{"_id":"596530684f1c1b00398b4665","slug":"system-fails-sale-of-plots-on-the-banks-of-rivers","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिस्टम फेल! नदियों के किनारों पर लगी प्लाटों की सेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिस्टम फेल! नदियों के किनारों पर लगी प्लाटों की सेल
बरेली
Updated Wed, 12 Jul 2017 01:39 AM IST
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नहरों की जमीन पर कब्जे करके तो बरसों पहले ही कालोनियां बसायी जा चुकी हैं, अब बारी नदियों की है। नदियों पर भी तेजी से कब्जे शुरू हो गए हैं। नदियों पर भी कब्जे शुरू हो गए हैं। शहर की नकटिया और किला नदी के किनारे की काफी जमीन कब्जा चुके भूमाफिया की नजर अब नदियों की मुख्य धारा पर भी है। मिट्टी से भराव करके नदियां पाटकर कालोनियां काटने का धंधा जोरों पर है। अब इसे हैरत की बात भी नहीं कहेंगे कि अफसरों की मिलीभगत से यह पूरा गोरखधंधा चलाया जा रहा है। इन्हीं वजहों से धंधेबाजों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि बड़ों की देखादेखी छोटे तबके के लोगों ने भी अवैध तरीके से पांच सौ या हजार रुपये गज के हिसाब से नदी की जमीन खरीद रखी हैं। ये लोग उसमें झुग्गी झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। इनको खुद नहीं पता कि वह अवैध कब्जाधारक हैं।
नकटिया नदी : पानी में सीवर, जमीन पर कब्जे
पीलीभीत बाईपास रोड पर एग्जीक्यूटिव क्लब क्लब रोड से बिचपुरी की ओर जाने वाले रोड के बीच में नकटिया नदी पड़ती है। यहां सेतु निगम की ओर से पुल निर्माण का काम चल रहा है। नकटिया यहां पतला सा नाला बनकर रह गई है। नदी के एक ओर प्राइवेट कालोनी के कूड़े के ढेर जमा हैं, यही नहीं सीवर को नदी में ही खोल दिया गया है। सीवर का पानी आने से नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। यहां रहने वाले एक डेयरी मालिक ने बताया कि नदी के किनारे कांधरपुर के रहने वाले एक छोटे बिल्डर के अलावा सुरेश शर्मा नगर के एक दीवान जी (कांस्टेबल) ने नदी के किनारे पक्की सड़क बना दी है। सड़क बनने के बाद यहां नदी की जमीन पांच हजार रुपये गज के हिसाब से बेची जा रही है। लालफाटक के नजदीक रहने वाले प्रापर्टी डीलर ने भी नदी के किनारे की जमीन की प्लाटिंग कर रखी है।
डोहरा रोड : नदी किनारे प्लाटिंग, दीवार, कूड़ाघर
यहां पुल के दोनों ओर नदी के किनारे प्लाटिंग कर बाउंड्रीवाल उठा दी गई है। यहां प्राइवेट कालोनाइजर्स ने नदी के किनारे कूड़े का अघोषित ट्रंचिंग ग्राउंड बना दिया है। प्राइवेट कालोनी का सीवर भी नदी में गिरता है। नदी पर अवैध कब्जे लगातार बढ़ रहे हैं। बिल्डर ने यहां जमीन के रेट बढ़ाने के लिए अपनी सड़क भी बना रखी है। बीसलपुर रोड पर नदी के अंदर तक की जमीन की प्लाटिंग कर बेच दी गई है। यहां लोग अपने मकान बना रहे हैं। ठिरिया निजावत खां से चार किलोमीटर आगे कालोनाइजर नदी के किनारे दबाकर 25 सौ आवासों की कालोनी बना रहे हैं। बीडीए ने डेढ़ साल पहले जब कालोनी में मात्र आठ कमरे बने थे, उस समय चालान किया था। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। अवैध कब्जों के चलते नदी का अधिकांश हिस्सा नाले में तब्दील हो चुका है, जहां काले रंग के गंदे पानी में बड़ी-बड़ी घास खड़ी दिखती है।
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किला नदी
लीचीबाग: औने-पौने में जमीन बेचकर झोपड़ियां डलवायीं
