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प्रभु यीशु ने लिया जन्म, उल्लास में डूबा शहर
बरेली
Updated Fri, 25 Dec 2015 01:51 AM IST
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बरेली। सर्दी की कंपकंपाती रात में चर्च की ओर जाते कदम में अजीब सी खुशी दिखी। चर्च बाहर झालराें से और सभागार मोमबत्तियों से जगमग है। अंदर सभा हुई, फिर प्रभु की आराधना कर कैरल गाए गए। बच्चों ने मनभावन झांकी पेश की। रात के 12 बजते ही उल्लास दो गुना हो गया। लोगाें ने एक दूसरे को क्रिसमस की बधाई दी। कार्ड बांटे और घर आने का न्यौता दिया, क्याेंकि मदर मैरी के अद्भुत बच्चे प्रभु यीशु ने जन्म ले लिया था।
शहर में क्रिसमस को लेकर खासा उत्साह दिखा। रात बारह बजे के बाद पूरा शहर उल्लास में डूब गया। एकमात्र कैथेड्रल सेंट अल्फोंसस और 12 से अधिक अन्य चर्च में भीड़ बढ़ती जा रही थी। यहां चहल पहल बढ़ गई और गाने बजाने का सिलसिला शुरू हुआ। चर्च पर प्रभु जन्म लेने के बाद बाइबिल से वचन पढ़े गए। सेलीब्रेशन को और बढ़ाने के लिए केक सेरेमनी का भी इंतजाम रहा। यह नजारा किसी एक चर्च में नहीं बल्कि शहर के सभी चर्च पर दिखा। ईसाई समुदाय के अलावा अन्य धर्म से जुड़े लोग भी भव्यता देखने के लिए चर्च में आए। उन्हाेंने मदर मैरी और प्रभु यीशु के सामने मोमबत्ती जलाई और मनोकामना की। बच्चों को गिफ्ट बांटे गए।
- कहीं डॉक्टर ने जमाई महफिल तो कहीं सजाई झांकी
कैंट स्थित फ्री विल बैपटिस्ट चर्च में आईएमए के चिकित्सकों ने क्रिसमस पार्टी का आयोजन किया। उन्हाेंने प्रभु यीशु के जन्मदिन को खास बनाने के लिए संगीत कार्यक्रम रखा और प्रार्थना सभा में शामिल हुए। मैथोडिस्ट चर्च, सेंट माइकल एंड आल एंजिल्स चर्च और सेंट स्टीफं स चर्च में आराधना हुई। सेंट अल्फोंसस कैथेड्रल में क्रिसमस मिलन हुआ। सेंट पॉल चर्च, मिशन कंपाउंड इंग्लिश चर्च, फ्री विल इंटर डिपेंडेंट चर्च, साल्वेशन आर्मी चर्च व अन्य कई चर्चों में उल्लास का माहौल दिखा। चर्च पर झांकी सजाई गई। इसमें यीशू मसीह के जन्म का दृश्य दिखाया गया।
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- बिशप इग्नेशियस डिसुजा ने दिया संदेश
कैंट स्थित कैथेड्रल सेंट अल्फोंसस के बिशप इग्नेशियस डिसुजा ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर संदेश दिया कि यीशु ने चरवाहों में जन्म लिया क्याेंकि चरवाहाें को समाज से बहिष्कृत किया गया था। रात में एक गर्भवती स्त्री को आश्रय न देना सराय के स्वामी के हृदय की कठोरता को दर्शाता है। वह अपने पलंग पर सो रहा है और यीशु ने एक गंदी सी चरनी में जन्म लिया। अपनी अस्वीकृति के चलते सराय का स्वामी उस आनंद से अछूता रहा जो आनंद चरवाहाें ने लिया। वह आनंद स्वर्ग से भी ज्यादा बड़ा था, क्योंकि उन्होंने यीशु को देखा था। बिशप ने लोगाें ने प्रश्न किया कि क्या हमारे जीवन में सराय के स्वामी की तरह ही यह स्वीकार करना होगा कि यीशु के लिए कोई स्थान नहीं या फिर उनको अपने जीवन में बसाना होगा।
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शहर में क्रिसमस को लेकर खासा उत्साह दिखा। रात बारह बजे के बाद पूरा शहर उल्लास में डूब गया। एकमात्र कैथेड्रल सेंट अल्फोंसस और 12 से अधिक अन्य चर्च में भीड़ बढ़ती जा रही थी। यहां चहल पहल बढ़ गई और गाने बजाने का सिलसिला शुरू हुआ। चर्च पर प्रभु जन्म लेने के बाद बाइबिल से वचन पढ़े गए। सेलीब्रेशन को और बढ़ाने के लिए केक सेरेमनी का भी इंतजाम रहा। यह नजारा किसी एक चर्च में नहीं बल्कि शहर के सभी चर्च पर दिखा। ईसाई समुदाय के अलावा अन्य धर्म से जुड़े लोग भी भव्यता देखने के लिए चर्च में आए। उन्हाेंने मदर मैरी और प्रभु यीशु के सामने मोमबत्ती जलाई और मनोकामना की। बच्चों को गिफ्ट बांटे गए।
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- कहीं डॉक्टर ने जमाई महफिल तो कहीं सजाई झांकी
कैंट स्थित फ्री विल बैपटिस्ट चर्च में आईएमए के चिकित्सकों ने क्रिसमस पार्टी का आयोजन किया। उन्हाेंने प्रभु यीशु के जन्मदिन को खास बनाने के लिए संगीत कार्यक्रम रखा और प्रार्थना सभा में शामिल हुए। मैथोडिस्ट चर्च, सेंट माइकल एंड आल एंजिल्स चर्च और सेंट स्टीफं स चर्च में आराधना हुई। सेंट अल्फोंसस कैथेड्रल में क्रिसमस मिलन हुआ। सेंट पॉल चर्च, मिशन कंपाउंड इंग्लिश चर्च, फ्री विल इंटर डिपेंडेंट चर्च, साल्वेशन आर्मी चर्च व अन्य कई चर्चों में उल्लास का माहौल दिखा। चर्च पर झांकी सजाई गई। इसमें यीशू मसीह के जन्म का दृश्य दिखाया गया।
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- बिशप इग्नेशियस डिसुजा ने दिया संदेश
कैंट स्थित कैथेड्रल सेंट अल्फोंसस के बिशप इग्नेशियस डिसुजा ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर संदेश दिया कि यीशु ने चरवाहों में जन्म लिया क्याेंकि चरवाहाें को समाज से बहिष्कृत किया गया था। रात में एक गर्भवती स्त्री को आश्रय न देना सराय के स्वामी के हृदय की कठोरता को दर्शाता है। वह अपने पलंग पर सो रहा है और यीशु ने एक गंदी सी चरनी में जन्म लिया। अपनी अस्वीकृति के चलते सराय का स्वामी उस आनंद से अछूता रहा जो आनंद चरवाहाें ने लिया। वह आनंद स्वर्ग से भी ज्यादा बड़ा था, क्योंकि उन्होंने यीशु को देखा था। बिशप ने लोगाें ने प्रश्न किया कि क्या हमारे जीवन में सराय के स्वामी की तरह ही यह स्वीकार करना होगा कि यीशु के लिए कोई स्थान नहीं या फिर उनको अपने जीवन में बसाना होगा।