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ये कहानियां फिल्मी नहीं हैं: शोहदों के सब्जबाग की शिकार हो रहीं किशोरियां, पहचान बदलकर किया जाता है ब्रेनवॉश

Mon, 05 Jun 2023 08:17 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 05 Jun 2023 08:17 AM IST
सार

कई किशोरियां अपराधियों के झांसे में आकर अपराध के दल-दल में फंस रही हैं। ज्यादातर मामलों ने आरोपी ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर किशोरियों को शिकार बनाया। बाल कल्याण समिति में इस तरह की कई घटनाएं सामने आई हैं। पढ़िए एक रिपोर्ट।

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Teenage girls are brainwashed by changing identities then pushed into quagmire of crime
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आपने ऐसी कई फिल्में और वेबसीरीज देखी होंगी, जिनमें कोई शख्स नाम और पहचान बदलकर किसी युवती या किशोरी से नजदीकी बढ़ाता है। झांसे में लेकर उसका शोषण करता है। फिर कुछ कोई अपराध करने के लिए उकसाता है। रील लाइफ (फिल्म) में जब आप ये सीन देखते हैं तो सही सोचते होंगे कि युवती की ये कैसी मूर्खता है? 
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कोई किसी की बातों में कैसे आ सकता है? और आसानी से उसे ही दोषी ठहरा देते होंगे। ...लेकिन यह सब यदि रियल लाइफ (वास्तविक जीवन) में किसी की बहन-बेटी के साथ हो तो पैरों के नीचे से जमीन खिसकने जैसा है। शहर में भी किशोरियों का ब्रेनवॉश करके उनके साथ अपराध करने का चलन बढ़ा है। 
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कई किशोरियां अपराधियों के झांसे में आकर अपराध के दल-दल में फंस रही हैं। ज्यादातर मामलों ने आरोपी ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर किशोरियों को शिकार बनाया। बाल कल्याण समिति में इस तरह की कई घटनाएं सामने आई हैं। पढ़िए एक रिपोर्ट।
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केस - 1
15 साल की एक किशोरी से उसकी कोचिंग के पास रहने वाले 25 साल के आरुष ने मदद के बहाने बातचीत शुरू की। बातचीत का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब कोचिंग के बाहर किशोरी को एक अनजान युवक ने छेड़ा और आरुष किशोरी की मदद के लिए आगे आया। धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती से बढ़कर प्यार में तब्दील हो गई। करीब छह महीने बाद किशोरी को इस बात का पता चला कि आरुष का वास्तविक नाम अरफान है। किशोरी ने सच छिपाने का विरोध किया। आगे रिश्ते में रहने से इन्कार किया तो अरफान और उसके दोस्तों ने किशोरी के स्कूल, कोचिंग और घर के आस-पास यह बात फैला दी कि किशोरी अरफान के साथ लंबे समय से रिश्ते में है। किशोरी के परिजनों ने पुलिस में शिकायत की तो मामला बाल कल्याण समिति तक पहुंचा। समाज में बात फैलने की वजह से परिजन घर बदलने के लिए मजबूर हैं।

केस- 2
16 साल की एक किशोरी का भी इसी तरह का मामला सामने आया है। करीब डेढ़ साल पहले समीर नाम के 34 साल के युवक ने उसे कोचिंग पढ़ाना शुरू किया। समीर किशोरी के कक्षा के अन्य छात्र के जरिये बतौर ट्यूशन टीचर किशोरी के संपर्क में आया। पढ़ाई के दौरान ही समीर ने किशोरी ने दोस्ती रखनी शुरू कर दी। दोस्ती के बहाने ही उसे देश-दुनिया की बातें बताना, करियर के विकल्प बताना, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने समेत ऐसी कई चीजें कीं कि किशोरी के मन में यह बात बैठ गई कि समीर एक अच्छा व्यक्ति है। इसी बीच नजदीकियां बढ़ाईं और शारीरिक संबंध बनाए। उसे यह धमकी दी कि किसी को बताने पर उसका समाज में तमाशा बन जाएगा। कुछ दिनों बाद समीर ने उससे खुद ही बात करना बंद कर दिया। तनाव के चलते किशोरी को कई शारीरिक दिक्कतों ने घेर लिया। परिजनों को मनोविज्ञानी से काउंसलिंग के दौरान मामले का पता चला।

केस - 3
सुभाषनगर की 18 साल की युवती को स्कूल के ही एक शिक्षक ने कोचिंग पढ़ने के बहाने घर पर बुलाकर आदिल नाम के एक व्यक्ति से उसकी दोस्ती कराई। धीरे-धीरे उसके मन में आदिल की साफ-सुथरी छवि गढ़ी। साथ कोटा जाकर तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। किशोरी के परिजनों ने तैयारी के लिए कोटा भेजने से मना कर दिया तो किशोरी ने इसकी जानकारी आदिल को दी। आदिल ने पढ़ाई और करियर के नाम पर छात्रा को बिना परिजनों को बताए बाहर चलने के लिए उकसाया। घर से पैसे भी साथ लाने के लिए कहा। दिमाग में यह बात भर दी कि भविष्य बनाना है तो कुछ लड़ाइयां तो लड़नी ही होंगी। कोटा ले जाने के नाम पर किशोरी को दिल्ली की ट्रेन में ले गया। वहां किसी रिश्तेदार के घर ठहराकर उसके साथ संबंध बनाए। उसका सारा पैसा ले लिया और बस स्टैंड पर बैठाकर चला गया। किशोरी ने परिजनों को फोन करके घटना की जानकारी दी।

ताकि शिकार न हों जाएं आपकी बेटियां
बच्चों से संवाद बढ़ाएं। दिनचर्या पर बात करें। गुस्से पर नियंत्रण रखें। बच्चे को भी समझें। शांत मन से बात करें। उसकी सुनें अपनी कहें। बच्चों के मामले में बाहरी को बोलने का हक न दें। बाहरी व्यक्ति के सामने बच्चे के दोष न गिनाएं।

हर महीने इस तरह के आठ से दस मामले सामने आ रहे हैं। पहले इस तरह के मामलों में शामिल किशोरियां कम पढ़ी लिखी होती थीं। पिछले तीन से चार महीने में पढ़ी लिखी छात्राओं के इस तरह के मामलों में फंसने के केस आए हैं। मोबाइल फोन के बढ़ते चलन ने स्थितियाें को और बिगाड़ा है। इसकी वजह यह है कि अभिभावक समाज में आ रहे बदलाव को समझ नहीं रहे हैं। आज देखते-देखते बच्चा कब परिवार से दूर हो जाता है अभिभावकों को इसका पता ही नहीं चलता।- डॉ राखी चौहान सदस्य, बाल कल्याण समिति
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