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बिजली बिल के साथ जुड़ जाएगा निगम का टैक्स
बरेली।
Updated Sun, 01 Oct 2017 12:59 AM IST
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पिछले चार राउंड से स्मार्ट सिटी की सूची से बाहर हो रहे बरेली के लिए राजस्व की कमी सबसे बड़ी पीड़ा साबित हुई है। कर वसूली में फिसड्डी नगर निगम को अच्छा प्रस्ताव होने के बावजूद भी इस सूची में कोई जगह नहीं मिल पाई थी। अब स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव में राजस्व बढ़ाने के लिए निगम ने नया दांव चला है। कंसलटेंट एजेंसी दारा शॉ ने जो प्लान बनाया है उसमें एक- एक घर को जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। सभी घरों की एक आईडी बनाई जाएगी जिसमें बिजली बिल के साथ निगम के टैक्स को जोड़ा जाएगा। आईडी से बिजली बिल जमा करने वाले लोग नगर निगम का टैक्स जमा न करने पर पकड़े जाएंगे। टैक्स न देने पर इनकी सेवाएं भी काटी जा सकती हैं।
- इस तरह से काम करेगी आईडी
आईडी में बिजली कनेक्शन नंबर के साथ निगम द्वारा दिए गया रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित होगा। निगम प्रशासन इस आईडी नंबर से पता करेगा कि ग्राहक ने बिजली बिल जमा किया है कि नहीं, अगर बिजली बिल जमा हुआ और गृह, जल और सीवर टैक्स नहीं जमा हुआ तो उपभोक्ता पर सख्ती होगी।
- टैक्स का हाल
आबादी: 10 लाख
कर के दायरे में: 1 लाख 45 हजार
करदाता: 45 लाख
पिछले साल जमा हुआ टैक्स
वर्ष 2014-15: 18 करोड़
वर्ष 2015-16: 22 करोड़
राजस्व की कमी भी स्मार्ट सिटी में चयन न हो पाने की एक बड़ी वजह बनी है। इस बार कई नए प्रस्ताव एजेंसी ने रखे हैं ताकि राजस्व वसूली बढ़े। बिजली बिल को निगम टैक्स से जोड़ने पर काफी लोग सामने आएंगे क्याेंकि अधिकतर लोग बिजली बिल जमा करते हैं और निगम का नहीं।
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आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
- इस तरह से काम करेगी आईडी
आईडी में बिजली कनेक्शन नंबर के साथ निगम द्वारा दिए गया रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित होगा। निगम प्रशासन इस आईडी नंबर से पता करेगा कि ग्राहक ने बिजली बिल जमा किया है कि नहीं, अगर बिजली बिल जमा हुआ और गृह, जल और सीवर टैक्स नहीं जमा हुआ तो उपभोक्ता पर सख्ती होगी।
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- टैक्स का हाल
आबादी: 10 लाख
कर के दायरे में: 1 लाख 45 हजार
करदाता: 45 लाख
पिछले साल जमा हुआ टैक्स
वर्ष 2014-15: 18 करोड़
वर्ष 2015-16: 22 करोड़
राजस्व की कमी भी स्मार्ट सिटी में चयन न हो पाने की एक बड़ी वजह बनी है। इस बार कई नए प्रस्ताव एजेंसी ने रखे हैं ताकि राजस्व वसूली बढ़े। बिजली बिल को निगम टैक्स से जोड़ने पर काफी लोग सामने आएंगे क्याेंकि अधिकतर लोग बिजली बिल जमा करते हैं और निगम का नहीं।
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आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त