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कुलपति ने लगाया जनता दरबार
बरेली
Updated Sat, 23 Jan 2016 12:57 AM IST
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुलपति ने शुक्रवार को जनता दरबार लगाया। इसमें छात्रों, शिक्षकों के साथ ही कर्मचारी भी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कर्मचारियों ने कुलपति को घेरकर काफी देर तक अपनी समस्याएं बताईं और उनके समाधान के भी तरीके समझाए।
कुलाधिपति के आदेश के बाद कुलपति ने जनता दरबार की शुरुआत की। अब शुक्रवार और मंगलवार को सुबह दस से 12 बजे तक जनता दरबार लगेगा। पहले जनता दरबार में सात-आठ छात्रों ने फॉर्म आदि की समस्या रखी। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रमोशन, एसीपी, लोन आदि की प्रकरण को बताया। हेम गौतम, गुलफाम अली और रंजीत सिंह ने कुलपति से कहा कि कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं हो रहा है। अगर उनकी मांगें नहीं सुनी गईं तो कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी कर्मचारी टाइपिंग का टेस्ट नहीं देगा। विश्वविद्यालय ने पहले बिना टाइपिंग के ही प्रमोशन किया है, इसलिए उसे अब भी बिना टेस्ट के ही करना होगा। कुलपति के निजी सचिव केके शर्मा ने कुलपति ने अपना अधिकार मांगा। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ कागजों में ही निजी सचिव है। उनसे कुलपति के निजी सचिव के काम नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने कई बार राज्यपाल को भी इसकी शिकायत की, लेकिन उनकी समस्या हल नहीं हो रही है। पांच महीने के बाद उनका रिटायरमेंट है। कम से कम अब तो उनका अधिकार दे दिया जाए। सबकी मांगें सुनने के बाद कुलपति ने उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया।
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कुलाधिपति के आदेश के बाद कुलपति ने जनता दरबार की शुरुआत की। अब शुक्रवार और मंगलवार को सुबह दस से 12 बजे तक जनता दरबार लगेगा। पहले जनता दरबार में सात-आठ छात्रों ने फॉर्म आदि की समस्या रखी। इसके बाद कर्मचारियों ने प्रमोशन, एसीपी, लोन आदि की प्रकरण को बताया। हेम गौतम, गुलफाम अली और रंजीत सिंह ने कुलपति से कहा कि कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं हो रहा है। अगर उनकी मांगें नहीं सुनी गईं तो कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी कर्मचारी टाइपिंग का टेस्ट नहीं देगा। विश्वविद्यालय ने पहले बिना टाइपिंग के ही प्रमोशन किया है, इसलिए उसे अब भी बिना टेस्ट के ही करना होगा। कुलपति के निजी सचिव केके शर्मा ने कुलपति ने अपना अधिकार मांगा। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ कागजों में ही निजी सचिव है। उनसे कुलपति के निजी सचिव के काम नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने कई बार राज्यपाल को भी इसकी शिकायत की, लेकिन उनकी समस्या हल नहीं हो रही है। पांच महीने के बाद उनका रिटायरमेंट है। कम से कम अब तो उनका अधिकार दे दिया जाए। सबकी मांगें सुनने के बाद कुलपति ने उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया।
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