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भयावह... फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को लगाने पड़े 20 से ज्यादा चक्कर
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बड़ा बाज़ार की हरी मस्जिद वाली संकरी गली, जिसमे फायर की गाडी नहीं जा सकती थी।
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रात में लगी आग 20 घंटे तक धधकती रही, बुझाने में लगीं दर्जन भर से ज्यादा गाड़ियां
तंग गली में पानी पहुंचाने के लिए बनानी पड़ी 300 मीटर लंबी पाइपलाइन
बरेली। टेंट हाउस के गोदाम में फोम के गद्दों और सिंथेटिक कपड़ों के भारी जखीरे की वजह से आग न सिर्फ कुछ ही देर में विकराल हो गई बल्कि उसे बुझाना और मुश्किल साबित हुआ। गोदाम में अंदर पानी डालना मुमकिन न होने की वजह से बृहस्पतिवार की रात को लगी आग शुक्रवार को दोपहर तीन बजे रुक-रुककर धधकती रही। शुक्रवार को दिन में भी दो बार फायर ब्रिगेड को पहुंचकर आग बुझानी पड़ी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बृहस्पतिवार को सूचना दिए जाने के 15 मिनट बाद ही फायर ब्रिगेड बड़ा बाजार पहुंच गई मगर काफी संकरी होने के कारण गली नवाबान में अंदर नहीं घुस पाई। सड़क से पंकज का गोदाम और घर करीब ढाई सौ मीटर दूर है लिहाजा फायर ब्रिगेड को वहां तक पहुंचाने के लिए दस पाइप जोड़कर 300 मीटर लंबी लाइन बिछानी पड़ी। इससे पानी तो घटनास्थल तक पहुंचा लेकिन पाइपलाइन लंबी होने के कारण प्रेशर नहीं बन पा रहा था। इसी कारण आग बुझाने में और ज्यादा समय लगा।
एफएसओ संजीव यादव ने बताया कि बृहस्पतिवार रात बरेली, परसाखेड़ा, बहेड़ी और मीरगंज स्टेशन की दर्जन भर गाड़ियां आग बुझाने के लिए लगाई गई थीं। रात में इन गाड़ियों ने करीब 16 टैंकर पानी पहुंचाया। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे आग बुझाने का काम बंद हुआ मगर सुबह नौ बजे फिर धुआं निकलने की सूचना मिली तो दो गाड़ियों दोबारा भेजी गईं। दोपहर 12 बजे भी दो गाड़ियां भेजी गईं।
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दिवाली की वजह से बंद था बाजार वर्ना जाने क्या होता
नहीं पता चला आग लगने का कारण, जांच जारी
गली नवाबान के बाजार में बेहद भीड़भाड़ रहती है और देर रात तक यह बाजार व्यस्त रहता है। यहां इतनी भीड़ होती है कि लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल होता है। बृहस्पतिवार को दिवाली की वजह से बाजार बंद था और रात में जिस वक्त हादसा हुआ, वहां चहल-पहल नहीं थी। इस वजह से बड़ा हादसा होने से टल गया। प्रारंभिक जांच में आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका। एफएसओ संजीव यादव के मुताबिक पंकज ने उन्हें बताया कि शाम छह बजे उन्होंने गोदाम में दिवाली की पूजा की थी। धूप-अगरबत्ती पूरी तरह बुझने के बाद रात आठ बजे गोदाम से निकले। करीब आधे घंटे बाद ही गोदाम से लपटें निकलनी शुरू हो गईं। शॉर्ट सर्किट से भी आग लगने की आशंका है, हालांकि आग लगने के किसी भी कारण की अभी पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल जांच की जा रही है।
हमेशा खतरे से घिरी रहती हैं ये तंग गलियां
