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Bareilly News: अंदर से सड़ रहा था शरीर, कई अंग फेल होने से हुई मादा भालू की मौत
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बरेली। पीलीभीत की माला कॉलोनी के पास रेस्क्यू कर पिंजरे में कैद की गई मादा भालू की मौत मल्टी ऑर्गन फेल होने से हुई। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया कान के पीछे जख्म होने की वजह से शरीर में सड़न फैलने को मुख्य कारण माना गया है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, बीते दिनों पीलीभीत टाइगर रिजर्व से जख्मी मादा भालू को इलाज कराने के लिए भेजा गया था। गहरे और खुले घाव में सड़न फैल रही थी। घाव करीब माहभर पहले का प्रतीत हुआ। वनक्षेत्र में किसी पशु के हमले में भालू के जख्मी होने की आशंका जताई जा रही थी। जरूरी इलाज और टांके लगाकर उसे वापस भेज दिया गया था। तीन दिन पहले उसकी मौत हो गई तो शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए आईवीआरआई लाया गया। यहां जांच में पता चला कि मल्टी ऑर्गन फेल होने से मादा भालू की मौत हुई। पूर्व में हुए घाव से शरीर में काफी अंदर तक संक्रमण और सड़न भी वजह बनी। विसरा जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आईवीआरआई के वन्य प्राणी विभाग के प्रभारी डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक, वनक्षेत्र में पशुओं की निगरानी आसान नहीं। अगर निगरानी भी की जाए तो उनके टकराव या किसी पशु के हमले को तत्काल रोकना भी मुश्किल है। वहीं, जख्म हुआ या नहीं, इसका पता लगाना कठिन होता है। ब्यूरो
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, बीते दिनों पीलीभीत टाइगर रिजर्व से जख्मी मादा भालू को इलाज कराने के लिए भेजा गया था। गहरे और खुले घाव में सड़न फैल रही थी। घाव करीब माहभर पहले का प्रतीत हुआ। वनक्षेत्र में किसी पशु के हमले में भालू के जख्मी होने की आशंका जताई जा रही थी। जरूरी इलाज और टांके लगाकर उसे वापस भेज दिया गया था। तीन दिन पहले उसकी मौत हो गई तो शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए आईवीआरआई लाया गया। यहां जांच में पता चला कि मल्टी ऑर्गन फेल होने से मादा भालू की मौत हुई। पूर्व में हुए घाव से शरीर में काफी अंदर तक संक्रमण और सड़न भी वजह बनी। विसरा जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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आईवीआरआई के वन्य प्राणी विभाग के प्रभारी डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक, वनक्षेत्र में पशुओं की निगरानी आसान नहीं। अगर निगरानी भी की जाए तो उनके टकराव या किसी पशु के हमले को तत्काल रोकना भी मुश्किल है। वहीं, जख्म हुआ या नहीं, इसका पता लगाना कठिन होता है। ब्यूरो
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