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Bareilly News: 201 लोगों के खून में पनप रहा था सिफलिस
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बरेली। अनजान की जान बचाने के लिए किए गए रक्तदान से पिछले पांच साल में 515 रक्तदाताओं की भी जान बची। इसकी पुष्टि ब्लड बैंक के आंकड़े कर रहे हैं। इसमें 14 यूनिट रक्त एचआईवी, 201 यूनिट सिफलिस (सायलेंट किलर) संक्रमित मिला। ब्लड बैंक की सूचना पर जांच, इलाज शुरू कराया।
जिला अस्पताल ब्लड बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2022 में 116, 2023 में 120, 2024 में 128, 2025 में 102, 2026 में अगस्त तक 49 यूनिट रक्त संक्रमित मिला। क्रमवार सिफलिस के 59, 40, 41, 42 और अगस्त तक 19 व्यक्ति के खून में सिफलिस टेस्ट रिएक्टिव मिला। ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. अमित दिनकर के मुताबिक सिफलिस की शुरुआती अवस्था में जननांग, गुदा या मुंह के आसपास बिना दर्द का घाव होता है पर स्पष्ट लक्षण न होने से इसे सायलेंट किलर भी कहा जाता है। कई बार घाव खुद गायब होने पर व्यक्ति संक्रमण से मुक्त का भ्रम पाल लेता है।
जबकि बिना इलाज संक्रमण शरीर में बना रह सकता है और बाद में गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। ये ट्रेपोनेमा पैलीडम बैक्टीरिया से होता है। इसका इलाज संभव है पर समय पर पहचान न होने से शरीर के कई अंग को दुष्प्रभाव होता है। जो जान का जोखिम बनने की आशंका है।
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सुरक्षित संबंध और समय पर जांच जरूरी
सिफलिस से बचाव के लिए सुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित घाव के सीधे संपर्क से बचना और जोखिम होने पर समय से जांच जरूरी है। गर्भवती महिला में संक्रमण की पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि संक्रमण गर्भस्थ शिशु तक पहुंचकर गंभीर नुकसान कर सकता है। बीमारी की पुष्टि होने पर इलाज कराने में देर नहीं होनी चाहिए। आमतौर पर लोग सिफलिस जांच नहीं कराते लेकिन रक्तदान में यह निशुल्क होती है।
रक्तदाता को गोपनीय तरीके से दी जाती है सूचना
ब्लड बैंक जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक रक्तदान के बाद ब्लड बैंक में रक्त की संक्रमण संबंधी जांच होती है। इसमें एचआईवी, सिफलिस के लिए वीडीआरएल स्क्रीनिंग होती है। रक्त रिएक्टिव मिलने पर मरीज को नहीं चढ़ाया जाता। संबंधित रक्तदाता को गोपनीय सूचना देकर चिकित्सकीय जांच और इलाज की सलाह दी जाती है। वीडीआरएल रिएक्टिव सिफलिस की अंतिम पुष्टि नहीं होती, आगे जांच जरूरी है।
पिछले पांच साल में रक्तदान संबंधी रिपोर्ट
वर्ष रक्तदान रक्त प्रयोग एचआईवी एचसीवी एचबीवी सिफलिस
2022 2991 2886 02 16 39 59
2023 2722 2798 02 48 30 40
2024 2934 2774 07 35 45 41
2025 2927 2907 03 21 36 42
2026 1434 1495 02 11 17 19
नोट: आंकड़े ब्लड बैंक से प्राप्त। 2026 में अगस्त तक का डेटा।
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जिला अस्पताल ब्लड बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2022 में 116, 2023 में 120, 2024 में 128, 2025 में 102, 2026 में अगस्त तक 49 यूनिट रक्त संक्रमित मिला। क्रमवार सिफलिस के 59, 40, 41, 42 और अगस्त तक 19 व्यक्ति के खून में सिफलिस टेस्ट रिएक्टिव मिला। ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. अमित दिनकर के मुताबिक सिफलिस की शुरुआती अवस्था में जननांग, गुदा या मुंह के आसपास बिना दर्द का घाव होता है पर स्पष्ट लक्षण न होने से इसे सायलेंट किलर भी कहा जाता है। कई बार घाव खुद गायब होने पर व्यक्ति संक्रमण से मुक्त का भ्रम पाल लेता है।
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जबकि बिना इलाज संक्रमण शरीर में बना रह सकता है और बाद में गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। ये ट्रेपोनेमा पैलीडम बैक्टीरिया से होता है। इसका इलाज संभव है पर समय पर पहचान न होने से शरीर के कई अंग को दुष्प्रभाव होता है। जो जान का जोखिम बनने की आशंका है।
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सुरक्षित संबंध और समय पर जांच जरूरी
सिफलिस से बचाव के लिए सुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित घाव के सीधे संपर्क से बचना और जोखिम होने पर समय से जांच जरूरी है। गर्भवती महिला में संक्रमण की पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि संक्रमण गर्भस्थ शिशु तक पहुंचकर गंभीर नुकसान कर सकता है। बीमारी की पुष्टि होने पर इलाज कराने में देर नहीं होनी चाहिए। आमतौर पर लोग सिफलिस जांच नहीं कराते लेकिन रक्तदान में यह निशुल्क होती है।
रक्तदाता को गोपनीय तरीके से दी जाती है सूचना
ब्लड बैंक जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक रक्तदान के बाद ब्लड बैंक में रक्त की संक्रमण संबंधी जांच होती है। इसमें एचआईवी, सिफलिस के लिए वीडीआरएल स्क्रीनिंग होती है। रक्त रिएक्टिव मिलने पर मरीज को नहीं चढ़ाया जाता। संबंधित रक्तदाता को गोपनीय सूचना देकर चिकित्सकीय जांच और इलाज की सलाह दी जाती है। वीडीआरएल रिएक्टिव सिफलिस की अंतिम पुष्टि नहीं होती, आगे जांच जरूरी है।
पिछले पांच साल में रक्तदान संबंधी रिपोर्ट
वर्ष रक्तदान रक्त प्रयोग एचआईवी एचसीवी एचबीवी सिफलिस
2022 2991 2886 02 16 39 59
2023 2722 2798 02 48 30 40
2024 2934 2774 07 35 45 41
2025 2927 2907 03 21 36 42
2026 1434 1495 02 11 17 19
नोट: आंकड़े ब्लड बैंक से प्राप्त। 2026 में अगस्त तक का डेटा।