बरेली। बड़ा बाजार का पूरा इलाका तंग गलियों वाला है जहां दमकल की गाड़ियां पहुंचना मुमकिन नहीं है। हादसा होने पर यहां लंबी पाइप लाइन बिछानी पड़ती है लेकिन इसमें ही इतना समय लग जाता है कि आग को विकराल होने से पहले ही रोकना संभव नहीं होता। यही वजह है कि पहले भी यहां कई भीषण अग्निकांड हो चुके हैं। खतरा इसलिए और ज्यादा है क्योंकि कारोबार के साथ यहां घनी रिहायश भी है। बृहस्पतिवार रात को भी सूचना देने के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां 15-20 मिनट में ही बड़ा बाजार पहुंच गईं लेकिन पंकज अरोड़ा के गोदाम तक पानी पहुंचाने में उन्हें आधा घंटा लग गया।
शास्त्री मार्केट : यहां पैदल निकलना भी मुश्किल
घनी आबादी वाले कुतुबखाना इलाके में शास्त्री मार्केट है जो दवाओं की थोक बिक्री का बाजार है। यहां दवा की सैकड़ों दुकानें हैं जो बेहद तंग गलियों में चल रही हैं। छह-सात फुट चौड़ी गलियों के दोनों ओर व्यापारियों और दुकानों के कर्मचारियों की बाइक-स्कूटी खड़ी रहती हैं। इस कारण यहां पैदल निकलना भी मुश्किल होता है। यहां कोई बड़ा हादसा होने की कल्पना ही भयावह है।
कटरा मानराय : तंग गलियों में करोड़ों का कारोबार
शास्त्री मार्केट से कुछ दूर कटरा मानराय में कपड़ों का थोक बाजार है। बड़ी-बड़ी दुकानों में करोड़ों का माल जमा है लेकिन हालात यहां भी जुदा नहीं हैं। गलियां तंग हैं और आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं। दूसरे बाजारों की तरह तंग गलियों में सड़क के दोनों ओर खड़े वाहन रास्ते को और ज्यादा संकरा कर देते हैं। कोई हादसा होने पर यहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंचना बहुत मुश्किल है।
पहले भी कई भीषण अग्निकांड
सितंबर 2020 : बड़ा बाजार की गली नवाबान में हरी मस्जिद के पास पंकज देवल और प्रदीप देवल की दूसरी मंजिल पर स्थित दुकान में आग लग गई थी। जीना काफी पतला था और गाड़ी गली में अंदर तक न पहुंचने के चलते आग बुझाने में काफी दिक्कत हुई।
जनवरी 2019 : कटरा मानराय में प्रमोद टैक्सटाइल क्लॉथ शॉप में रात 11 बजे आग लगी थी। घनी आबादी वाले इलाके में इस घटना के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ी गली संकरी होने के चलते सौ मीटर दूर ही फंस गई।
दिसंबर 2018 : कुतुबखाना स्थित रहमानी मार्केट में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी तो पहुंच गई लेकिन घटनास्थल तक पानी पहुंचाने के लिए दमकल कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
अक्तूबर 2017 : शास्त्री मार्केट की मनिहारन गली में जूतों के शोरूम में भीषण आग लगी थी। आग लगने की सूचना पर पहुंची फायर बिग्रेड तंग रास्तों के चलते अटक गई। बमुश्किल मौके पर पानी पहुंचाया जा सका।
शोक में डूबा बाजार, पूरे दिन नहीं खुली दुकानें
भीषण अग्निकांड में व्यापारी पंकज की पत्नी की मौत से पूरा बाजार शोक में डूब गया। शुक्रवार को अधिकांश व्यापारियों ने दुकानें नहीं खोलीं। कुछेक दुकानें खुलीं तो उन्हें भी बंद कर दिया गया। शुक्रवार को पूरे दिन गली नवाबान का माहौल गमगीन रहा। ज्यादातर व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। इक्का-दुक्का व्यापारियों ने दुकानें खोलीं तो विशाल मेहरोत्रा, गोपेश अग्रवाल, संजीव साहनी, संजय भाटिया, पंकज आदि व्यापारी नेताओं ने अपील कर उन्हें बंद करा दिया।
दवा की दुकान में भी लाखों का नुकसान
