फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The administration closed its eyes on the wireless message...

वायरलेस मेसेज...सोती रही पुलिस, मेमो पर प्रशासन ने मूंद ली आंखें

Tue, 20 Sep 2022 11:54 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 Sep 2022 11:54 PM IST
सार

ये अफसरों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि जो जिंदगी मौत के बीच झूल रही किशोरी के बयान लेेने में उनको चार दिन लग गए।एसडीएम को जानकारी दी गई तब वह अस्पताल बयान लेने दौड़े।पूर्व डीएम ने भी नहीं लिया संज्ञानदुष्कर्म कर अनुसूचित जाति की किशोरी को जलाए जाने का मामला लखनऊ तक पहुंच गया था।

विज्ञापन
The administration closed its eyes on the wireless message...

विस्तार

पीलीभीत। ये अफसरों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि जो जिंदगी मौत के बीच झूल रही किशोरी के बयान लेेने में उनको चार दिन लग गए। अब अफसर उस मेमो को लेकर बहानेबाजी करने में लगे हैं, जो जिला अस्पताल से उनको भेजा गया था। तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक कोई यह बताने को तैयार नहीं कि आखिर वो मेमो गया कहां।
विज्ञापन

माधोटांडा क्षेत्र के गांव की किशोरी को दुष्कर्म के बाद जिंदा जला दिया गया। रविवार रात ढाई बजे उसकी मौत हो गई। घटना सात सितंबर की है। उसी दिन उसे पूरनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया, जहां से शाम 5.45 बजे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल से उसी दिन शाम 6.25 बजे किशोरी के बयान दर्ज कराने के लिए सदर तहसीलदार को मेमो भेजा गया। छानबीन में पता चला कि बाबू ने मेमो रिसीव किया।
विज्ञापन

आठ और नौ को तहसीलदार का लखनऊ जाना था, लेकिन वह सात की शाम को ही निकल गए। तहसील में कोई नायब तहसीलदार है नहीं। लिहाजा मेमो एसडीएम के यहां तत्काल भेजा जाना चाहिए था। लेकिन वहां भी नहीं भेजा गया। बंद लिफाफे में मेमो यूं ही पड़ा रहा। उधर, पीड़िता अस्पताल में तड़प रही थी। हद तो यह है कि दस सितंबर को तहसीलदार के लौटने के बाद भी मेमो का कोई जिक्र नहीं हुआ। शाम को जब अस्पताल में पीड़िता ने दुष्कर्म कर जलाने की बात कही तब एसपी अस्पताल पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन

एसडीएम को जानकारी दी गई तब वह अस्पताल बयान लेने दौड़े। मामला उजागर होने पर अब अधिकारी अपने बचाव में लग गए हैं। तहसीलदार कह रहे हैं कि वह छुट्टी पर थे एसडीएम कह रहे है कि उनके पास मेमो आया नहीं। बताया जा रहा है कि मामला उजागर होने के बाद एक अधिकारी ने मेमो को अपने पास रख लिया है। ताकि उस पर मन मुताबिक समय डालकर या कुछ और लिखकर खुद को बचाया जा सके।
पूर्व डीएम ने भी नहीं लिया संज्ञान
दुष्कर्म कर अनुसूचित जाति की किशोरी को जलाए जाने का मामला लखनऊ तक पहुंच गया था। लेकिन पूर्व डीएम पुलकित खरे ने भी यह जानने का प्रयास नहीं किया कि जब सात सितंबर को ही मेमो भेजा गया था तब बयान लेने में चार दिन क्यों लगे। डीएम महज पुलिस की एफआईआर व आरोपियों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट भेजकर शांत हो गए। या यूं कहिए कि उन्होंने अपने अफसरों को बेहद खामोश तरीके बचा लिया। अब शासन तक मामला पहुंचा तो खलबली मची है।
तत्काल होते बयान तो कुछ और होती तस्वीर
घटना को लेकर गांव में तरह तरह की चर्चा है। वहीं लोगों में खासा आक्रोश है। बताया जा रहा है कि अगर घटना वाले दिन या दूसरे दिन ही किशोरी के बयान हो जाते तो काफी ऐसी चीजें पता चल जाती जो अभी तक प्रकाश में नहीं आई हैं। घटना क्रम के बार में विस्तार से पता चल जाता। लेकिन पूरे चार दिन लगा दिए अफसरों ने।

मामला मेरी जानकारी में नहीं है। एसडीएम व तहसीलदार से बात करके पता लगाया जाएगा कि किसकी वजह से बयानों में देरी हुई। इस मामले की जांच कराई जाएगी।- रामसिंह गौतम, प्रभारी डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed