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तौकीर अपनी बात पर कायम, दरगाह ने कहा- तौबा कर ली
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Thu, 19 May 2016 01:20 AM IST
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नबीर-ए-आला हजरत व आईएमसी मुखिया मौलाना तौकीर रजा खां के देवबंद जाने पर बरेलवी मसलक के मुफ्तियों के पैनल ने बुधवार को हुक्म-ए-शरई का फैसला जारी कर दिया। इसमें उनके देवबंद जाने को हराम करार देते हुए उन्हें तौबा करने का हुक्म दिया गया है। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां उर्फ सुब्हानी मियां की ओर से शाम को जारी प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि मौलाना तौकीर ने मुफ्तियों की मौजूदगी में उनके हुक्म को कुबूल करते हुए तौबा कर ली है। हालांकि इसके बाद मौलाना तौकीर ने अमर उजाला से कहा कि तौबा तो इंसान पर हर वक्त लाजिम है। देवबंद जाने के पीछे नेक मकसद था। देश की भलाई और नौजवानों को आतंकवाद के झूठे इल्जाम से बचाने के लिए उन्हें भविष्य में भी कहीं जाना पड़ा तो जाएंगे।
आला हजरत दरगाह के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां और सज्जादानशीन मौलाना मोहम्मद अहसन रजा खां कादरी की ओर से गठित मुफ्तियों के सात सदस्यीय पैनल ने मौलाना तौकीर के देवबंद जाने के मामले में देर शाम अपना फैसला जारी किया। कुरान और हदीस की रोशनी में दिए गए इस फैसले को सुब्हानी मियां के हवाले से उनके भाई नबीरे आला हजरत मौलाना तौसीफ रजा खां ने मुफ्तियों और मौलाना तौकीर की मौजूदगी में पढ़कर सुनाया। फैसले में मौलाना तौकीर को मरकज अहले सुन्नत और जमाते अहले सुन्नत के जिम्मेदार उलमा, मशाइख और मुफ्तियों के मशवरे और इजाजत के बगैर दारुल उलूम देवबंद जाने, वहां देवबंदी मौलवियों से बातचीत करने और उनके साथ बैठने का जिम्मेदार बताया गया।
सुब्हानी मियां की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि फैसला सुनाए जाने के बाद मौलाना तौकीर ने सभी की मौजूदगी में इस हुक्मे शरई को कुबूल और तसलीम करते हुए अपने कौल व फेल से तौबा करते हुए कहा कि वह कल भी आला हजरत के मसलक में थे, आज भी हैं और जिंदगी भर रहेंगे। प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि जिस दिन मुफ्तियों के पैनल ने मौलाना तौकीर का बयान लिया था उस दिन भी उन्होंने सारे लोगों की मौजूदगी में अपने अगले पिछले गुनाहों, गैर शरई कामों, जाने अनजाने कथनी-करनी से तौबा की थी। साथ ही उन्होंने मुफ्तियों को यह यकीन भी दिलाया था कि वह आइंदा मरकज अहले सुन्नत और जिम्मेदारों के मशवरे के बगैर कोई भी ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे मसलक, मजहब और मरकज के वकार पर आंच आए और जो फतवे की जद में आता हो।
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उधर, मुफ्तियों के फैसला सुनाए जाने के बाद भी मौलाना तौकीर अपनी बात पर कायम दिखे। अमर उजाला से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इंसान पर तौबा हर वक्त लाजिम है। वह भी हर वक्त तौबा करते हैं कि अल्लाह उनके गुनाहों जो जाने अनजाने में हुए हों, उन्हें माफ फरमाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह देश से प्रेम करते हैं इसलिए लोकतंत्र की हिफाजत और नौजवानों को आतंकवाद और उसके झूठे इल्जाम से बचाने के लिए उन्हें कहीं भी जाना पडे़गा तो वह जाएंगे। बात सिर्फ देवबंद की ही नहीं है। देवबंद जाने का मकसद नेक था। कौम और राष्ट्र की भलाई सोच कर गया था। मसलकी इत्तेहाद के लिए नहीं गया था और न वह हो सकता है।
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पैनल का जारी फतवा
बरेली। मौलाना तौकीर रजा खां के मामले में मुफ्तियों ने अपने फतवे में कहा है कि अखबारी बयानों, तस्वीरों, सोशल मीडिया की खबरों और पैनल के सामने दिए गए जैद (मौलाना तौकीर) के बयान से यह साफ हो गया है कि वह दारुल उलूम देवबंद गए, वहां के मौलवियों के साथ बैठे, उनके साथ गुफ्तगू की जो कि हराम और अशद (ज्यादा) हराम है। लिहाजा जैद अपने इस गैर शरई काम से तौबा व रुजू करें।
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तौकीर मियां से दरगाह ने खुद को किया अलग
बरेली। मौलाना तौकीर रजा खां के खिलाफ मुफ्तियों का फैसला सुनाए जाने के साथ दरगाह आला हजरत ने यह भी साफ कर दिया है कि मसलक के मुखालिफ उनकी किसी भी कथनी या करनी को मरकज से न जोड़ा जाए। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां व उनके बेटे सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां ने एक अन्य प्रेस नोट में हुए कहा है कि मौलाना तौकीर एक सियासी आदमी हैं और आए दिन विभिन्न सियासी कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं। इसमें कुछ कार्यक्रम ऐसे होते हैं कि जिनकी मजहबो मसलक इजाजत नहीं देता। मरकजे अहले सुन्नत, खानदाने आला हजरत और दरगाह आला हजरत की जिम्मेदार शख्सियतों की तरफ से उन्हें इन कार्यक्रमों में शिरकत करने की इजाजत भी नहीं होती और न कोई इसे पसंद करता है। लिहाजा मौलाना तौकीर हों या उन सहित खानदान का कोई भी शख्स, किसी भी फर्द के गैर शरई और मसलक मुखालिफ सरगर्मियों को मरकजे अहले सुन्नत से न जोड़ा जाए, न ही इसे मरकज की आवाज समझा जाए। न इसे सनद व सुबूत बनाया जाए और न इसे मरकज के खाते में डाला जाए। यह भी साफ किया है कि मौलाना तौकीर के देवबंद जाने से भी उन दोनों लोगों का कोई लेनादेना नहीं है।
