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Bareilly News: महिला विश्वकप की ट्रॉफी देश के नाम... जिले में टीम तक नहीं
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बरेली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीतकर पूरे देश का मान बढ़ाया है। दूसरी ओर जिले में बेटियां संसाधनों के अभाव सहित अन्य कारणों के चलते क्रिकेट से किनारा कर रही हैं। स्थिति ये है कि जिले में टीम तक नहीं है।
स्थानीय स्तर पर खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं। शहर के स्पोर्ट्स स्टेडियम में पिच तक नहीं है। कुछ निजी अकादमी में पिच की सुविधा जरूर है, लेकिन उनका शुल्क बहुत ज्यादा है। यह हर परिवार के लिए सुलभ नहीं है। इसके चलते आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी अपने खेल को आगे नहीं बढ़ा पातीं।
कोच और विशेषज्ञ मानते हैं कि पिच की कमी और महंगी सुविधाएं जिले में महिला क्रिकेट के विकास में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी हैं। बातचीत में परिवार का सहयोग न मिलने की बात भी सामने आई। संवाद
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परिवार का सहयोग न मिलने से छोड़ना पड़ा खेल
स्टेडियम में कुछ समय पहले तक प्रशिक्षण लेने के लिए आने वाली लड़की ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिवार का सहयोग न मिलने की वजह से उसे खेल छोड़ना पड़ा। क्रिकेट जैसे खेल में कॅरिअर बनाने में काफी कठिनाइयां आती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से मैं खेल में आगे नहीं बढ़ पाई, उम्मीद है कि महिला विश्वकप जीतने के बाद अब परिवार बेटियों को आगे बढ़ाएंगे।
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विश्वकप जीतने के बाद अब हालात बदलने की उम्मीद
हमने महिला खिलाड़ियों से कभी भी पंजीकरण शुल्क नहीं लिया। अगर परिजन बेटियों का सहयोग करें तो वे और आगे बढ़ सकती हैं। अगले वर्ष बीसीए की ओर से टूर्नामेंट में 25 हजार रुपये की इनामी राशि दी जाएगी। - सीताराम सक्सेना, सचिव, बरेली क्रिकेट एसोसिएशन
जब मैं स्टेडियम में प्रशिक्षण दे रहा था तो मैदान पर कोई बालिका खिलाड़ी नहीं दिखाई देती थी। वर्ष 2023 में 4-5 खिलाड़ी नियमित अभ्यास के लिए आ रही थीं। अब महिला टीम की विश्व कप जीत से भरोसा है कि बेटियों की संख्या बढ़ेगी। - ओपी कोहली, कोच
मेरा मानना है कि अगर परिवार बेटियों का सहयोग देगा तो वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी खेल सकती हैं। इसके लिए बालिकाओं को खुद आगे आना होगा और नियमित अभ्यास करना होगा। - नितेश भारद्वाज, कोच स्पोर्ट्स स्टेडियम
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स्थानीय स्तर पर खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं। शहर के स्पोर्ट्स स्टेडियम में पिच तक नहीं है। कुछ निजी अकादमी में पिच की सुविधा जरूर है, लेकिन उनका शुल्क बहुत ज्यादा है। यह हर परिवार के लिए सुलभ नहीं है। इसके चलते आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ी अपने खेल को आगे नहीं बढ़ा पातीं।
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कोच और विशेषज्ञ मानते हैं कि पिच की कमी और महंगी सुविधाएं जिले में महिला क्रिकेट के विकास में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी हैं। बातचीत में परिवार का सहयोग न मिलने की बात भी सामने आई। संवाद
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परिवार का सहयोग न मिलने से छोड़ना पड़ा खेल
स्टेडियम में कुछ समय पहले तक प्रशिक्षण लेने के लिए आने वाली लड़की ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिवार का सहयोग न मिलने की वजह से उसे खेल छोड़ना पड़ा। क्रिकेट जैसे खेल में कॅरिअर बनाने में काफी कठिनाइयां आती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से मैं खेल में आगे नहीं बढ़ पाई, उम्मीद है कि महिला विश्वकप जीतने के बाद अब परिवार बेटियों को आगे बढ़ाएंगे।
विश्वकप जीतने के बाद अब हालात बदलने की उम्मीद
हमने महिला खिलाड़ियों से कभी भी पंजीकरण शुल्क नहीं लिया। अगर परिजन बेटियों का सहयोग करें तो वे और आगे बढ़ सकती हैं। अगले वर्ष बीसीए की ओर से टूर्नामेंट में 25 हजार रुपये की इनामी राशि दी जाएगी। - सीताराम सक्सेना, सचिव, बरेली क्रिकेट एसोसिएशन
जब मैं स्टेडियम में प्रशिक्षण दे रहा था तो मैदान पर कोई बालिका खिलाड़ी नहीं दिखाई देती थी। वर्ष 2023 में 4-5 खिलाड़ी नियमित अभ्यास के लिए आ रही थीं। अब महिला टीम की विश्व कप जीत से भरोसा है कि बेटियों की संख्या बढ़ेगी। - ओपी कोहली, कोच
मेरा मानना है कि अगर परिवार बेटियों का सहयोग देगा तो वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी खेल सकती हैं। इसके लिए बालिकाओं को खुद आगे आना होगा और नियमित अभ्यास करना होगा। - नितेश भारद्वाज, कोच स्पोर्ट्स स्टेडियम