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किसानों को नहीं मिली 27 लाख से अधिक सब्सिडी की रकम
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 14 Feb 2018 08:28 PM IST
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किसानों की हालत सुधारने के लिए सरकारें आय दोगुनी करने की योजना पर काम कर रही हैं, लेकिन विभागीय तंत्र की नाकामी उम्मीदों पर पानी फेर रही है। हाल यह है कि उपज का उचित मूल्य मिलना तो दूर बीजों की खरीद पर मिलने वाली सब्सिडी (डीबीटी) का लाभ भी किसानों को समय से नहीं मिल पा रहा है। यही वजह रही कि कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जिला कृषि अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को सस्पेंड करके डैमेज कंट्रोल किया है और किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को जाहिर करने का प्रयास किया है।
जनपद में रबी सीजन में 8300 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष 7950 क्विंटल बीज का उठान किया गया। ब्लाक मुख्यालयों पर संचालित राजकीय कृषि बीज भंडारों के माध्यम से करीब 7200 क्विंटल बीज किसानों को बिक्री किया गया। जबकि तय समय में 750 क्विंटल बीजों की बिक्री नहीं हो सकी। इसमें 5500 क्विंटल बीजों की सब्सिडी का पैसा किसानों के बैंक खाते में भेजा गया है। शेष 1700 क्विंटल बीज की सब्सिडी अभी किसानों को नहीं मिल पाई है। राजकीय कृषि बीज भंडारों पर गेहूं बीज (प्रमाणित) 3100 रुपये और आधारीय बीज 3200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों को दिया गया, जबकि इन बीजों पर देय सब्सिडी 1600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों के बैंक खाते में भेजी जानी थी। अधिकारियों की उदासीनता के चलते 1700 क्विंटल बीजों पर देय करीब 27 लाख रुपये सब्सिडी किसानों के खाते में नहीं पहुंची है। तो वहीं लक्ष्य के मुताबिक बीज की बिक्री न किए जाने से प्रदेश सरकार को भी लाखों की चपत लगी है।
सात माह का रहा कार्यकाल
कृषि मंत्री द्वारा सस्पेंड किए गए जिला कृषि अधिकारी संतोष कुमार वर्मा ने 13 जुलाई 2017 को ज्वाइन किया था। इसके बाद महज सात माह कार्यकाल पूरा कर सके।
कृषि अधिकारियों के सीयूजी महीनों से बंद
किसानों की हितैषी होने का दावा भले ही सरकारें करती हों, लेकिन कृषि अधिकारी किसानों की समस्याओं का निराकरण करना तो दूर सुनना तक पसंद नहीं करते हैं। यही वजह है कि कई महीनों से कृषि अधिकारियों के फोन नंबर बंद हैं। जिला कृषि अधिकारी का सीयूजी 9235629410 और उप कृषि निदेशक का सीयूजी 9235629409 है, जिसको मिलाने पर नंबर गलत होने की जानकारी मिल रही है। निजी नंबर किसी को देते नहीं, यदि कहीं से लेकर किसी ने मिलाया तो उसका जवाब नहीं देते हैं।
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जनपद में रबी सीजन में 8300 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष 7950 क्विंटल बीज का उठान किया गया। ब्लाक मुख्यालयों पर संचालित राजकीय कृषि बीज भंडारों के माध्यम से करीब 7200 क्विंटल बीज किसानों को बिक्री किया गया। जबकि तय समय में 750 क्विंटल बीजों की बिक्री नहीं हो सकी। इसमें 5500 क्विंटल बीजों की सब्सिडी का पैसा किसानों के बैंक खाते में भेजा गया है। शेष 1700 क्विंटल बीज की सब्सिडी अभी किसानों को नहीं मिल पाई है। राजकीय कृषि बीज भंडारों पर गेहूं बीज (प्रमाणित) 3100 रुपये और आधारीय बीज 3200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों को दिया गया, जबकि इन बीजों पर देय सब्सिडी 1600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों के बैंक खाते में भेजी जानी थी। अधिकारियों की उदासीनता के चलते 1700 क्विंटल बीजों पर देय करीब 27 लाख रुपये सब्सिडी किसानों के खाते में नहीं पहुंची है। तो वहीं लक्ष्य के मुताबिक बीज की बिक्री न किए जाने से प्रदेश सरकार को भी लाखों की चपत लगी है।
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सात माह का रहा कार्यकाल
कृषि मंत्री द्वारा सस्पेंड किए गए जिला कृषि अधिकारी संतोष कुमार वर्मा ने 13 जुलाई 2017 को ज्वाइन किया था। इसके बाद महज सात माह कार्यकाल पूरा कर सके।
कृषि अधिकारियों के सीयूजी महीनों से बंद
किसानों की हितैषी होने का दावा भले ही सरकारें करती हों, लेकिन कृषि अधिकारी किसानों की समस्याओं का निराकरण करना तो दूर सुनना तक पसंद नहीं करते हैं। यही वजह है कि कई महीनों से कृषि अधिकारियों के फोन नंबर बंद हैं। जिला कृषि अधिकारी का सीयूजी 9235629410 और उप कृषि निदेशक का सीयूजी 9235629409 है, जिसको मिलाने पर नंबर गलत होने की जानकारी मिल रही है। निजी नंबर किसी को देते नहीं, यदि कहीं से लेकर किसी ने मिलाया तो उसका जवाब नहीं देते हैं।
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