किला ओवरब्रिज के नीचे नकटिया नदी का पुराना पुल है। पुल से देखने से नदी पर कब्जा होने की तस्वीर साफ दिखती है। इसके बाद जैसे ही पुल पार करके ढाल के रास्ते से होकर लीचीबाग में देखने पर अजीब नजारा दिखता है। शाकिर, शाहिन, रईसबानों और अख्तर जहां के झोपड़ीनुमा घर नदी के किनारे की जमीन पर बने हैं। अख्तर जहां के घर का नजारा सबसे अलग था। उसने तो नदी की जमीन के काफी हिस्से को घेर रखा है। आगे भी तमाम लोगों ने नदी के किनारे पर कब्जे करके मकान बना लिए हैं। गंदगी का आलम यह है कि बदबू की वजह से यहां रुकना मुश्किल था। कब्जेदारों से पूछा तो उन्होंने उन कई भूमाफियाओं के नाम बताए, जिनसे जमीन खरीदी है।
मिनी बाईपास: नदी में ही बना ली दीवार
मिनी बाईपास चौराहे से क र्मचारी नगर की तरफ किला नदी के पुल से बांयी तरफ भी कब्जे हैं। वहां से पश्चिमी दिशा को देखने पर बांयी तरफ कुछ उद्यमियों ने नदी के किनारे की जमीन को घेरकर दीवार बना ली है। एक नहीं, कई उद्यमियाें ने यहां निर्माण करा रखा है। थोड़ा आगे चलने के बाद खुसरो अस्पताल के पीछे नदी की जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जा कर लिया गया है। सामने नदी के किनारे प्लाटिंग हो रही है। इसके पास में ही किसी ट्रांसपोर्टर ने जमीन खरीद रखी है। यहां तो आपाधापी जैसी स्थिति है। नदी की सरकारी जमीन को भूमाफिया अपनी बताकर बेच रहे हैं, लेकिन किसी अधिकारी को इसकी चिंता नहीं है।
सैदपुर हॉकिंस: भूमाफियाओं ने बना दिया पुल
नर्सरी रोड सैदपुर हॉकिंस से होकर किला नदी पर जाकर देखो तो यहां का नजारा और चौंकाने वाला था। यहां कई भूमाफियाओं ने गठजोड़ कर रखा है। हैरानी की बात यह है कि कानून को ठेंगा दिखाते हुए भूमाफिया ने नदी पर खुद का पुल बनवा दिया। पुलिस और प्रशासन के किसी अधिकारी को इसकी परवाह नहीं है। दोनों तरफ भूमाफिया कालोनी बना रहे हैं। सैदपुर हॉकिंस की जमीन को दस हजार रुपये गज और नदी के उस पर किला छावनी की जमीन आठ हजार रुपये तक बेची जा रही है। सैदपुर की तरफ की जमीन बर्फखाने के पास रहने वाला भूमाफिया बेच रहा है। जबकि बाकरगंज का भूमाफिया किला छावनी की तरफ की जमीन बेच रहा है।
कोट--
5.5 फुट तक ऊंचाई वाली बाउंड्रीवाल बनाने पर प्राधिकरण नियमों में रोक का प्रावधान नहीं है। इससे ज्यादा की बाउंड्रीवाल है तो हम एई-जेई को भेजकर जांच कराकर कार्रवाई करेंगे। नदियों के किनारे की जमीन पर कब्जे का एसडीएम और तहसीलदार को संज्ञान लेना चाहिए। डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
अवैध निर्माणों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। जिन अफसरों ने इन कब्जों को शह दी होगी उनके खिलाफ भी लिखा जाएगा- राघवेंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी
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नकटिया नदी : पानी में सीवर, जमीन पर कब्जे
पीलीभीत बाईपास रोड पर एग्जीक्यूटिव क्लब क्लब रोड से बिचपुरी की ओर जाने वाले रोड के बीच में नकटिया नदी पड़ती है। यहां सेतु निगम की ओर से पुल निर्माण का काम चल रहा है। नकटिया यहां पतला सा नाला बनकर रह गई है। नदी के एक ओर प्राइवेट कालोनी के कूड़े के ढेर जमा हैं, यही नहीं सीवर को नदी में ही खोल दिया गया है। सीवर का पानी आने से नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है। यहां रहने वाले एक डेयरी मालिक ने बताया कि नदी के किनारे कांधरपुर के रहने वाले एक छोटे बिल्डर के अलावा सुरेश शर्मा नगर के एक दीवान जी (कांस्टेबल) ने नदी के किनारे पक्की सड़क बना दी है। सड़क बनने के बाद यहां नदी की जमीन पांच हजार रुपये गज के हिसाब से बेची जा रही है। लालफाटक के नजदीक रहने वाले प्रापर्टी डीलर ने भी नदी के किनारे की जमीन की प्लाटिंग कर रखी है।
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डोहरा रोड : नदी किनारे प्लाटिंग, दीवार, कूड़ाघर
