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हैरत : देश कोरोना मुक्त, फिर भी जिले में सक्रिय रही हेल्पडेस्क
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बरेली। वर्ष 2023 में देश के कोरोना मुक्त होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में आयोजित होने वाले आरोग्य मेलों में हेल्पडेस्क सक्रिय रही। यहां मरीजों की स्क्रीनिंग भी होती रही।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्रों के कोविड हेल्पडेस्क पर बीते वर्ष तीन नवंबर को 352, वर्ष 2025 में 12 जनवरी को 521, 16 फरवरी को 550, दो मार्च को 436, नौ मार्च को 510, 23 मार्च को 502, 30 मार्च को 455, छह अप्रैल को 390, 13 अप्रैल को 566, चार मई को 669 मरीजों की कोरोना जांच की गई। इनमें ज्यादातर बुखार, सर्दी-जुकाम से पीड़ित मरीजों की स्क्रीनिंग दिखाई गई है। वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम (वीटीएम) और एंटीजन किट के अभाव में न सैंपल लिए गए, न ही आरटीपीसीआर जांच की गई। कॉलम में शून्य दर्ज करते रहे।
हैरत यह कि रिपोर्ट भी बगैर जांचे ही सीएमओ, डीएसओ व अन्य जिम्मेदार शासन को भेजते रहे। अब मामला प्रकाश में आने के बाद खलबली मची है। अधिकारियों ने इसे मानवीय चूक बताई है। रिपोर्ट का प्रारूप सही कराने की बात कह रहे हैं।
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डीएसओ बोले- पुराने प्रारूप पर रिपोर्ट भरने से हुई चूक
जिला सर्विलांस अधिकारी (डीएसओ) डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, देश के कोरोना मुक्त घोषित होने पर हेल्पडेस्क निष्क्रिय थी। शासन से जांच उपकरण मिलने बंद हो गए थे। इनकी स्थानीय खरीद भी नहीं हुई। कर्मचारी द्वारा पूर्व के प्रारूप पर रिपोर्ट भरी गई होगी। कोविड हेल्पडेस्क को फीवर हेल्पडेस्क बनाया गया था। प्रारूप में हेल्पडेस्क से कोविड शब्द नहीं हटा। मेले के नोडल को इसे ठीक कराने के लिए कहा गया है। ब्यूरो
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विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्रों के कोविड हेल्पडेस्क पर बीते वर्ष तीन नवंबर को 352, वर्ष 2025 में 12 जनवरी को 521, 16 फरवरी को 550, दो मार्च को 436, नौ मार्च को 510, 23 मार्च को 502, 30 मार्च को 455, छह अप्रैल को 390, 13 अप्रैल को 566, चार मई को 669 मरीजों की कोरोना जांच की गई। इनमें ज्यादातर बुखार, सर्दी-जुकाम से पीड़ित मरीजों की स्क्रीनिंग दिखाई गई है। वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम (वीटीएम) और एंटीजन किट के अभाव में न सैंपल लिए गए, न ही आरटीपीसीआर जांच की गई। कॉलम में शून्य दर्ज करते रहे।
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हैरत यह कि रिपोर्ट भी बगैर जांचे ही सीएमओ, डीएसओ व अन्य जिम्मेदार शासन को भेजते रहे। अब मामला प्रकाश में आने के बाद खलबली मची है। अधिकारियों ने इसे मानवीय चूक बताई है। रिपोर्ट का प्रारूप सही कराने की बात कह रहे हैं।
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डीएसओ बोले- पुराने प्रारूप पर रिपोर्ट भरने से हुई चूक
जिला सर्विलांस अधिकारी (डीएसओ) डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, देश के कोरोना मुक्त घोषित होने पर हेल्पडेस्क निष्क्रिय थी। शासन से जांच उपकरण मिलने बंद हो गए थे। इनकी स्थानीय खरीद भी नहीं हुई। कर्मचारी द्वारा पूर्व के प्रारूप पर रिपोर्ट भरी गई होगी। कोविड हेल्पडेस्क को फीवर हेल्पडेस्क बनाया गया था। प्रारूप में हेल्पडेस्क से कोविड शब्द नहीं हटा। मेले के नोडल को इसे ठीक कराने के लिए कहा गया है। ब्यूरो