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सरकारी निर्माण संस्थाओं में टैक्स चोरी
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Mon, 28 Mar 2016 01:19 AM IST
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कई सरकारी निर्माण संस्थाएं वाणिज्य कर चोरी करने में सबसे आगे हैं। इससे हर वर्ष करोड़ों रुपये राजस्व की हेराफेरी हो रही है। इसका फायदा ठेकेदार ले रहे हैं। मामला संज्ञान में आते ही वाणिज्य विभाग सक्रिय हो गया है और छानबीन शुरू कर दी है।
सरकारी और निजी क्षेत्र में ठेकेदारों से निर्माण कार्य कराने पर चार प्रतिशत वाणिज्य कर देय होता है। निर्माण लागत से चार प्रतिशत कटौती करने की जिम्मेदारी संबंधित कार्यदायी संस्था की होती है। लेकिन तमाम कार्यदायी संस्थाएं ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए टैक्स कटौती नहीं करती हैं। वाणिज्य टैक्स चोरी के मामले उजागर होने लगे हैं।
जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) ने पिछले दिनों 59 अल्पसंख्यक बाहुल्य बस्ती में निर्माण कार्य कराए। इन पर 12 करोड़ से ज्यादा खर्च हुए। विभाग ने अपने पांच चहेते गैर लाइसेंसी ठेकेदार को काम दिया। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वाणिज्य कर काटे बगैर ठेकेदारों को भुगतान कर दिया। इसकी शिकायत राजेंद्र नगर निवासी सुशील नगर ने की तो वाणिज्य कर विभाग में हड़कंप मच गया। शिकायती पत्र में कहा गया है कि इससे करीब 50 लाख रुपये वाणिज्य कर विभाग को चपत लगी है।
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निर्माण कार्य कराने वाली संस्थाओं में हो रही वाणिज्य कर चोरी सामने आते ही विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए छानबीन शुरू करा दी है।
‘निर्माण लागत के अनुसार चार प्रतिशत टैक्स कटौती ठेकेदार के भुगतान से करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्थाओं की है। डूडा आदि में हुई गड़बड़ी की शिकायत मिली है। मामले की जांच करायी जा रही है।’
- सीके पटेल, जोनल एडिशनल कमिश्नर
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सरकारी और निजी क्षेत्र में ठेकेदारों से निर्माण कार्य कराने पर चार प्रतिशत वाणिज्य कर देय होता है। निर्माण लागत से चार प्रतिशत कटौती करने की जिम्मेदारी संबंधित कार्यदायी संस्था की होती है। लेकिन तमाम कार्यदायी संस्थाएं ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए टैक्स कटौती नहीं करती हैं। वाणिज्य टैक्स चोरी के मामले उजागर होने लगे हैं।
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जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) ने पिछले दिनों 59 अल्पसंख्यक बाहुल्य बस्ती में निर्माण कार्य कराए। इन पर 12 करोड़ से ज्यादा खर्च हुए। विभाग ने अपने पांच चहेते गैर लाइसेंसी ठेकेदार को काम दिया। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद वाणिज्य कर काटे बगैर ठेकेदारों को भुगतान कर दिया। इसकी शिकायत राजेंद्र नगर निवासी सुशील नगर ने की तो वाणिज्य कर विभाग में हड़कंप मच गया। शिकायती पत्र में कहा गया है कि इससे करीब 50 लाख रुपये वाणिज्य कर विभाग को चपत लगी है।
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निर्माण कार्य कराने वाली संस्थाओं में हो रही वाणिज्य कर चोरी सामने आते ही विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए छानबीन शुरू करा दी है।
‘निर्माण लागत के अनुसार चार प्रतिशत टैक्स कटौती ठेकेदार के भुगतान से करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्थाओं की है। डूडा आदि में हुई गड़बड़ी की शिकायत मिली है। मामले की जांच करायी जा रही है।’
- सीके पटेल, जोनल एडिशनल कमिश्नर