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Bareilly News: टीईटी की बाध्यता के खिलाफ शिक्षकों ने निकाला मशाल जुलूस
Tue, 14 Apr 2026 02:53 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 14 Apr 2026 02:53 AM IST
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बरेली। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले जिले के समस्त शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की बाध्यता के विरोध में सोमवार को मशाल जुलूस निकाला।
बिशप मंडल इंटर कॉलेज से सेठ दामोदर स्वरूप पार्क तक निकाले गए मशाल जुलूस के दौरान शिक्षकों ने सरकार की नीतियों के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए तर्क दिया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत टीईटी की व्यवस्था 23 अगस्त 2010 के बाद प्रभावी हुई है। ऐसे में जो शिक्षक इस तिथि से काफी पहले से सेवा में हैं, उन पर इसे जबरन थोपना न्यायसंगत नहीं है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विभिन्न वक्ताओं ने बारी-बारी से शिक्षकों की समस्याओं और विसंगतियों को रखा। नरेश गंगवार ने कहा कि किसी भी नियुक्ति के नियम प्रक्रिया शुरू होने से पहले तय होते हैं, लेकिन यहां बीच में नए नियम लागू कर अनुभवी शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। भानु प्रताप सिंह, विनोद शर्मा, मानवेंद्र यादव, तेजपाल मौर्य, बलवीर सिंह, चित्र सेन, हरीश, डॉ. योगेश शर्मा, मुनीश कुमार गंगवार, संजीव मल्होत्रा, दीपाली सक्सेना, सतेंद्र पाल सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर शिक्षक संघ, यूटा, महिला शिक्षक संघ, टीएससीटी, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ, एससी-एसटी शिक्षक संघ, बेसिक शिक्षक एसोसिएशन, शिक्षामित्र संघ और उर्दू शिक्षक संघ सहित तमाम संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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बिशप मंडल इंटर कॉलेज से सेठ दामोदर स्वरूप पार्क तक निकाले गए मशाल जुलूस के दौरान शिक्षकों ने सरकार की नीतियों के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए तर्क दिया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत टीईटी की व्यवस्था 23 अगस्त 2010 के बाद प्रभावी हुई है। ऐसे में जो शिक्षक इस तिथि से काफी पहले से सेवा में हैं, उन पर इसे जबरन थोपना न्यायसंगत नहीं है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विभिन्न वक्ताओं ने बारी-बारी से शिक्षकों की समस्याओं और विसंगतियों को रखा। नरेश गंगवार ने कहा कि किसी भी नियुक्ति के नियम प्रक्रिया शुरू होने से पहले तय होते हैं, लेकिन यहां बीच में नए नियम लागू कर अनुभवी शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। भानु प्रताप सिंह, विनोद शर्मा, मानवेंद्र यादव, तेजपाल मौर्य, बलवीर सिंह, चित्र सेन, हरीश, डॉ. योगेश शर्मा, मुनीश कुमार गंगवार, संजीव मल्होत्रा, दीपाली सक्सेना, सतेंद्र पाल सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर शिक्षक संघ, यूटा, महिला शिक्षक संघ, टीएससीटी, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ, एससी-एसटी शिक्षक संघ, बेसिक शिक्षक एसोसिएशन, शिक्षामित्र संघ और उर्दू शिक्षक संघ सहित तमाम संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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