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व्यक्ति को महान बनाती है परमार्थ की भावना : मृदुल
Fri, 22 Dec 2023 01:58 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Fri, 22 Dec 2023 01:58 AM IST
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बरेली। श्री राधा संकीर्तन मंडल ट्रस्ट की ओर से बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को आचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जहां स्वार्थ समाप्त होता है, वहीं से मानवता आरंभ होती है। मानव योनि में जन्म लेने मात्र से जीव को मानवता की प्राप्ति नहीं होती।
आचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि परमार्थ की भावना ही मनुष्य को महान बनाती है। स्वार्थ की भावना मानव को राक्षसी प्रवृत्ति से भर देती है। कंस ने स्वयं को सब कुछ समझ लिया। उससे बड़ा कोई न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए उसने ब्रज क्षेत्र में पैदा होने वाले बालकों को मारने का आदेश दे दिया। इसके लिए पूतना को भेजा। प्रभु ने पूतना को मोक्ष प्रदान किया। इधर कंस स्वार्थ के वशीभूत होकर राक्षसों की श्रेणी में आ गया और भगवान श्रीकृष्ण ने उसका संहार किया।
आचार्य ने कहा कि हम जीवन में वस्तुओं से प्रेम करते हैं और मनुष्यों का उपयोग करते हैं। ठीक तो यह है कि हम वस्तुओं का उपयोग करें और मनुष्यों से प्रेम करें। हमेशा प्रेम की भाषा बोलिए। इसे बहरे भी सुन सकते हैं और गूंगे भी समझ सकते हैं। प्रभु की माखन चोरी की लीला हमें यही शिक्षा देती है। आखिर में श्री गिरिराज पूजन (छप्पन भोग महोत्सव) मनाया गया। कई झांकियां भी प्रस्तुत की गईं।
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मीडिया प्रभारी रिशुल अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार को श्री रुक्मिणी विवाह महोत्सव मनाया जाएगा। शनिवार को कथा का समय दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक रहेगा। कार्यक्रम में अरविंद कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष हरीश अग्रवाल, महामंत्री अनुज अग्रवाल, संयोजक विकास अग्रवाल, अभिनव अग्रवाल, अश्विन अग्रवाल, मोहित अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
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आचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि परमार्थ की भावना ही मनुष्य को महान बनाती है। स्वार्थ की भावना मानव को राक्षसी प्रवृत्ति से भर देती है। कंस ने स्वयं को सब कुछ समझ लिया। उससे बड़ा कोई न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए उसने ब्रज क्षेत्र में पैदा होने वाले बालकों को मारने का आदेश दे दिया। इसके लिए पूतना को भेजा। प्रभु ने पूतना को मोक्ष प्रदान किया। इधर कंस स्वार्थ के वशीभूत होकर राक्षसों की श्रेणी में आ गया और भगवान श्रीकृष्ण ने उसका संहार किया।
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आचार्य ने कहा कि हम जीवन में वस्तुओं से प्रेम करते हैं और मनुष्यों का उपयोग करते हैं। ठीक तो यह है कि हम वस्तुओं का उपयोग करें और मनुष्यों से प्रेम करें। हमेशा प्रेम की भाषा बोलिए। इसे बहरे भी सुन सकते हैं और गूंगे भी समझ सकते हैं। प्रभु की माखन चोरी की लीला हमें यही शिक्षा देती है। आखिर में श्री गिरिराज पूजन (छप्पन भोग महोत्सव) मनाया गया। कई झांकियां भी प्रस्तुत की गईं।
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मीडिया प्रभारी रिशुल अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार को श्री रुक्मिणी विवाह महोत्सव मनाया जाएगा। शनिवार को कथा का समय दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक रहेगा। कार्यक्रम में अरविंद कुमार अग्रवाल, अध्यक्ष हरीश अग्रवाल, महामंत्री अनुज अग्रवाल, संयोजक विकास अग्रवाल, अभिनव अग्रवाल, अश्विन अग्रवाल, मोहित अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।