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Bareilly News: छलनी सड़कों को मरम्मत का इंतजार
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बरेली। जलनिकासी का सिस्टम फेल होने से शहर की सड़कों का बुरा हाल है। बारिश के दौरान जलभराव होने से कई सड़कें छलनी हो चुकी हैं। यहां चलना मुश्किल हो रहा है। बारिश थमने के बाद भी इनमें से ज्यादातर की मरम्मत का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है।
नगर निगम क्षेत्र में 195 किलोमीटर लंबाई के कुल 213 मार्ग हैं। स्थलीय सर्वेक्षण के दौरान अलग-अलग वार्ड की 50 से अधिक सड़कों पर गड्ढे मिले। नगर निगम के स्थलीय सर्वेक्षण के दौरान सड़कों का करीब 62 किलोमीटर हिस्सा ऐसा सामने आया है जहां गड्ढे ही गड्ढे हैं। कहीं-कहीं तो सड़क ही गायब थी।
नगर निगम के अभियंताओं ने गड्ढे भरने के साथ ही कई स्थानों पर सड़क निर्माण के लिए आकलन किया है। फिलहाल गड्ढा मुक्ति के लिए पैचवर्क कराया जा रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा चुनौती जल निकासी न होने से है। ब्यूरो
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गड्ढामुक्ति का अभियान शुरू हो गया है। जहां जलनिकासी न होने की वजह से बार-बार सड़कें टूट रही हैं, वहां पर जल निकासी के उपायों के लिए भी आकलन करा रहे हैं। प्रयास है कि नवीनीकरण होने के बाद दोबारा सड़क न टूटने पाए। - मनीष अवस्थी, मुख्य अभियंता
पार्षदों की बात
शहर में कई स्थानों पर बार-बार सड़क टूटती है। यह इंजीनियरिंग सिस्टम और प्लानिंग का फेल होना नहीं तो और क्या है? जब हमें पता है कि जल निकासी न होने से डामर रोड टूटेगी तो फिर नाला-नाली बनाए बिना ही वहां क्यों डामर रोड बना रहे हैं। श्यामगंज से आजाद इंटर कॉलेज तक का हिस्सा इसका एक उदाहरण है। -छंगामल मौर्य, वार्ड छह के पार्षद
मेरे क्षेत्र में भी जल निकासी न होने से सड़कें बार बार उखड़ रही हैं। मैंने नगर निगम के निर्माण विभाग में शिकायत की तो मुहर्रम से पहले पैचवर्क कराया गया। बीते दिनों हुई बारिश में पैचवर्क बह गया। जल भराव वाले क्षेत्र में सीसी रोड बनाते तो यह हाल न होता। - हर्ष कुमारी, वार्ड 38 की पार्षद
लोगों की बात
चंदा करके सड़क के गड्ढे भरवाए
दुकानदारों ने चंदा करके चार हजार रुपये जुटाने के बाद सब्जी मंडी के मार्ग के गड्ढे भरवाए। ग- अफसर हुसैन, कुतुबखाना, सब्जीमंडी
बारिश में नहीं दिखते गड्ढे, गिरते हैं लोग
जरा सी बारिश में सड़क पर पानी भर जाता है और गड्ढा दिखाई नहीं पड़ता। लोग गिरते हैं। बारिश थम गई है। ऐसे में अब गड्ढा मुक्ति का काम तेज किया जाए। -शंकर कुमार, मोती बाग
ये है हाल
नगर निगम की टीम नहीं आई तो दुकानदारों ने खुद भरवाए गड्ढे
कुतुबखाना सब्जी मंडी तक नगर निगम की टीम नहीं पहुंच सकी। नतीजा दुकानदारों ने अपने खर्चे पर पुराना मकान गिरने पर निकले मलबे को मंगवाया और गड्ढे भरवाए। दुकानदारों ने बताया कि इसमें तीन से चार हजार रुपये खर्च हुए। व्यापारी अफसर हुसैन ने बताया कि गड्ढों की वजह से ग्राहकों का दुकान तक आना मुश्किल हो गया था।
श्यामगंज पुल से आजाद इंटर काॅलेज तक की सड़क पर लोगों ने मलबा डाला
श्यामगंज पुल से आजाद डेयरी होते हुए आजाद इंटर काॅलेज तक नाला नहीं है। सड़क बनाने वालों ने भी ध्यान नहीं दिया। सड़क पर पानी भरने की वजह से यहां सड़क उखड़ गई। पुराना मलबा डालकर लोगों ने फौरी तौर पर निकलने का इंतजाम किया।
ये सड़कें भी बदहाल
- बेनीपुर चौधरी वार्ड में रेलवे फाटक से बाकरगंज डंपिंग ग्राउंड तक
- नवादा शेखान में गुलाबबाड़ी वाली सड़क
- सिटी श्मशान भूमि से बेनीपुर गोशाला वाली सड़क
- सिटी रेलवे स्टेशन से दूल्हा मियां की मजार तक
- गांधी उद्यान से कैंट रोड पर सीता रसोई के सामने