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आला हजरत दरगाह के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां और सज्जादानशीन मौलाना मोहम्मद अहसन रजा खां कादरी की ओर से गठित मुफ्तियों के सात सदस्यीय पैनल ने मौलाना तौकीर के देवबंद जाने के मामले में देर शाम अपना फैसला जारी किया। कुरान और हदीस की रोशनी में दिए गए इस फैसले को सुब्हानी मियां के हवाले से उनके भाई नबीरे आला हजरत मौलाना तौसीफ रजा खां ने मुफ्तियों और मौलाना तौकीर की मौजूदगी में पढ़कर सुनाया। फैसले में मौलाना तौकीर को मरकज अहले सुन्नत और जमाते अहले सुन्नत के जिम्मेदार उलमा, मशाइख और मुफ्तियों के मशवरे और इजाजत के बगैर दारुल उलूम देवबंद जाने, वहां देवबंदी मौलवियों से बातचीत करने और उनके साथ बैठने का जिम्मेदार बताया गया।
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सुब्हानी मियां की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि फैसला सुनाए जाने के बाद मौलाना तौकीर ने सभी की मौजूदगी में इस हुक्मे शरई को कुबूल और तसलीम करते हुए अपने कौल व फेल से तौबा करते हुए कहा कि वह कल भी आला हजरत के मसलक में थे, आज भी हैं और जिंदगी भर रहेंगे। प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि जिस दिन मुफ्तियों के पैनल ने मौलाना तौकीर का बयान लिया था उस दिन भी उन्होंने सारे लोगों की मौजूदगी में अपने अगले पिछले गुनाहों, गैर शरई कामों, जाने अनजाने कथनी-करनी से तौबा की थी। साथ ही उन्होंने मुफ्तियों को यह यकीन भी दिलाया था कि वह आइंदा मरकज अहले सुन्नत और जिम्मेदारों के मशवरे के बगैर कोई भी ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे मसलक, मजहब और मरकज के वकार पर आंच आए और जो फतवे की जद में आता हो।
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उधर, मुफ्तियों के फैसला सुनाए जाने के बाद भी मौलाना तौकीर अपनी बात पर कायम दिखे। अमर उजाला से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इंसान पर तौबा हर वक्त लाजिम है। वह भी हर वक्त तौबा करते हैं कि अल्लाह उनके गुनाहों जो जाने अनजाने में हुए हों, उन्हें माफ फरमाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह देश से प्रेम करते हैं इसलिए लोकतंत्र की हिफाजत और नौजवानों को आतंकवाद और उसके झूठे इल्जाम से बचाने के लिए उन्हें कहीं भी जाना पडे़गा तो वह जाएंगे। बात सिर्फ देवबंद की ही नहीं है। देवबंद जाने का मकसद नेक था। कौम और राष्ट्र की भलाई सोच कर गया था। मसलकी इत्तेहाद के लिए नहीं गया था और न वह हो सकता है।
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पैनल का जारी फतवा
बरेली। मौलाना तौकीर रजा खां के मामले में मुफ्तियों ने अपने फतवे में कहा है कि अखबारी बयानों, तस्वीरों, सोशल मीडिया की खबरों और पैनल के सामने दिए गए जैद (मौलाना तौकीर) के बयान से यह साफ हो गया है कि वह दारुल उलूम देवबंद गए, वहां के मौलवियों के साथ बैठे, उनके साथ गुफ्तगू की जो कि हराम और अशद (ज्यादा) हराम है। लिहाजा जैद अपने इस गैर शरई काम से तौबा व रुजू करें।
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तौकीर मियां से दरगाह ने खुद को किया अलग
बरेली। मौलाना तौकीर रजा खां के खिलाफ मुफ्तियों का फैसला सुनाए जाने के साथ दरगाह आला हजरत ने यह भी साफ कर दिया है कि मसलक के मुखालिफ उनकी किसी भी कथनी या करनी को मरकज से न जोड़ा जाए। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां व उनके बेटे सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां ने एक अन्य प्रेस नोट में हुए कहा है कि मौलाना तौकीर एक सियासी आदमी हैं और आए दिन विभिन्न सियासी कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं। इसमें कुछ कार्यक्रम ऐसे होते हैं कि जिनकी मजहबो मसलक इजाजत नहीं देता। मरकजे अहले सुन्नत, खानदाने आला हजरत और दरगाह आला हजरत की जिम्मेदार शख्सियतों की तरफ से उन्हें इन कार्यक्रमों में शिरकत करने की इजाजत भी नहीं होती और न कोई इसे पसंद करता है। लिहाजा मौलाना तौकीर हों या उन सहित खानदान का कोई भी शख्स, किसी भी फर्द के गैर शरई और मसलक मुखालिफ सरगर्मियों को मरकजे अहले सुन्नत से न जोड़ा जाए, न ही इसे मरकज की आवाज समझा जाए। न इसे सनद व सुबूत बनाया जाए और न इसे मरकज के खाते में डाला जाए। यह भी साफ किया है कि मौलाना तौकीर के देवबंद जाने से भी उन दोनों लोगों का कोई लेनादेना नहीं है।