, श्यामगंज

ऐसे करें पहचान
- हाथ साफ  करके तेल की मालिश करें। यदि तेल त्वचा पर रंग छोड़ता है तो इसमें मिलावट है।
- तेल से बने व्यंजन खाने पर यदि एसिडिटी ज्यादा होती है तो इसमें रसायन की मिलावट है।
- तेल में मिलावट होने से इसको गर्म करने के दौरान रसोई में सिर चकराने जैसी स्थिति हो सकती है।
-  मिलावटी तेल के व्यंजन प्रयोग करने से गैस बनने, पेट फू लने की शिकायत आ सकती है।

ये है नुकसान
- तेल में रंगों के प्रयोग से किडनी के साफ्ट टिश्यू डैमेज होने लगते हैं।
- घातक रंगों के प्रयोग से किडनी में पथरी, गांठ बनने की शिकायत होती है।
- रसायन मिला होने से हार्ट और आंत को नुकसान पहुंचता है।
- ऐसा तेल प्रयोग करने से गर्भस्थ शिशु का जीवन संकट में पड़ जाता है।
- मिलावटी तेल के प्रयोग से बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित होता है।
- मिलावटी तेल से आमाशय और किडनी का कैंसर हो सकता है।

अनसेफ में ये है कार्रवाई
लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन निलंबित करने का प्रावधान है। न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मुकदमा दायर होता है। जिसमें पांच लाख का जुर्माना और पांच साल तक की सजा दोनों साथ-साथ हो सकते हैं।
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