{"_id":"67b634a7dd4a8853c80bbfae","slug":"the-figure-of-expenditure-on-rural-development-increased-the-share-reduced-from-70-to-five-percent-bareilly-news-c-4-lko1064-584293-2025-02-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: ग्रामीण विकास पर खर्च का आंकड़ा बढ़ा, हिस्सेदारी 70 से पांच फीसदी पर सिमटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: ग्रामीण विकास पर खर्च का आंकड़ा बढ़ा, हिस्सेदारी 70 से पांच फीसदी पर सिमटी
विज्ञापन
बरेली। प्रदेश सरकार के बजट में प्राथमिकता पर रहने वाला ग्रामीण विकास समय के साथ हाशिये पर चला गया। आंकड़े इसकी गवाही कर रहे हैं। वर्ष 1991 के बजट में ग्रामीण विकास के लिए 52 फीसदी आवंटन हुआ था। वर्ष 1994-95 के बजट में यह आंकड़ा 70 फीसदी तक पहुंच गया था। अब यह हिस्सेदारी महज पांच फीसदी तक सिमट रही है। हालांकि, अब आवंटित होने वाला बजट पहले की तुलना में करीब पांच गुना हो चुका है।
वर्ष 1991-92 और 1994-95 दोनों ही बार बजट पेश होने के समय प्रदेश में सपा की सरकार रही। मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने ही वित्तमंत्री के रूप में बजट पेश किए थे। अमर उजाला में 23 फरवरी 1991 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, आय बढ़ाने के लिए बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया था। 14384.52 करोड़ रुपये के खर्च वाले बजट में से करीब 7,480 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास पर खर्च करने की घोषणा की गई थी। उस समय उत्तराखंड भी यूपी का ही भाग हुआ करता था। ऐसे में पर्वतीय इलाकों को शामिल करते हुए उन्होंने हर जिले में एक आदर्श गांव बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था।
वर्ष 1994-95 में 19,592 करोड़ रुपये के बजट में से ग्रामीण विकास के लिए 70 फीसदी आवंटन किया गया। सघन मिनी डेयरी परियोजना, कृषि योग्य सभी भूमि तक अगले तीन साल में सिंचाई सुविधा पहुंचाने, लघु एवं सीमांत किसानों के लिए मुफ्त बोरिंग योजना के तहत हर साल तीन लाख बोरिंग लगाए जाने, ऊसर बहुल जिलों में समन्वित भूमि सेना और विश्व बैंक की मदद से ऊसर सुधार कार्यक्रम शुरू करने जैसी घोषणाएं की गईं। इस बजट की खूबी सरकार के खर्च को कम करने के लिए पहल भी रही।
विज्ञापन
अब शिक्षा, स्वास्थ्य को प्राथमिकता
बीते तीन दशक के बजट को देखें तो अब ग्रामीण विकास पर बजट आवंटन कम हुआ है। वर्ष 2024-25 में कुल बजट का 5.2 फीसदी यानी 35,993 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास के लिए आवंटित हुए। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा पांच फीसदी रहा था। आंकड़ों में देखें तो एक साल में बजट में 16 फीसदी बढोतरी हुई। इसमें प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को तरजीह दी गई। शिक्षा के लिए 14.6 फीसदी और स्वास्थ्य के लिए 6.2 फीसदी आवंटन किया गया।
बरेली के औद्योगिक विकास की भी हुई बात
वर्ष 1994-95 के बजट ने बरेली को भी प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में होने का अहसास दिलाया था। यहां औद्योगिक विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को मजबूत करने की बात कही गई थी। वित्तमंत्री ने कहा था कि बरेली के अलावा आगरा, फतेहपुर में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में विश्व बैंक की मदद से नई मशीनों की स्थापना की जाएगी। अतुल भारद्वाज
विज्ञापन
वर्ष 1991-92 और 1994-95 दोनों ही बार बजट पेश होने के समय प्रदेश में सपा की सरकार रही। मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने ही वित्तमंत्री के रूप में बजट पेश किए थे। अमर उजाला में 23 फरवरी 1991 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, आय बढ़ाने के लिए बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया था। 14384.52 करोड़ रुपये के खर्च वाले बजट में से करीब 7,480 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास पर खर्च करने की घोषणा की गई थी। उस समय उत्तराखंड भी यूपी का ही भाग हुआ करता था। ऐसे में पर्वतीय इलाकों को शामिल करते हुए उन्होंने हर जिले में एक आदर्श गांव बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था।
विज्ञापन
वर्ष 1994-95 में 19,592 करोड़ रुपये के बजट में से ग्रामीण विकास के लिए 70 फीसदी आवंटन किया गया। सघन मिनी डेयरी परियोजना, कृषि योग्य सभी भूमि तक अगले तीन साल में सिंचाई सुविधा पहुंचाने, लघु एवं सीमांत किसानों के लिए मुफ्त बोरिंग योजना के तहत हर साल तीन लाख बोरिंग लगाए जाने, ऊसर बहुल जिलों में समन्वित भूमि सेना और विश्व बैंक की मदद से ऊसर सुधार कार्यक्रम शुरू करने जैसी घोषणाएं की गईं। इस बजट की खूबी सरकार के खर्च को कम करने के लिए पहल भी रही।
विज्ञापन
अब शिक्षा, स्वास्थ्य को प्राथमिकता
बीते तीन दशक के बजट को देखें तो अब ग्रामीण विकास पर बजट आवंटन कम हुआ है। वर्ष 2024-25 में कुल बजट का 5.2 फीसदी यानी 35,993 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास के लिए आवंटित हुए। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा पांच फीसदी रहा था। आंकड़ों में देखें तो एक साल में बजट में 16 फीसदी बढोतरी हुई। इसमें प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को तरजीह दी गई। शिक्षा के लिए 14.6 फीसदी और स्वास्थ्य के लिए 6.2 फीसदी आवंटन किया गया।
बरेली के औद्योगिक विकास की भी हुई बात
वर्ष 1994-95 के बजट ने बरेली को भी प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में होने का अहसास दिलाया था। यहां औद्योगिक विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को मजबूत करने की बात कही गई थी। वित्तमंत्री ने कहा था कि बरेली के अलावा आगरा, फतेहपुर में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में विश्व बैंक की मदद से नई मशीनों की स्थापना की जाएगी। अतुल भारद्वाज