यहां पुल के दोनों ओर नदी के किनारे प्लाटिंग कर बाउंड्रीवाल उठा दी गई है। यहां प्राइवेट कालोनाइजर्स ने नदी के किनारे कूड़े का अघोषित ट्रंचिंग ग्राउंड बना दिया है। प्राइवेट कालोनी का सीवर भी नदी में गिरता है। नदी पर अवैध कब्जे लगातार बढ़ रहे हैं। बिल्डर ने यहां जमीन के रेट बढ़ाने के लिए अपनी सड़क भी बना रखी है। बीसलपुर रोड पर नदी के अंदर तक की जमीन की प्लाटिंग कर बेच दी गई है। यहां लोग अपने मकान बना रहे हैं। ठिरिया निजावत खां से चार किलोमीटर आगे कालोनाइजर नदी के किनारे दबाकर 25 सौ आवासों की कालोनी बना रहे हैं। बीडीए ने डेढ़ साल पहले जब कालोनी में मात्र आठ कमरे बने थे, उस समय चालान किया था। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। अवैध कब्जों के चलते नदी का अधिकांश हिस्सा नाले में तब्दील हो चुका है, जहां काले रंग के गंदे पानी में बड़ी-बड़ी घास खड़ी दिखती है।
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किला नदी
लीचीबाग: औने-पौने में जमीन बेचकर झोपड़ियां डलवायीं
किला ओवरब्रिज के नीचे नकटिया नदी का पुराना पुल है। पुल से देखने से नदी पर कब्जा होने की तस्वीर साफ दिखती है। इसके बाद जैसे ही पुल पार करके ढाल के रास्ते से होकर लीचीबाग में देखने पर अजीब नजारा दिखता है। शाकिर, शाहिन, रईसबानों और अख्तर जहां के झोपड़ीनुमा घर नदी के किनारे की जमीन पर बने हैं। अख्तर जहां के घर का नजारा सबसे अलग था। उसने तो नदी की जमीन के काफी हिस्से को घेर रखा है। आगे भी तमाम लोगों ने नदी के किनारे पर कब्जे करके मकान बना लिए हैं। गंदगी का आलम यह है कि बदबू की वजह से यहां रुकना मुश्किल था। कब्जेदारों से पूछा तो उन्होंने उन कई भूमाफियाओं के नाम बताए, जिनसे जमीन खरीदी है।
मिनी बाईपास: नदी में ही बना ली दीवार
मिनी बाईपास चौराहे से क र्मचारी नगर की तरफ किला नदी के पुल से बांयी तरफ भी कब्जे हैं। वहां से पश्चिमी दिशा को देखने पर बांयी तरफ कुछ उद्यमियों ने नदी के किनारे की जमीन को घेरकर दीवार बना ली है। एक नहीं, कई उद्यमियाें ने यहां निर्माण करा रखा है। थोड़ा आगे चलने के बाद खुसरो अस्पताल के पीछे नदी की जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जा कर लिया गया है। सामने नदी के किनारे प्लाटिंग हो रही है। इसके पास में ही किसी ट्रांसपोर्टर ने जमीन खरीद रखी है। यहां तो आपाधापी जैसी स्थिति है। नदी की सरकारी जमीन को भूमाफिया अपनी बताकर बेच रहे हैं, लेकिन किसी अधिकारी को इसकी चिंता नहीं है।
सैदपुर हॉकिंस: भूमाफियाओं ने बना दिया पुल
नर्सरी रोड सैदपुर हॉकिंस से होकर किला नदी पर जाकर देखो तो यहां का नजारा और चौंकाने वाला था। यहां कई भूमाफियाओं ने गठजोड़ कर रखा है। हैरानी की बात यह है कि कानून को ठेंगा दिखाते हुए भूमाफिया ने नदी पर खुद का पुल बनवा दिया। पुलिस और प्रशासन के किसी अधिकारी को इसकी परवाह नहीं है। दोनों तरफ भूमाफिया कालोनी बना रहे हैं। सैदपुर हॉकिंस की जमीन को दस हजार रुपये गज और नदी के उस पर किला छावनी की जमीन आठ हजार रुपये तक बेची जा रही है। सैदपुर की तरफ की जमीन बर्फखाने के पास रहने वाला भूमाफिया बेच रहा है। जबकि बाकरगंज का भूमाफिया किला छावनी की तरफ की जमीन बेच रहा है।
कोट--
5.5 फुट तक ऊंचाई वाली बाउंड्रीवाल बनाने पर प्राधिकरण नियमों में रोक का प्रावधान नहीं है। इससे ज्यादा की बाउंड्रीवाल है तो हम एई-जेई को भेजकर जांच कराकर कार्रवाई करेंगे। नदियों के किनारे की जमीन पर कब्जे का एसडीएम और तहसीलदार को संज्ञान लेना चाहिए। डा. सुरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष बीडीए
अवैध निर्माणों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। जिन अफसरों ने इन कब्जों को शह दी होगी उनके खिलाफ भी लिखा जाएगा- राघवेंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी