स्कूलों में पहुंचे गिनती के बच्चे.. बाकी बोले- अभी घर पर ही अच्छे
कोरोना का खौफः 7 महीने बाद खुले स्कूल फिर भी सन्नाटा
विस्तार
माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में दो-चार से लेकर आठ-दस तक ही रही तादाद, कॉन्वेंट स्कूलों में भी नहीं छू पाए 50 का आंकड़ा
मार्च में लॉकडाउन से पहले ही सभी स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए थे। कोरोना के खौफ के साये में सात महीने गुजरने के बाद सोमवार को स्कूल दोबारा खुले हैं। इससे पहले विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से लंबी गाइड लाइन भी जारी की गई है जिसके मुताबिक स्कूलों में उन्हीं बच्चों को प्रवेश मिलेगा जिनके अभिभावक इसके लिए लिखित सहमति देंगे। ज्यादातर अभिभावकों को गाइड लाइन में शामिल यही शर्त सबसे ज्यादा नागवार गुजरी है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार स्कूल तो खोलना चाहती है लेकिन सारा जोखिम उन्हीं के सिर मढ़ने की कोशिश कर रही है। सोमवार को स्कूलों में बच्चों की उंगलियों पर गिनने लायक तादाद ने भी साबित कर दिया कि सरकार और स्कूलों के दावों के बावजूद अभिभावक अपने बच्चों को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते।
इस्लामिया गर्ल्स कॉलेजः फूलों से सजावट करके की स्वागत की तैयारी फिर भी पहुंचीं सिर्फ छह छात्राएं
इस्लामिया गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं के स्वागत के लिए प्रबंधन की ओर से कॉलेज के ग्राउंड में मंच को फूलों से सजाया गया था लेकिन फिर भी पहली पाली में सिर्फ छह छात्राएं ही पहुंची। कॉलेज गेट पर ही उनके हाथों को सैनेटाइज कराने के बाद उन्हें प्रवेश दिया गया। कॉलेज के अंदर पहुंचने के बाद प्रधानाचार्य चमन जहां ने भी उन्हें फूल देकर उनका स्वागत किया और कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए कोविड गाइड लाइन की भी जानकारी दी गई।एफआर इस्लामिया कॉलेजः नौ बजे तक रहा सन्नाटा, लंबे इंतजार के बाद एक-एक कर पहुंचे सिर्फ आठ छात्र
एफआर इस्लामिया इंटर कॉलेज में भी सन्नाटा छाया रहा। बेसब्री से इंतजार किए जाने के बावजूद सुबह नौ बजे तक इस कॉलेज में एक भी छात्र नहीं पहुंचा। नौ बजे के बाद एक-एक कर छात्रों का पहुंचना शुरू हुआ लेकिन आठ छात्रों के पहुंचने के बाद यह तादाद जहां के तहां ठहर गई। सभी छात्रों के हाथों को गेट पर ही सैनिटाइज कराया गया। गेट पर ही उनका तापमान लेकर रजिस्टर में उनके नाम के साथ दर्ज किया गया।राजकीय इंटर कॉलेजः सबसे ज्यादा छात्र संख्या फिर भी तीन ही छात्रों पर विराम, दो पर सहमति भी नहीं
राजकीय इंटर कॉलेज सरकारी और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सबसे ज्यादा छात्र संख्या वाला कॉलेज है लेकिन फिर भी यहां सुबह नौ बजे तक सिर्फ तीन छात्र ही पहुंचे। इनमें भी दो छात्रों के पास उनके अभिभावकों की ओर से दिया गया सहमति पत्र नहीं था लिहाजा उन्हें वापस कर दिया गया। प्रधानाचार्य ने साफ किया कि अभिभावक की लिखित अनुमति के बगैर छात्रों को किसी भी दशा में प्रवेश नहीं मिलेगा।बरेली इंटर कॉलेजः दो छात्रों के अलावा एक अभिभावक भी.. बोले- माहौल देखने आया हूं
बरेली इंटर कॉलेज में सुबह 9:30 मिनट तक सिर्फ दो छात्र ही पहुंचे थे। इसके अलावा अपने बच्चे के साथ एक अभिभावक भी कॉलेज पहुंचे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह सिर्फ स्कूल का माहौल देखने आए हैं। फिलहाल वह ऑनलाइन क्लास से संतुष्ट हैं क्योंकि अभी भी कोरोना का ग्राफ घट नहीं रहा है। वह बच्चे को स्कूल भेजना नहीं चाहते हैं।बिशप इंटर कॉलेजः दस बजे तक इंतजार के बाद पहुंचे दस बच्चे, कई के चेहरों पर नहीं था मास्क
बिशप इंटर कॉलेज भी सुबह तय समय पर खुला लेकिन दस बजे तक इंतजार करना पड़ा तब कहीं कॉलेज में आए छात्रों की संख्या ने दहाई का आंकड़ा छुआ। इनमें कई छात्र चेहरों पर बगैर मास्क लगाए ही पहुंच गए थे। प्रधानाचार्य जगमोहन सिंह ने सभी छात्रों के हाथ सैनिटाइज कराने के साथ जो छात्र बिना मास्क पहुंचे थे, उन्हें सख्त हिदायत देते हुए मास्क उपलब्ध कराया। एक कक्षा में पांच-पांच बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराई गई।सोबती पब्लिक स्कूलः 25 छात्र-छात्राएं पहुंचे, प्रधानाध्यापक ने कहा- ऑनलाइन क्लास भी रखेंगे जारी
सोबती पब्लिक स्कूल में बच्चों की संख्या 25 रही। प्रबंधन ने एक बेंच एक छात्र के नियम के आधार पर बच्चों को बैठाकर पढ़ाई शुरू कराई। इस दौरान स्कूल न आने वाले बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास भी जारी रखी गईं। प्रधानाचार्य गुंजन साहनी ने बताया कि शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी।स्कूल आए विद्यार्थी बोले.. क्लास में सावधानी बरतेंगे
अभिभावकों की अनुमति ले ली है। उन्हें भरोसा दिलाया है कि स्कूल में भी पूरी सावधानी बरतूंगी और कोविड नियमों का पालन करूंगी। इसके बाद उन्होंने स्कूल आने दिया है। इतने दिनों बाद स्कूल आना अलग अनुभव है। -सिमरा, इस्लामिया गर्ल्स कॉलेज
अनुमति पत्र लेकर स्कूल आया हूं। बैग में मास्क और सैनिटाइजर भी साथ लाया हूं। ऑनलाइन क्लास सही चलती है लेकिन कई बातें नहीं पूछ पाता हूं। क्लास में आसानी रहती है, इसलिए भी चला आया। -फैजान खान, एफआर इस्लामिया कॉलेज
अनुमति पत्र पर पिताजी ने हस्ताक्षर कर दिए थे लेकिन आते वक्त अनुमति पत्र घर भूल आया हूं। अब पिता जी को फोन कर बुलाया है। कॉलेज गेट पर खड़ा उन्हीं का इंतजार कर रहा हूं। -आकाश पाल, राजकीय इंटर कॉलेज
बेटे उवैश की मां उसे कॉलेज नहीं भेजना चाहती है। कहती है- मोबाइल पर जैसे पढ़ रहा है इस साल उसी तरह पढ़ने दो। बेटे का मन था इसलिए उसके साथ देखने आया हूं कि कॉलेज में कैसा माहौल है। सब ठीक रहा तभी स्कूल भेजूंगा। -हसीन (बरेली इंटर कॉलेज में बेटे उवैश के साथ)