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डेंगू का डर: बरेली में दो महीने में 40 करोड़ रुपये की एंटीबॉयोटिक खा गए लोग, इलाज में खर्च हुई गाढ़ी कमाई

Thu, 23 Nov 2023 04:56 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Thu, 23 Nov 2023 04:56 PM IST
सार

बरेली में दवा कारोबारियों के मुताबिक इस बार डेंगू का प्रकोप सर्वाधिक रहा। बुखार, सर्दी, जुकाम, बदन दर्द, प्लेटलेट्स की कमी होने पर डेंगू की आशंका पर लोग सहम गए। इसके चलते दवा कारोबार कई गुना बढ़ गया। सबसे ज्यादा एंटीबॉयोटिक दवाओं की बिक्री हुई। 
 

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Antibiotic medicine worth Rs 40 crore sold due to dengue in Bareilly
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बरेली में मच्छरों के डंक से निजात दिलाने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम रहा। डेंगू के रिकॉर्ड मामले सामने आए तो शहरवासियों की गाढ़ी कमाई दवा व इलाज में खर्च हुई। सामान्य परिस्थितियों में प्रतिमाह अधिकतम दो-तीन करोड़ रुपये तक सिमटने वाला दवा कारोबार बीते दो माह में 50 करोड़ तक पहुंच गया।  इसमें भी 40 करोड़ रुपये की सिर्फ एंटीबॉयोटिक दवाइयां बिकीं। पैरासिटामॉल, प्लेटलेट्स, मल्टीविटामिन, गैस, जुकाम व खांसी की दवाओं की जबर्दस्त मांग रही। 

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दवा कारोबारियों के मुताबिक इस बार डेंगू का प्रकोप सर्वाधिक रहा। बुखार, सर्दी, जुकाम, बदन दर्द, प्लेटलेट्स की कमी होने पर डेंगू की आशंका पर लोग सहम गए। डॉक्टरों ने भी संदिग्ध लक्षण मिलने पर पर्चे पर एंटीबॉयोटिक दवाओं के साथ में दर्द, बुखार, मल्टीविटामिन, गैस और प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए दवाएं लिखीं। 15 सितंबर से दवाओं की मांग बढ़ी जो 15 नवंबर तक जारी रही। इसी दौरान डेंगू भी पीक पर रहा। दिवाली के बाद से डेंगू थमने लगा तो दवाओं की बिक्री भी कम हो गई। 
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चिकित्सक के परामर्श के बिना न लें एंटीबॉयोटिक
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक एंटीबॉयोटिक दवाएं बैक्टीरिया संबंधी बीमारियों से निजात के लिए दी जाती हैं। सर्दी, खांसी, बुखार जैसे वायरल इंफेक्शन पर ये बेअसर साबित होती हैं। बगैर चिकित्सकीय परामर्श के मनमुताबिक सेवन से एंटीबायोटिक दवा का बैक्टीरिया पर असर नहीं होता, क्योंकि बैक्टीरिया खुद में संबंधित एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। लिहाजा, दवा का उनपर असर नहीं होता। ऐसे में बैक्टीरिया अपनी संख्या बढ़ाकर और बीमार बनाते हैं। भविष्य में गंभीर बीमारियां होने पर जान बचना भी मुश्किल होता है।
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दो माह में किस साल्ट की कितनी रही बिक्री
  • एंटीबॉयोटिक की मांग 10 गुना बढ़ी, कारोबार करीब 40 करोड़। 
  • पैरासिटामॉल की बिक्री 10 गुना बढ़ी, कारोबार करीब 4.5 करोड़। 
  • प्लेटलेट्स के लिए कैरिका पपाया की मांग 20 गुना बढ़ी, कारोबार करीब एक करोड़।
  • दर्द निवारक एसिक्लोफीनिक पैरासिटामॉल की मांग दो गुना बढ़ी, कारोबार एक करोड़।
  • गैस के लिए रैबेप्राजोल, डॉमपेरिडोन की मांग पांच गुना बढ़ी, कारोबार दो करोड़।
  • मल्टीविटामिन टैबलेट की मांग छह गुना बढ़ी, कारोबार 50 लाख।
नोट : अनुमानित आंकड़ा बरेली केमिस्ट एसोसिएशन के अनुसार।
 

एजिथ्रोमायसिन और एमॉक्सिसिलिन की मांग ज्यादा
बुखार पीड़ित मरीजों को डॉक्टरों ने एजिथ्रोमायसिन, सेफिक्सीन, एमॉक्सिसिलिन आदि एंटीबॉयोटिक दवाओं का सुझाव दिया। इसमें भी एजिथ्रोमायसिन की छह गुना, एमॉक्सिसिलिन की मांग पांच गुना रही। सेफिक्सीन कारोबार आम दिनों के सापेक्ष चार गुना तक बढ़ गया।

अब तक जिले में मिल चुके हैं 956 डेंगू मरीज
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक डेंगू के 956 मरीज मिल चुके हैं। वहीं, 24,335 डेंगू संदिग्ध भी मिले हैं। 22 संदिग्ध मरीजों की मौत हुई है। शहर में डेंगू के करीब 400 और देहात में 500 मरीज मिले हैं। आंकड़ा अभी थमा नहीं है। बुधवार को भी डेंगू के तीन नए मरीज मिले हैं।

केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी ने बताया कि रिकॉर्ड केस आने की वजह से लोगों में डेंगू की दहशत रही। जिन्हें भी संदिग्ध लक्षण नजर आए, उन्होंने पैरासिटामॉल के साथ एंटीबॉयोटिक ली। ज्यादातर पर्चों पर इनके साथ दर्द, गैस, मल्टीविटामिन की दवाएं भी लिखी गईं।

केमिस्ट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष राकेश नरूला ने कहा कि डेंगू के केस बढ़ने के बाद जिनकी भी प्लेटलेट्स कम हुईं, उन्होंने प्लेटलेट्स यूनिट के साथ ही दवाओं का भी सेवन किया। कइयों ने एहतियात में भी दवाएं खा लीं। कमजोरी, दर्द से निजात की दवाएं भी काफी बिकीं। 

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