पंकज के गोदाम के ऊपर सुरेश शर्मा नगर में रहने वाले आलोक गुप्ता की दवा की थोक दुकान है। बृहस्पतिवार रात आग लगने पर फायर ब्रिगेड ने जब आग बुझाई तो उनकी दुकान में रखी सारी दवाएं भीगकर खराब हो गई। तमाम दवाएं आग की गर्मी से खराब हो गईं। इससे आलोक का भी लाखों का नुकसान हो गया।
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तंग गली में पानी पहुंचाने के लिए बनानी पड़ी 300 मीटर लंबी पाइपलाइन
बरेली। टेंट हाउस के गोदाम में फोम के गद्दों और सिंथेटिक कपड़ों के भारी जखीरे की वजह से आग न सिर्फ कुछ ही देर में विकराल हो गई बल्कि उसे बुझाना और मुश्किल साबित हुआ। गोदाम में अंदर पानी डालना मुमकिन न होने की वजह से बृहस्पतिवार की रात को लगी आग शुक्रवार को दोपहर तीन बजे रुक-रुककर धधकती रही। शुक्रवार को दिन में भी दो बार फायर ब्रिगेड को पहुंचकर आग बुझानी पड़ी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बृहस्पतिवार को सूचना दिए जाने के 15 मिनट बाद ही फायर ब्रिगेड बड़ा बाजार पहुंच गई मगर काफी संकरी होने के कारण गली नवाबान में अंदर नहीं घुस पाई। सड़क से पंकज का गोदाम और घर करीब ढाई सौ मीटर दूर है लिहाजा फायर ब्रिगेड को वहां तक पहुंचाने के लिए दस पाइप जोड़कर 300 मीटर लंबी लाइन बिछानी पड़ी। इससे पानी तो घटनास्थल तक पहुंचा लेकिन पाइपलाइन लंबी होने के कारण प्रेशर नहीं बन पा रहा था। इसी कारण आग बुझाने में और ज्यादा समय लगा।
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एफएसओ संजीव यादव ने बताया कि बृहस्पतिवार रात बरेली, परसाखेड़ा, बहेड़ी और मीरगंज स्टेशन की दर्जन भर गाड़ियां आग बुझाने के लिए लगाई गई थीं। रात में इन गाड़ियों ने करीब 16 टैंकर पानी पहुंचाया। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे आग बुझाने का काम बंद हुआ मगर सुबह नौ बजे फिर धुआं निकलने की सूचना मिली तो दो गाड़ियों दोबारा भेजी गईं। दोपहर 12 बजे भी दो गाड़ियां भेजी गईं।
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दिवाली की वजह से बंद था बाजार वर्ना जाने क्या होता
नहीं पता चला आग लगने का कारण, जांच जारी
गली नवाबान के बाजार में बेहद भीड़भाड़ रहती है और देर रात तक यह बाजार व्यस्त रहता है। यहां इतनी भीड़ होती है कि लोगों का पैदल निकलना भी मुश्किल होता है। बृहस्पतिवार को दिवाली की वजह से बाजार बंद था और रात में जिस वक्त हादसा हुआ, वहां चहल-पहल नहीं थी। इस वजह से बड़ा हादसा होने से टल गया। प्रारंभिक जांच में आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका। एफएसओ संजीव यादव के मुताबिक पंकज ने उन्हें बताया कि शाम छह बजे उन्होंने गोदाम में दिवाली की पूजा की थी। धूप-अगरबत्ती पूरी तरह बुझने के बाद रात आठ बजे गोदाम से निकले। करीब आधे घंटे बाद ही गोदाम से लपटें निकलनी शुरू हो गईं। शॉर्ट सर्किट से भी आग लगने की आशंका है, हालांकि आग लगने के किसी भी कारण की अभी पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल जांच की जा रही है।
हमेशा खतरे से घिरी रहती हैं ये तंग गलियां
बरेली। बड़ा बाजार का पूरा इलाका तंग गलियों वाला है जहां दमकल की गाड़ियां पहुंचना मुमकिन नहीं है। हादसा होने पर यहां लंबी पाइप लाइन बिछानी पड़ती है लेकिन इसमें ही इतना समय लग जाता है कि आग को विकराल होने से पहले ही रोकना संभव नहीं होता। यही वजह है कि पहले भी यहां कई भीषण अग्निकांड हो चुके हैं। खतरा इसलिए और ज्यादा है क्योंकि कारोबार के साथ यहां घनी रिहायश भी है। बृहस्पतिवार रात को भी सूचना देने के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां 15-20 मिनट में ही बड़ा बाजार पहुंच गईं लेकिन पंकज अरोड़ा के गोदाम तक पानी पहुंचाने में उन्हें आधा घंटा लग गया।