(यह सड़कें जल निकासी का सिस्टम न होने की वजह से क्षतिग्रस्त हुई हैं, तीन पर पैचवर्क हुआ पर एक महीने भी न चल सका। सिटी रेलवे स्टेशन वाली सड़क लोक निर्माण विभाग की है, अन्य नगर निगम की हैं।)
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नगर निगम क्षेत्र में 195 किलोमीटर लंबाई के कुल 213 मार्ग हैं। स्थलीय सर्वेक्षण के दौरान अलग-अलग वार्ड की 50 से अधिक सड़कों पर गड्ढे मिले। नगर निगम के स्थलीय सर्वेक्षण के दौरान सड़कों का करीब 62 किलोमीटर हिस्सा ऐसा सामने आया है जहां गड्ढे ही गड्ढे हैं। कहीं-कहीं तो सड़क ही गायब थी।
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नगर निगम के अभियंताओं ने गड्ढे भरने के साथ ही कई स्थानों पर सड़क निर्माण के लिए आकलन किया है। फिलहाल गड्ढा मुक्ति के लिए पैचवर्क कराया जा रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा चुनौती जल निकासी न होने से है। ब्यूरो
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गड्ढामुक्ति का अभियान शुरू हो गया है। जहां जलनिकासी न होने की वजह से बार-बार सड़कें टूट रही हैं, वहां पर जल निकासी के उपायों के लिए भी आकलन करा रहे हैं। प्रयास है कि नवीनीकरण होने के बाद दोबारा सड़क न टूटने पाए। - मनीष अवस्थी, मुख्य अभियंता
पार्षदों की बात
शहर में कई स्थानों पर बार-बार सड़क टूटती है। यह इंजीनियरिंग सिस्टम और प्लानिंग का फेल होना नहीं तो और क्या है? जब हमें पता है कि जल निकासी न होने से डामर रोड टूटेगी तो फिर नाला-नाली बनाए बिना ही वहां क्यों डामर रोड बना रहे हैं। श्यामगंज से आजाद इंटर कॉलेज तक का हिस्सा इसका एक उदाहरण है। -छंगामल मौर्य, वार्ड छह के पार्षद
मेरे क्षेत्र में भी जल निकासी न होने से सड़कें बार बार उखड़ रही हैं। मैंने नगर निगम के निर्माण विभाग में शिकायत की तो मुहर्रम से पहले पैचवर्क कराया गया। बीते दिनों हुई बारिश में पैचवर्क बह गया। जल भराव वाले क्षेत्र में सीसी रोड बनाते तो यह हाल न होता। - हर्ष कुमारी, वार्ड 38 की पार्षद
लोगों की बात
चंदा करके सड़क के गड्ढे भरवाए
दुकानदारों ने चंदा करके चार हजार रुपये जुटाने के बाद सब्जी मंडी के मार्ग के गड्ढे भरवाए। ग- अफसर हुसैन, कुतुबखाना, सब्जीमंडी
बारिश में नहीं दिखते गड्ढे, गिरते हैं लोग
जरा सी बारिश में सड़क पर पानी भर जाता है और गड्ढा दिखाई नहीं पड़ता। लोग गिरते हैं। बारिश थम गई है। ऐसे में अब गड्ढा मुक्ति का काम तेज किया जाए। -शंकर कुमार, मोती बाग
ये है हाल
नगर निगम की टीम नहीं आई तो दुकानदारों ने खुद भरवाए गड्ढे
कुतुबखाना सब्जी मंडी तक नगर निगम की टीम नहीं पहुंच सकी। नतीजा दुकानदारों ने अपने खर्चे पर पुराना मकान गिरने पर निकले मलबे को मंगवाया और गड्ढे भरवाए। दुकानदारों ने बताया कि इसमें तीन से चार हजार रुपये खर्च हुए। व्यापारी अफसर हुसैन ने बताया कि गड्ढों की वजह से ग्राहकों का दुकान तक आना मुश्किल हो गया था।
श्यामगंज पुल से आजाद इंटर काॅलेज तक की सड़क पर लोगों ने मलबा डाला
श्यामगंज पुल से आजाद डेयरी होते हुए आजाद इंटर काॅलेज तक नाला नहीं है। सड़क बनाने वालों ने भी ध्यान नहीं दिया। सड़क पर पानी भरने की वजह से यहां सड़क उखड़ गई। पुराना मलबा डालकर लोगों ने फौरी तौर पर निकलने का इंतजाम किया।
ये सड़कें भी बदहाल
- बेनीपुर चौधरी वार्ड में रेलवे फाटक से बाकरगंज डंपिंग ग्राउंड तक
- नवादा शेखान में गुलाबबाड़ी वाली सड़क
- सिटी श्मशान भूमि से बेनीपुर गोशाला वाली सड़क
- सिटी रेलवे स्टेशन से दूल्हा मियां की मजार तक
- गांधी उद्यान से कैंट रोड पर सीता रसोई के सामने
(यह सड़कें जल निकासी का सिस्टम न होने की वजह से क्षतिग्रस्त हुई हैं, तीन पर पैचवर्क हुआ पर एक महीने भी न चल सका। सिटी रेलवे स्टेशन वाली सड़क लोक निर्माण विभाग की है, अन्य नगर निगम की हैं।)