शास्त्री मार्केट : यहां पैदल निकलना भी मुश्किल
घनी आबादी वाले कुतुबखाना इलाके में शास्त्री मार्केट है जो दवाओं की थोक बिक्री का बाजार है। यहां दवा की सैकड़ों दुकानें हैं जो बेहद तंग गलियों में चल रही हैं। छह-सात फुट चौड़ी गलियों के दोनों ओर व्यापारियों और दुकानों के कर्मचारियों की बाइक-स्कूटी खड़ी रहती हैं। इस कारण यहां पैदल निकलना भी मुश्किल होता है। यहां कोई बड़ा हादसा होने की कल्पना ही भयावह है।
कटरा मानराय : तंग गलियों में करोड़ों का कारोबार
शास्त्री मार्केट से कुछ दूर कटरा मानराय में कपड़ों का थोक बाजार है। बड़ी-बड़ी दुकानों में करोड़ों का माल जमा है लेकिन हालात यहां भी जुदा नहीं हैं। गलियां तंग हैं और आग बुझाने के कोई इंतजाम नहीं। दूसरे बाजारों की तरह तंग गलियों में सड़क के दोनों ओर खड़े वाहन रास्ते को और ज्यादा संकरा कर देते हैं। कोई हादसा होने पर यहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का पहुंचना बहुत मुश्किल है।
पहले भी कई भीषण अग्निकांड
सितंबर 2020 : बड़ा बाजार की गली नवाबान में हरी मस्जिद के पास पंकज देवल और प्रदीप देवल की दूसरी मंजिल पर स्थित दुकान में आग लग गई थी। जीना काफी पतला था और गाड़ी गली में अंदर तक न पहुंचने के चलते आग बुझाने में काफी दिक्कत हुई।
जनवरी 2019 : कटरा मानराय में प्रमोद टैक्सटाइल क्लॉथ शॉप में रात 11 बजे आग लगी थी। घनी आबादी वाले इलाके में इस घटना के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ी गली संकरी होने के चलते सौ मीटर दूर ही फंस गई।
दिसंबर 2018 : कुतुबखाना स्थित रहमानी मार्केट में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी तो पहुंच गई लेकिन घटनास्थल तक पानी पहुंचाने के लिए दमकल कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
अक्तूबर 2017 : शास्त्री मार्केट की मनिहारन गली में जूतों के शोरूम में भीषण आग लगी थी। आग लगने की सूचना पर पहुंची फायर बिग्रेड तंग रास्तों के चलते अटक गई। बमुश्किल मौके पर पानी पहुंचाया जा सका।
शोक में डूबा बाजार, पूरे दिन नहीं खुली दुकानें
भीषण अग्निकांड में व्यापारी पंकज की पत्नी की मौत से पूरा बाजार शोक में डूब गया। शुक्रवार को अधिकांश व्यापारियों ने दुकानें नहीं खोलीं। कुछेक दुकानें खुलीं तो उन्हें भी बंद कर दिया गया। शुक्रवार को पूरे दिन गली नवाबान का माहौल गमगीन रहा। ज्यादातर व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। इक्का-दुक्का व्यापारियों ने दुकानें खोलीं तो विशाल मेहरोत्रा, गोपेश अग्रवाल, संजीव साहनी, संजय भाटिया, पंकज आदि व्यापारी नेताओं ने अपील कर उन्हें बंद करा दिया।
दवा की दुकान में भी लाखों का नुकसान
पंकज के गोदाम के ऊपर सुरेश शर्मा नगर में रहने वाले आलोक गुप्ता की दवा की थोक दुकान है। बृहस्पतिवार रात आग लगने पर फायर ब्रिगेड ने जब आग बुझाई तो उनकी दुकान में रखी सारी दवाएं भीगकर खराब हो गई। तमाम दवाएं आग की गर्मी से खराब हो गईं। इससे आलोक का भी लाखों का नुकसान हो गया।